बोतल पर बवाल! यूपी विधानसभा में बीजेपी-सपा के बीच तीखी नोकझोंक !

UP Vidhan Sabha 2026 में बजट सत्र के आखिरी दिन बोतल की बात चली और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हो गए.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में महंगाई पर चर्चा के दौरान मंगलवार को ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जहां सदन का माहौल एक तरफ हल्का-फुल्का दिखा, तो दूसरी ओर सियासी तौर पर बेहद तीखा भी रहा. समाजवादी पार्टी के विधायकों ने शायरी और कविता के ज़रिए सरकार पर निशाना साधा, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से उसी अंदाज़ में ‘बोतल’ वाला तंज कसा गया. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा में ठहाके भी लगे और हंगामे के बीच राजनीतिक नोकझोंक भी खुलकर देखने को मिली.

बोतल पर बवाल! यूपी विधानसभा में बीजेपी-सपा के बीच तीखी नोकझोंक !
बोतल पर बवाल! यूपी विधानसभा में बीजेपी-सपा के बीच तीखी नोकझोंक !

महंगाई पर बहस की शुरुआत सपा विधायक आशु मलिक के सवाल से हुई. उन्होंने सीधे सवाल पूछने के बजाय कविता के माध्यम से अपनी बात रखनी शुरू कर दी. इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें टोकते हुए कहा कि नियमों के तहत प्रश्न पूछा जाए. आशु मलिक ने जवाब दिया कि अभी एक मिनट ही हुआ है, लेकिन स्पीकर ने सख्त लहजे में कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि कुछ भी बोला जाए. इसके बावजूद आशु मलिक ने अपनी कविता जारी रखते हुए महंगाई, कालाबाजारी और आम आदमी पर बढ़ते बोझ को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की.

इसके बाद सपा विधायक आर.के. वर्मा ने भी चर्चा के दौरान शायरी पढ़ते हुए महंगाई पर कटाक्ष किया. उन्होंने कहा—


“तेल की बोतल पूछ रही है,
क्यों तुम इतना देख रहे हो यूं,
पहले तुम ही खरीदते थे मुझे,
अब इतना क्यों सोच रहे हो तुम.

आर.के. वर्मा की इस शायरी पर विपक्ष की बेंच से जहां समर्थन मिला, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से पलटवार भी तुरंत हुआ. गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि इन लोगों को ‘बोतल’ बहुत अखर रही है, जरूर उसके दाम बढ़ गए हैं, इसलिए बोतल ही इन्हें परेशान कर रही है. मंत्री की इस टिप्पणी के बीच स्पीकर सतीश महाना ने मुस्कुराते हुए सवाल किया—“कौन सी बोतल?”

स्पीकर के इस सवाल पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे और कुछ देर के लिए माहौल पूरी तरह हल्का हो गया. सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही तरफ से हंसी सुनाई दी. हालांकि इसके तुरंत बाद फिर सियासी तकरार शुरू हो गई. मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने आगे कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष बोलेंगे और अगर वे कहेंगे कि दाम बढ़ गए हैं, तो उस पर भी सरकार विचार करेगी. इस दौरान विपक्ष की ओर से शोर-शराबा भी देखने को मिला.

स्थिति को संतुलित करते हुए स्पीकर सतीश महाना ने टिप्पणी की कि दोनों पक्षों ने ‘बोतल’ की बात की है और दोनों ने अपने-अपने दिमाग से बोतल समझी है. उनकी इस टिप्पणी ने एक बार फिर सदन में हल्की हंसी का माहौल बना दिया.

इसी बीच समाजवादी पार्टी ने महंगाई के साथ-साथ बेरोजगारी का मुद्दा भी उठाया. सपा विधायकों ने सवाल किया कि जब सरकार युवाओं को नौकरी नहीं दे पा रही है, तो क्या वह सपा सरकार की तरह बेरोजगारी भत्ता देगी. इस पर श्रम मंत्री अनिल राजभर ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार बेरोजगारी भत्ता देने की कोई योजना नहीं बना रही है.

मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट होकर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद ने सपा विधायकों से वॉकआउट करने का आह्वान किया. सपा विधायक अपनी सीटों से उठकर बाहर जाने लगे. तभी स्पीकर सतीश महाना ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा—“अरे, मन नहीं है जाने का… बैठ जाइए आप लोग. आज अंतिम दिन है, मैं चाहता हूं कि सब लोग रहें.”

स्पीकर की इस अपील का असर हुआ और करीब दस सेकंड के भीतर ही सपा के विधायक लौटकर अपनी-अपनी सीटों पर बैठ गए. इस तरह महंगाई से शुरू हुई बहस शायरी, ‘बोतल’ वाले तंज, ठहाकों और सियासी नोकझोंक के बीच आगे बढ़ती रही. यह पूरा घटनाक्रम विधानसभा में लोकतांत्रिक बहस के साथ-साथ सियासी व्यंग्य और कटाक्ष का भी उदाहरण बन गया.

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