सूतक के चलते बंद हुए हनुमान सेतु के द्वार, श्रद्धालुओं से अपील !

चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो गया है. ऐसे में लखनऊ के प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए गए हैं. मंदिर के बाहर बोर्ड लगा दिया गया है.

उत्तर प्रदेश में मंगलवार को चंद्रग्रहण के सूतक काल को ध्यान में रखते हुए राज्यभर के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से पहले लगने वाले सूतक काल में पूजा-पाठ और दर्शन वर्जित माने जाते हैं। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ के प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर के भी मुख्य द्वार बंद कर दिए गए हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से प्रवेश द्वार पर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाकर श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी दी गई है।

सूतक के चलते बंद हुए हनुमान सेतु के द्वार, श्रद्धालुओं से अपील !
सूतक के चलते बंद हुए हनुमान सेतु के द्वार, श्रद्धालुओं से अपील !

मंदिर प्रशासन के अनुसार चंद्रग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो गया था। सूतक लगते ही हनुमान सेतु मंदिर के गर्भगृह सहित पूरे मंदिर परिसर को बंद कर दिया गया। आम दिनों में यहां सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, लेकिन सूतक काल के चलते आज भक्तों को दर्शन का अवसर नहीं मिल सका। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद विधि-विधान के साथ शुद्धिकरण कर मंदिर के कपाट फिर से खोले जाएंगे।

श्रद्धालुओं से संयम और सहयोग की अपील

हनुमान सेतु मंदिर के पुजारियों और प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सूतक काल की धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें और दर्शन के लिए मंदिर न आएं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सूतक काल में पूजा-अर्चना, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठान नहीं किए जाते हैं। इसी कारण मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं से भी विनम्रता पूर्वक बाहर जाने का अनुरोध किया गया। मंदिर के बाहर लगाए गए बोर्ड में साफ लिखा गया है कि चंद्रग्रहण और सूतक काल के कारण दर्शन स्थगित हैं।

पूरे प्रदेश में मंदिर बंद

केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में चंद्रग्रहण के चलते सभी छोटे-बड़े मंदिरों के कपाट बंद किए गए हैं। प्रशासन के अनुसार सूतक काल आज सुबह लगभग नौ बजे से शुरू हो गया था और चंद्रग्रहण समाप्त होने तक यह प्रभावी रहेगा। ग्रहण और सूतक काल की अवधि आज रात करीब साढ़े आठ बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी कर मंदिरों को पुनः खोला जाएगा।

प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में भी यही व्यवस्था लागू की गई है। वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में राम मंदिर, मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर समेत सभी प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट भी आज चंद्रग्रहण के कारण बंद रखे गए हैं। इन मंदिरों के प्रशासन ने भी पहले से दिशा-निर्देश जारी कर श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की थी।

क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है सूतक काल

हिंदू धर्म में सूतक काल को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि ग्रहण से पहले और उसके दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां रोक दी जाती हैं। इस दौरान मंदिरों को बंद रखना, भोजन न बनाना और जप-तप में संयम बरतना परंपरा का हिस्सा माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और शुद्धिकरण के साथ धार्मिक कार्य दोबारा शुरू किए जाते हैं।

प्रशासन पूरी तरह सतर्क

श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। भीड़ नियंत्रण, सूचना प्रसार और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पहले ही आवश्यक तैयारियां कर ली गई थीं। मंदिरों के बाहर सूचना बोर्ड, लाउडस्पीकर और स्वयंसेवकों के माध्यम से लोगों को लगातार सूतक काल की जानकारी दी जाती रही।

ग्रहण के बाद खुलेंगे कपाट

मंदिर प्रशासन के अनुसार चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले मंदिर परिसर और गर्भगृह का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना कर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे दर्शन के लिए आने से पहले समय की जानकारी अवश्य कर लें।

कुल मिलाकर, चंद्रग्रहण और सूतक काल को लेकर उत्तर प्रदेश के सभी मंदिरों में पूरी धार्मिक मर्यादा और परंपरा के साथ व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। श्रद्धालुओं से संयम, धैर्य और सहयोग बनाए रखने की अपील की गई है, ताकि परंपराओं का सम्मान बना रहे और किसी को असुविधा न हो।

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