आज, 3 मार्च 2026, पूरे साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिसे हिंदू धर्म में न केवल एक खगोलीय घटना माना जाता है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब ग्रह राहु और केतु चंद्रमा को ग्रहण कर लेते हैं, तभी चंद्र ग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है।
इससे पहले और दौरान कुछ विशेष धार्मिक नियम माने जाते हैं, जैसे ग्रहण काल में भोजन न करना, मंदिरों के पट बंद रखना और संयम के साथ दिन बिताना।

ग्रहण के समय को लेकर अक्सर थोड़ी कन्फ्यूजन हो सकती है, इसलिए जानना महत्वपूर्ण है कि आज चंद्र ग्रहण कब से कब तक रहेगा और उत्तर प्रदेश में इसे कब देखा जा सकेगा।
UP Me Chandra Grahan Kab Lagega 2026 (यूपी में आज चंद्र ग्रहण कितने बजे दिखेगा)-
| शहर का नाम | चंद्र ग्रहण कब से कब तक रहेगा | चंद्र ग्रहण कितने बजे दिखेगा |
| लखनऊ | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:02 PM से 6:47 PM तक |
| कानपुर | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:02 PM |
| आगरा | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:10 PM |
| वाराणसी | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:12 PM |
| प्रयागराज | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:10–6:15 PM |
| गाजियाबाद | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:20 PM |
| मेरठ | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:15- 6:20 PM |
| बरेली | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:15 PM |
| गोरखपुर | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:10 PM- 6:15 PM |
| अयोध्या | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:05- 6:15 PM |
| मथुरा | 3:20 PM से 6:47 PM | 6:18 PM |
आज चंद्र ग्रहण का समय
वैज्ञानिक तथा पंचांग के अनुसार चंद्र ग्रहण आज सुबह से प्रारंभ होकर रात तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण का मुख्य काल सुबह 9:05 बजे के करीब शुरू होगा। चंद्रग्रहण का यह प्रभाव लगभग रात 8:30 बजे तक जारी रहेगा। यानी करीब 11.5 घंटे तक सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति ऐसी रहेगी कि चंद्रमा ग्रहण की स्थिति में रहेगा।
इस दौरान चन्द्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा, और ग्रहण का यह क्रम धीरे-धीरे सभी चरणों से गुज़रते हुए समाप्त होगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा या पूरा भाग पृथ्वी की छाया में छिपा दिखाई देगा, जो एक अद्भुत खगोलीय अनुभव भी माना जाता है।
उत्तर प्रदेश में ग्रहण का दर्शन

उत्तर प्रदेश सहित देश के अधिकांश हिस्सों में चंद्र ग्रहण सुबह से ही दिखाई देगा। ग्रहण के प्रारंभिक और मध्य चरण को दिन में देखा जा सकता है, और ग्रहण का अधिकतर प्रभाव शाम तक बना रहेगा। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का दृश्य बदलता हुआ प्रतीत होगा और धीरे-धीरे पुनः पूर्ण चंद्रमा का रूप ग्रहण के अंत में दिखाई देगा।
धार्मिक दृष्टि से देखें तो ग्रहण का यह प्रभाव सुबह से शुरू होने के कारण कई मंदिरों में सूतक काल भी पहले से घोषित किया गया है। सूतक काल के दौरान कुछ धार्मिक गतिविधियों, जैसे पूजा-पाठ, भोजन आदि में संयम रखा जाता है। ग्रहण के समाप्ति पश्चात मंदिरों का शुद्धि अनुष्ठान कर पुनः पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ होता है।
धार्मिक नियम और परंपराएँ
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को एक विशेष समय माना गया है। पुराणों में वर्णित है कि ग्रहण के दौरान वातावरण और मन में विशेष परिवर्तन होते हैं, इसलिए ग्रहण काल में निम्न धार्मिक नियम माने जाते हैं:
- भोजन का त्याग: ग्रहण काल में भोजन न करने की परंपरा प्रचलित है। ग्रहण के पूर्व और पश्चात शांतिपूर्वक भोजन को ग्रहण का पालन कहा जाता है।
- मंदिरों के पट बंद: ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा है। इससे धार्मिक मर्यादा का सम्मान होता है और ग्रहण के अंतिम होने तक पूजा-पाठ स्थगित रहता है।
- ध्यान और संयम: ग्रहण के समय संयम, ध्यान, जप और दान को शुभ माना जाता है। कई घरों में ग्रहण समाप्त होने पर स्नान और शुद्धिकरण के बाद पूजा की जाती है।
ग्रहण के पश्चात क्या करें?
जब ग्रहण रात 8:30 बजे के बाद समाप्त हो जाएगा, मंदिरों में शुद्धिकरण कर पूजा-अर्चना का क्रम पुनः शुरू किया जाएगा। श्रद्धालु ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
इस प्रकार, आज का चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण समय है, जिसमें परंपराओं का सम्मान और संयम से जीवन बिताना शुभ माना जाता है।
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