CM नीतीश ने भरा राज्यसभा पर्चा, साथ दिखे अमित शाह!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन कर दिया है. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहे.

बिहार की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब सामने आया जब राज्य के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने गुरुवार (5 मार्च) को राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। करीब दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

नामांकन के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह उपस्थिति राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे साफ संकेत मिलता है कि इस फैसले को एनडीए का पूरा समर्थन हासिल है।

CM नीतीश ने भरा राज्यसभा पर्चा, साथ दिखे अमित शाह!
CM नीतीश ने भरा राज्यसभा पर्चा, साथ दिखे अमित शाह!

10वीं बार बने थे मुख्यमंत्री

पिछले साल हुए बिहार विधानसभा चुनाव के बाद 20 नवंबर को नीतीश कुमार ने लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लंबे समय तक राज्य की राजनीति का चेहरा बने रहने के बाद उनका अचानक राज्यसभा जाने का फैसला कई लोगों के लिए अप्रत्याशित रहा।

10वीं बार बने थे मुख्यमंत्री
10वीं बार बने थे मुख्यमंत्री

वर्ष 2005 से बिहार की सत्ता संभाल रहे नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में कई प्रशासनिक और सामाजिक फैसले लिए, जिनकी चर्चा पूरे देश में हुई। सड़क, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उनके शासन को अक्सर बिहार की राजनीति में एक अलग दौर के रूप में देखा जाता है।

जनता के नाम भावुक संदेश

राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद नीतीश कुमार ने बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें दो दशकों से अधिक समय तक जनता का लगातार विश्वास और समर्थन मिलता रहा है।

उन्होंने कहा, “दो दशकों से अधिक समय तक आपने मुझ पर भरोसा किया और मुझे समर्थन दिया। उसी विश्वास की ताकत से हमने बिहार और यहां के लोगों की पूरी निष्ठा के साथ सेवा की है।”

नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि जनता के भरोसे और सहयोग से ही आज बिहार विकास और गरिमा की नई पहचान बना पाया है। उन्होंने राज्य के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही यह इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के भी सदस्य बनें।

सोशल मीडिया पर कही यह बात

नामांकन से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी अपनी इच्छा जाहिर की। उन्होंने लिखा कि इसी आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए वह इस बार राज्यसभा का सदस्य बनने की इच्छा रखते हैं।

नीतीश कुमार ने लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्यसभा जाने के बाद भी उनका संबंध बिहार की जनता से बना रहेगा। उन्होंने कहा कि विकसित बिहार के निर्माण के लिए वह आगे भी जनता के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। उनके इस बयान को इस संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है कि वह सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर नहीं होंगे, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आ सकते हैं।

बिहार में नया राजनीतिक अध्याय

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में National Democratic Alliance को बड़ी जीत दिलाने के बाद अब सत्ता की कमान किसी नए नेता को सौंपी जा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो Bharatiya Janata Party के किसी नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। यदि बीजेपी का नेता मुख्यमंत्री बनता है, तो यह बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार होगा जब राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा।

दिलचस्प बात यह भी है कि हिंदी भाषी राज्यों में बिहार अब तक ऐसा राज्य रहा है जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा।

राज्यसभा चुनाव का गणित

बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख गुरुवार थी और उसी दिन नीतीश कुमार ने अपना पर्चा दाखिल किया।

राज्य विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि उनका राज्यसभा के लिए निर्वाचित होना मुश्किल नहीं होगा।

नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद अब बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। करीब 20 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद उनका राज्यसभा जाना न सिर्फ उनके राजनीतिक करियर का नया अध्याय होगा, बल्कि बिहार की सत्ता की राजनीति को भी नई दिशा दे सकता है।

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