रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की ड्रीम परियोजना मानी जाने वाली मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है। मुरादाबाद मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) ने रामपुर जिला प्रशासन की प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके बाद यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई अगली सुनवाई तक टाल दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को कथित निर्माण नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मुरादाबाद मंडल आयुक्त के समक्ष अपील दायर की।
सोमवार को प्रस्तावित सुनवाई शोक अवकाश के कारण नहीं हो सकी। इसके बाद यूनिवर्सिटी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए मंडलायुक्त ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
प्रशासन को क्या निर्देश दिए गए?
कमिश्नर ने रामपुर के जिलाधिकारी (DM) और रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले आदेश तक किसी भी भवन को ध्वस्त न किया जाए। यानी फिलहाल यूनिवर्सिटी परिसर में बुलडोजर कार्रवाई पर रोक रहेगी।
जौहर यूनिवर्सिटी क्यों है विवादों में?
रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान ने की थी। यह विश्वविद्यालय वर्षों से भूमि अधिग्रहण, निर्माण संबंधी अनियमितताओं और विभिन्न कानूनी मामलों को लेकर विवादों में रहा है। कई मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अब भी जारी है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार पर निशाना साध रहा है। समाजवादी पार्टी ने इसे शिक्षा संस्थान पर कार्रवाई बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी ध्वस्तीकरण पर रोक के फैसले को उचित बताते हुए सरकार से कानून के दायरे में निष्पक्ष कार्रवाई करने की अपील की है।
अब आगे क्या?
अब इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि रामपुर विकास प्राधिकरण का ध्वस्तीकरण आदेश बरकरार रहेगा या उसमें संशोधन किया जाएगा। फिलहाल कमिश्नर के अंतरिम आदेश से जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत मिली है और परिसर में किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी।