डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों में, अलग-अलग परीक्षाओं में पेपर लीक होते रहे. पेपर लीक किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, लेकिन शायद उस तरह की कार्यवाही नहीं की गई जैसी अब की जा रही है. उन्होंने 2009 में रेलवे भर्ती पेपर लीक से 2012 के एम्स एंट्रेस पेपर लीक तक, कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक गिनाए और कहा कि इसीलिए सोचा गया कि अब इसे लेकर एक फुलप्रूफ सिस्टम बनाया जाए, भारत में चार प्रमुख परीक्षा एजेंसियां हैं. 1992 में जब सरकार कांग्रेस की थी, एक कमेटी ने सुझाव दिया था केंद्रीय परीक्षा कमेटी के गठन का, 2010 में भी एक कमेटी ने ऐसा ही सुझाव दिया था, कांग्रेस और यूपीए की सरकारों ने सुझाव नहीं माने, हमने एनटीए का गठन किया, पहली बार 2024 में यह बिल लाया गया. जून 2024 में लागू किया गया. इस विधेयक के जो मूल उद्देश्य थे, वह परीक्षा में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करना था. जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी, प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें 2024 के बिल को और मजबूत करने की जरूरत है, हम इसी कानून में संशोधन के लिए बिल लाए हैं|
‘परीक्षाओं में पहले भी लीक होते रहे पेपर’, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस को घेरा।