उत्तर प्रदेश की सियासत में रंगों की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। समाजवादी पार्टी की छात्रसभा के ड्रेसकोड में बदलाव के बाद अब सपा कार्यकर्ता नीली ड्रेस में नजर आने की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी के इस नए प्रयोग को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा है।
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी की पारंपरिक राजनीतिक पहचान लंबे समय से लाल टोपी और लाल रंग से जुड़ी रही है। लेकिन अब सपा छात्रसभा के लिए नीले रंग का ड्रेसकोड तय किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में नए सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
सपा के इस बदले हुए ड्रेसकोड पर यूपी बीजेपी चीफ ने तंज कसते हुए इसे “बहरूपिये का खेल” बताया। बीजेपी की ओर से सवाल उठाया गया कि आखिर चुनावी समीकरणों के हिसाब से राजनीतिक पहचान और रंग बदलने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
दरअसल, सपा छात्रसभा के कार्यकर्ताओं के लिए नीली जींस और नीली टी-शर्ट अथवा नीले रंग की ड्रेस को अपनाने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नीले रंग को उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित और अंबेडकरवादी राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के इस कदम को दलित और युवा वर्ग तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सपा की नई ड्रेस पॉलिटिक्स पर अब बीजेपी के तंज के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सवाल यही है कि क्या सपा का नया रंग चुनावी राजनीति में पार्टी के लिए कोई नया समीकरण तैयार करेगा या फिर बीजेपी का “बहरूपिये का खेल” वाला हमला इस मुद्दे को और बड़ा बना देगा?
फिलहाल, लाल टोपी और नीली ड्रेस की यह राजनीति उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का नया विषय बन गई है।