UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज? सरकार ने दिया बड़ा बयान, अफवाहों पर लगाया विराम !

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की अटकलों के बीच आधिकारिक बयान जारी किया है।

UPI या डिजिटल पेमेंट अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। 5-10 रुपये के लेकर हजारों-लाखों का लेनदेन आजकल बड़ा ही आसान हो गया है। अब न तो लोगों को अपने साथ कैश रखने की झंझट रही और न ही पैसा निकालने के लिए ATM की लाइन में लगने की टेंशन। बस जेब में से फोन निकाला, QR कोड स्कैन किया और कुछ ही सेकेंड के अंदर पेमेंट हो जाता है। ये ट्रांजेक्शन बिल्कुल फ्री होते हैं। यानी पैसों का लेन-देन करने के लिए हमें कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना पड़ता। लेकिन तब क्या हो जब इन्हीं पेमेंट पर चार्ज लगने लगे?

दरअसल, ऐसी खबरें बीते कई दिनों से सामने आ रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार 3000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या शुल्क लगाने की तैयारी में है। क्या वाकई ऐसा होने जा रहा है?

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि ₹3000 से अधिक के UPI लेनदेन पर शुल्क लगाया जा सकता है। इस खबर के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई थी कि डिजिटल पेमेंट महंगा हो सकता है।

हालांकि, वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि UPI ट्रांजैक्शन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि UPI को एक सस्ता और आम लोगों की पहुंच में रहने वाला प्लेटफॉर्म बनाए रखने की प्रतिबद्धता है। फिलहाल, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दोबारा लागू करने की कोई योजना नहीं है

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UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज? सरकार ने दिया बड़ा बयान, अफवाहों पर लगाया विराम !

UPI भारत में सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। मई 2025 में 18.68 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू ₹25.14 लाख करोड़ रही। सरकार का फोकस कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने और डिजिटल पेमेंट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर है।

इस स्पष्टीकरण के बाद, आम नागरिकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह से मुफ्त रहेगा, चाहे वह ₹10 का हो या ₹10,000 का

किए गए थे ये दावे

दरअसल रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया  यानी PCI ने बड़े व्यापारियों (जिनका टर्नओवर ज्यादा है) उन पर 0.3% MDR लगाया जाने का सुझाव दिया था। जिसके बाद ही यह दावा किया जाने लगा था कि सरकार 3000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर चार्ज लागू कर सकती है।

दावा ये भी था कि मुफ्त UPI पेमेंट से डिजिटल भुगतान में भारत दुनिया में नंबर वन बना गया है, लेकिन इसके साथ ही बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को घाटे से बचाने के लिए बड़े लेनदेन पर शुल्क लगाने की जरूरत है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं है।

यहां यह भी जानना जरूरी है कि जनवरी 2020 से UPI लेनदेन पर ‘जीरो MDR’ नीति लागू है, जिसका मतलब है कि व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। 

यूपीआई से कितने रुपयों का हो रहा है लेनदेन

एनपीसीआई के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 10 जून को यूपीआई से कुल 634.29 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जिसके जरिए कुल 91,838.53 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। जून महीने के शुरुआती 10 दिनों में कुल 6346.42 मिलियन यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए हैं, जिनके जरिए कुल 8,98,111.14 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। बताते चलें कि देश के आम लोगों के बीच ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के रूप में बड़े पैमाने पर यूपीआई का इस्तेमाल हो रहा है। यूपीआई ने प्रमुख बैंकिंग ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम आईएमपीएस को काफी पीछे छोड़ दिया है।

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