नेपाल में भारी हिंसा के बाद अब सुशीला कार्की के नाम को अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में प्रस्तावित किया गया है। अब संभावित प्रधानमंत्री के तौर पर चुने जाने पर सुशीला कार्की ने बयान दिया है।
नेपाल में बीते कई हफ्तों से चल रहे राजनीतिक और सामाजिक संकट के बीच आखिरकार हालात धीरे-धीरे संभलते दिखाई दे रहे हैं। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ जेन-जी युवाओं के व्यापक प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्ता को हिला कर रख दिया। भारी दबाव और हिंसा के बीच ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
इस्तीफे के बाद भी नेपाल के कई हिस्सों में हिंसा भड़की, जिसके चलते सेना को सुरक्षा की कमान संभालनी पड़ी और देशभर में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। अब इस राजनीतिक संकट का समाधान निकालने की दिशा में बड़ी खबर आई है। जेन-जी प्रतिनिधियों ने नेपाल के लिए एक अंतरिम सरकार बनाने का ऐलान किया है और इसके प्रधानमंत्री पद के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नाम पर सहमति जताई है।

सुशीला कार्की का पहला बयान
अंतरिम प्रधानमंत्री के संभावित उम्मीदवार के रूप में नाम आने के बाद सुशीला कार्की ने पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:
“यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे देश की इस कठिन घड़ी में एक जिम्मेदारी देने का विचार किया गया है। मैं किसी राजनीतिक स्वार्थ से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में काम करने के लिए आगे आ रही हूँ। जनता का विश्वास और लोकतंत्र की रक्षा मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान संकट से बाहर निकलने के लिए सभी राजनीतिक दलों और नागरिक समाज को साथ आना होगा। “नेपाल को स्थिरता और शांति की जरूरत है। इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा,” उन्होंने जोर देते हुए कहा।
जेन-जी आंदोलन की पृष्ठभूमि

नेपाल में मौजूदा राजनीतिक संकट की जड़ सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का आंदोलन है। नई पीढ़ी, जिसे आमतौर पर जेन-जी कहा जाता है, ने सरकार के इस कदम का जोरदार विरोध किया। युवाओं का आरोप था कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को खत्म कर लोकतंत्र का गला घोंट रही है। इसके अलावा, लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया।
इन्हीं प्रदर्शनों ने पूरे देश में आग की तरह फैलकर राजनीतिक अस्थिरता को जन्म दिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोग घायल हुए, जबकि कुछ की मौत भी हुई।
सेना की भूमिका और कर्फ्यू
ओली सरकार के इस्तीफे के बाद भी हिंसा थमी नहीं। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना ने पूरे देश में सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली। जगह-जगह सेना की तैनाती की गई और आपात स्थिति जैसी परिस्थितियों में देशभर में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। इस सख्ती के बाद अब धीरे-धीरे हालात शांत होते दिख रहे हैं।
क्यों चुनी गईं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। उन्हें एक सख्त, निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायविद के तौर पर जाना जाता है। न्यायपालिका में रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कई सख्त फैसले दिए थे। शायद यही वजह है कि जेन-जी प्रतिनिधियों और नागरिक समाज ने उन्हें अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त चेहरा माना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्की की गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि और उनकी ईमानदार छवि ही इस समय नेपाल को स्थिरता देने में मददगार साबित हो सकती है।
राजनीतिक हलकों की प्रतिक्रिया
कार्की के नाम का ऐलान होते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। जहां कुछ दलों ने उनके चयन का स्वागत किया है, वहीं कुछ पारंपरिक राजनीतिक नेता इसे युवाओं की “एकतरफा पहल” बता रहे हैं। हालांकि, जनता के बीच कार्की का नाम सकारात्मक रूप से लिया जा रहा है।
आगे की राह
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरिम सरकार का गठन कब और कैसे होगा। सुशीला कार्की को यदि आधिकारिक तौर पर अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया जाता है, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति बहाली, लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थिर करना और नए आम चुनाव की रूपरेखा तैयार करना होगी।
निष्कर्ष
नेपाल में हाल के दिनों में जो घटनाक्रम हुआ, उसने देश की राजनीति को गहरे संकट में डाल दिया। ओली सरकार के पतन और हिंसा की आग के बीच अब सुशीला कार्की की एंट्री उम्मीद की किरण के रूप में देखी जा रही है। उनका पहला बयान बताता है कि वे राष्ट्रहित और जनता के विश्वास को प्राथमिकता देने के लिए तैयार हैं। अब देखना होगा कि क्या उनका नेतृत्व नेपाल को इस संकट से बाहर निकालने में सफल हो पाता है।