केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स द्वारा नागपुर में आयोजित फोरेंसिक सिविल इंजीनियरिंग पर अखिल भारतीय संगोष्ठी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने वकीलों और आर्किटेक्टों पर जमकर तंज कसा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर अपनी साफगोई और बेबाक अंदाज से सबका ध्यान खींचा। नागपुर में आयोजित इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स द्वारा आयोजित “फोरेंसिक सिविल इंजीनियरिंग पर अखिल भारतीय संगोष्ठी” का उद्घाटन करते हुए गडकरी ने न सिर्फ इंजीनियरों, बल्कि वकीलों और आर्किटेक्टों को भी अपने निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि देश में कई क्षेत्रों में जब जिम्मेदारी और ईमानदारी की बात आती है, तो लोग अक्सर “चल जाता है” वाली मानसिकता अपना लेते हैं, जो विकास में सबसे बड़ी बाधा है।

“इंजीनियरिंग में विकास हुआ, पर जिम्मेदारी की कमी भी दिखी”
गडकरी ने अपने संबोधन में कहा, “एक बात जरूर है कि इंजीनियरिंग में लगातार काफी डेवलपमेंट हुआ है। विशेष रूप से सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़ी प्रगति हुई है, और आप सब उसके साक्षी हैं। लेकिन एक चीज जो इंजीनियरिंग में सिखाई नहीं जाती — वह है ईमानदारी और जिम्मेदारी की भावना। यही कहीं न कहीं कमी रह जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकारी कामों में अक्सर लापरवाही देखने को मिलती है। “कई बार सरकारी इंजीनियरों को लगता है कि ‘चल जाता है’। यह सोच गलत है। जब तक हम यह मानसिकता नहीं बदलेंगे, तब तक गुणवत्ता (क्वालिटी) और विश्वसनीयता (रिलायबिलिटी) पर सवाल उठते रहेंगे।”
“कानून और आर्किटेक्चर में भी सुधार की जरूरत”

नितिन गडकरी ने इस मौके पर सिर्फ इंजीनियरों को ही नहीं, बल्कि वकीलों और आर्किटेक्टों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “वकीलों की दुनिया में भी यही हाल है। केस लंबा चलता है, कोई टाइमलाइन नहीं होती। वहीं, आर्किटेक्ट्स भी कई बार ऐसे डिजाइन बना देते हैं जो देखने में तो सुंदर लगते हैं, लेकिन उपयोग के लिहाज से बेहद असुविधाजनक साबित होते हैं।”
गडकरी ने उदाहरण देते हुए कहा, “कई बार कोई पुल या बिल्डिंग देखकर लगता है कि डिजाइन बहुत अच्छा है, लेकिन जब उस पर चलो तो एहसास होता है कि यह व्यावहारिक नहीं है। यही अंतर है डिजाइनिंग और ग्राउंड रियलिटी में। हमें सौंदर्य से ज्यादा स्थायित्व और उपयोगिता पर ध्यान देना चाहिए।”
‘क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं’ — गडकरी
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि सड़क निर्माण, पुल निर्माण या किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि हमने देश में अब तक हजारों किलोमीटर सड़कों का निर्माण कराया है, लेकिन मैं चाहता हूं कि यह सिर्फ मात्रा नहीं, गुणवत्ता में भी सर्वश्रेष्ठ हो। हमारे इंजीनियरों को ‘चल जाएगा’ के बजाय ‘बेहतर होना चाहिए’ वाली सोच अपनानी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत अब तेजी से विकसित होता देश है और आने वाले वर्षों में हर क्षेत्र में तकनीकी उत्कृष्टता जरूरी है। “अगर हमारे इंजीनियर, आर्किटेक्ट और वकील अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी, प्रतिबद्धता और नवाचार को अपनाएं, तो भारत 2047 तक निश्चित रूप से विकसित राष्ट्र बन सकता है,” गडकरी ने कहा।
‘फोरेंसिक सिविल इंजीनियरिंग’ की अहमियत पर बल
गडकरी ने संगोष्ठी के मुख्य विषय — फोरेंसिक सिविल इंजीनियरिंग — पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि देश में निर्माण से जुड़ी कई दुर्घटनाएं केवल डिजाइन या निरीक्षण की लापरवाही के कारण होती हैं। “जब कोई पुल गिरता है या सड़क धंसती है, तब जांच में पता चलता है कि निर्माण के समय मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। फोरेंसिक इंजीनियरिंग इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जो हमें गलतियों को पहचानने और सुधारने का अवसर देती है।”
उन्होंने इंजीनियरों को सलाह दी कि वे नए शोध और तकनीक का इस्तेमाल करें। “अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मैपिंग जैसी तकनीकें आ चुकी हैं। इन्हें अपनाकर हम न केवल बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर बना सकते हैं, बल्कि सुरक्षा और टिकाऊपन भी सुनिश्चित कर सकते हैं,” गडकरी ने कहा।
‘नीतियों से ज्यादा ज़रूरत सोच बदलने की’
अपने संबोधन के अंत में गडकरी ने कहा कि भारत में कानून और नीतियों की कमी नहीं है, लेकिन अमल में कमी है। “हमारे पास हर क्षेत्र के लिए नियम हैं, लेकिन समस्या यह है कि लोग नियमों को लागू नहीं करते। हमें अपनी सोच बदलनी होगी — सरकार से लेकर इंजीनियर तक, हर किसी को अपने काम को मिशन मानना होगा।”
उन्होंने एक प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “देश के विकास के लिए सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि ईमानदार प्रयास भी चाहिए। अगर हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाए, तो भारत को दुनिया में नंबर वन बनने से कोई नहीं रोक सकता।”
निष्कर्ष:
नागपुर में दिए नितिन गडकरी के इस भाषण ने एक बार फिर साबित किया कि वे सिर्फ मंत्री नहीं, बल्कि सुधारक भी हैं। उन्होंने जिस सख्त लेकिन रचनात्मक अंदाज में इंजीनियरों, वकीलों और आर्किटेक्टों को आईना दिखाया, वह पेशेवर जिम्मेदारी की दिशा में एक सशक्त संदेश है। गडकरी का यह बयान याद दिलाता है कि विकास केवल परियोजनाओं से नहीं, बल्कि मानसिकता और निष्ठा के बदलाव से संभव है।
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