बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान छह नवंबर को है और उम्मीदवारों का नामांकन भी जारी है। दोनों गठबंधनों में सीटों को लेकर रार जारी है। इसमें महुआ सीट को लेकर उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान के बीच विवाद हो गया है। जानें क्यों खास है महुआ सीट?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए नामांकन प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। जिन उम्मीदवारों को टिकट मिल चुका है, वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वहीं, एनडीए गठबंधन में सीटों के तालमेल को लेकर सियासी भूचाल देखा जा रहा है। इसका केंद्र बिंदु बनी है राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा।

उपेंद्र कुशवाहा की नाराज़गी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर नाराज हैं। उनकी नाराज़गी की खबरें पटना से दिल्ली तक फैल गईं और इसके चलते पटना में राजनीतिक हलचल बढ़ गई। कहा जा रहा है कि कुशवाहा महुआ विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी को लेकर हठधर्मी हैं।
रात भर उन्हें मनाने के लिए कई भाजपा नेता पटना में मौजूद रहे, लेकिन वे किसी भी प्रकार की समझौता प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहे थे। इस वजह से एनडीए के नेताओं की नींद उड़ी हुई है, क्योंकि महुआ सीट पर कुशवाहा का हठधर्म गठबंधन के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।
महुआ सीट की सियासी अहमियत
महुआ सीट को बिहार की सियासी मानचित्र पर खास महत्व प्राप्त है। यह फ्लिप सीट मानी जाती है, जहां मतदाता का रुझान किसी भी दल के पक्ष में झुक सकता है। पिछले चुनावों में इस सीट पर चिराग पासवान और RLM की पकड़ रही है।
- महुआ सीट का आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) के लिए है।
- यहाँ पर मतदाता समुदाय में दलित वोट बैंक और यादव वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- एनडीए के लिए यह सीट रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में जीत से गठबंधन का मजबूत संदेश जाएगा।
चिराग पासवान और कुशवाहा के बीच टकराव

इस बार महुआ सीट पर चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा दोनों की नजर है। चिराग ने पहले ही घोषणा की है कि वह महुआ से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, कुशवाहा का कहना है कि इस सीट पर उनकी पार्टी का अधिक प्रभाव है और उन्हें मौका दिया जाना चाहिए।
विश्लेषकों का कहना है कि इस टकराव का कारण एनडीए के अंदर सीट बंटवारे का असंतोष और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है। कुशवाहा का हठधर्म और चिराग की दावेदारी दोनों ने गठबंधन के लिए चुनौती पैदा कर दी है।
भाजपा का मध्यस्थ प्रयास
कुशवाहा की नाराज़गी को देखते हुए भाजपा ने कई वरिष्ठ नेताओं को पटना भेजा। उनका उद्देश्य था कि RLM अध्यक्ष को मनाया जाए और सीट तालमेल पर समझौता किया जाए।
- भाजपा नेताओं ने कुशवाहा को आश्वस्त किया कि महुआ सीट पर उनका विचार रखा जाएगा।
- पटना में कई दौर की बैठकों के बावजूद कुशवाहा का रुख़ नहीं बदला।
- सूत्रों का कहना है कि कुशवाहा चाहते हैं कि महुआ सीट पर उनकी पूर्ण स्वीकृति हो।
एनडीए में सियासी हलचल का असर
महुआ सीट का मामला एनडीए के लिए सिर्फ एक सीट का विवाद नहीं है। यह गठबंधन की एकता और चुनावी रणनीति पर सवाल खड़ा करता है। अगर कुशवाहा नाराज़ रहेंगे और गठबंधन से अलग कदम उठाएंगे, तो यह एनडीए के लिए सीट हारने का खतरा पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महुआ सीट का फसाव गठबंधन के चुनावी गणित और मतदाता आधार पर असर डाल सकता है। एनडीए को इस चुनौती का सामना करते हुए सीट बंटवारे में सामंजस्य बनाना होगा।
आगे की संभावना
इस विवाद के हल होने की संभावना अगले कुछ दिनों में स्पष्ट हो सकती है। पार्टी और गठबंधन नेताओं की कोशिश होगी कि महुआ सीट पर किसी तरह का चुनावी तालमेल बन सके, ताकि एनडीए की जीत की संभावनाओं को नुकसान न पहुंचे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि महुआ सीट पर चल रहे गतिरोध को सुलझाने में गठबंधन की रणनीति, कुशवाहा की मांग और चिराग की दावेदारी तीनों का सामंजस्य बेहद अहम होगा।
निष्कर्ष
महुआ विधानसभा सीट इस बार बिहार चुनाव 2025 में सियासी संघर्ष का केंद्र बन गई है। उपेंद्र कुशवाहा की नाराज़गी, चिराग पासवान की दावेदारी और एनडीए के भीतर सीट तालमेल की जटिलताएँ इसे और महत्वपूर्ण बना रही हैं। अब यह देखना होगा कि गठबंधन इस चुनौती को कैसे पार करता है और महुआ सीट पर कौन बाज़ी मारता है।
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