बसपा का मिशन बिहार — 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, 90 नाम हुए घोषित !

बिहार चुनाव में बहुजन समाज पार्टी में किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। ऐसे में पार्टी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी की तरफ से दो लिस्ट में 90 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज़ होती जा रही है। प्रमुख दलों के साथ-साथ अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी मैदान में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है। बसपा प्रमुख मायावती ने बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इसके साथ ही पार्टी ने 90 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।

बसपा का मिशन बिहार — 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, 90 नाम हुए घोषित !
बसपा का मिशन बिहार — 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, 90 नाम हुए घोषित !

पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, दो चरणों में प्रत्याशियों की सूची जारी की गई है। पहली सूची में 42 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जबकि दूसरी सूची में 48 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। बसपा का यह ऐलान यह स्पष्ट करता है कि पार्टी इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी और अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी।

सभी सीटों पर अकेले लड़ने का ऐलान

बसपा का यह निर्णय बिहार की राजनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। मायावती लंबे समय से यह संकेत देती रही हैं कि पार्टी अब अन्य दलों के सहारे नहीं बल्कि अपने बूते संगठन को मजबूत करना चाहती है। इसीलिए बसपा ने 243 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
पार्टी का दावा है कि इस बार उसका फोकस दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने पर है। बसपा का कहना है कि इन वर्गों की अनदेखी वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन (NDA) और विपक्षी INDIA गठबंधन दोनों ने की है, इसलिए वह “समान प्रतिनिधित्व और न्याय की राजनीति” को चुनावी मुद्दा बनाएगी।

उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन

बसपा की दोनों सूचियों में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा गया है। पार्टी ने दावा किया है कि उसने प्रत्येक जिले में स्थानीय प्रभावशाली और सक्रिय कार्यकर्ताओं को टिकट दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सूची में लगभग 30 प्रतिशत उम्मीदवार दलित वर्ग से, 25 प्रतिशत पिछड़े वर्ग से, 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय से, और शेष सामान्य वर्ग से हैं। साथ ही महिलाओं को भी लगभग 15 प्रतिशत टिकट दिए गए हैं।
बसपा नेताओं का कहना है कि यह सूची बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति को एक नया आयाम देगी और नए विकल्प की तलाश कर रहे मतदाताओं को आकर्षित करेगी।

दूसरे दलों पर निशाना

पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “बसपा ने हमेशा गरीब, शोषित और पिछड़े वर्गों की आवाज़ उठाई है। आज बिहार में इन वर्गों को न तो एनडीए ने न्याय दिया है और न ही इंडिया गठबंधन ने। जनता अब तीसरा विकल्प चाहती है, और बसपा वही विकल्प बनकर उभर रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि बसपा का एजेंडा केवल चुनाव जीतना नहीं बल्कि बिहार में एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना है, जहां विकास और समान अवसर का लाभ सभी को मिले।

अन्य गठबंधनों की स्थिति

बसपा के इस ऐलान से पहले जनसुराज पार्टी और एनडीए गठबंधन (जिसमें भाजपा, जेडीयू, और एलजेपी शामिल हैं) अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर चुके हैं। वहीं, विपक्षी INDIA गठबंधन (राजद, कांग्रेस, वाम दल आदि) में अब तक सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा के इस कदम से INDIA गठबंधन पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मुस्लिम-दलित वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है।

मायावती की रणनीति और बसपा का उद्देश्य

बसपा सुप्रीमो मायावती पहले भी कह चुकी हैं कि उनकी पार्टी अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं से बाहर संगठन विस्तार पर जोर दे रही है। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बसपा लगातार संगठन मजबूत कर रही है।
मायावती की रणनीति साफ है — वह दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अपनी पारंपरिक पकड़ को पुनः स्थापित करना चाहती हैं। बसपा का मानना है कि बिहार में इन वर्गों की बड़ी आबादी होने के बावजूद उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व सीमित है। इसलिए पार्टी उन्हें एक मजबूत मंच देने की कोशिश में है।

बसपा उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट

नामनिर्वाचन क्षेत्र
मो. बदीउज्जमा उर्फ चाँद बाबू16-कल्याणपुर
प्रिया कुमारी राव65-बलरामपुर
प्रेम कुमार मंडल66-प्राणपुर
उपेन्द्र मंडल67-मनिहारी
द्वारिका मंडल68-बरारी
रविन्द्र यादव71-बिहारीगंज
सुभाष कुमार72-सिंगेश्वर (सु.)
राम सुधारी सदा78-कुशेश्वरस्थान
नागेश्वर दास84-हायाघाट
प्रयास प्रभाकर85-बहादुरपुर
इशरत परवीन88-गायघाट
राहुल कुमार पासवान91-बोचहा (सु.)
सुरेन्द्र कुमार राम103-भोरे (सु.)
सुनीता देवी105-सीवान
हीरालाल107-दरौल (सु.)
मधुसूदन सिंह109-दरौदा
रवि रंजन टिसू112-महाराजगंज
अविनाश कुमार119-गरखा (सु.)
रतनेश्वर राम131-कल्याणपुर (सु.)
अमीत कुमार बैठा139-रोसड़ा (सु.)
मोहम्मद शकील143-तेघड़ा
अनन्त कुमार पोद्दार145-साहेबपुर कमाल
भवेश कुमार155-कहलगांव
रेखा दास156-भागलपुर
रविश चन्द्र रवि कुशवाहा158-नाथनगर
रौशन कुमार सिंह159-अमरपुर
मुकेश कुमार राम195-अगिआँव (सु.)
धर्मेन्द्र कुमार198-शाहपुर
महावीर यादव199-ब्रम्हपुर
अभिमन्यु मौर्या200-बक्सर
लालजी राम202-राजपुर (सु.)
सतीश कुमार सिंह यादव203-रामगढ़
ओम प्रकाश नारायण204-मोहनियाँ (सु.)
श्वेता देवी207-चेनारी (सु.)
अशोक कुमार208-सासाराम
उदय प्रताप सिंह पटेल209-करगहर
मालती देवी210-दिनारा
धनजी कुमार पाल212-डेहरी
बन्दना राज213-काराकाट
संजय प्रसाद219-गोह
राघवेन्द्र नारायण यादव225-गुरूआ
कपिलदेव मंडल242-झाझा
सुशील कुमार43-सुपौल
भोला प्रसाद सिंह51-सिकटी
कर्णलाल गणेश53-ठाकुरगंज
लक्ष्मी कुमारी56-अमौर
रविन्द्र कुमार सिंह57-बायसी
सनोज कुमार चौहान58-कसवा
सुबोध पासवान59-बनमनखी (सु.)
जयनेन्द्र कुमार60-रूपौली
राजीव कुमार राय बब्ली62-पूर्णिया
विद्यानन्द मंडल64-कदवा
किरण देवी74-सोनवर्षा (सु.)
ललन कुमार73-मधेपुरा
अजब लाल मेहता75-सहरसा
सुनीता देवी76-सिमरी बख्तियारपुर
प्रियंका आनन्द77-महिषि
विजयेश कुमार93-कुढ़नी
विवेक कुमार पटेल उर्फ टाईगर95-कांटी
प्रदीप कुमार99-बैकुंठपुर
विजय कुमार97-पारू
विन्दा महतो98-साहेबगंज
मदन प्रसाद गोड106-जीरादेई
विजय कुमार यादव110-बड़हरिया
व्यास मांझी115-बनियापुर
ब्रज बिहारी सिंह116-तरैया
पूजा कुमारी120-अमनौर
मो. शमीम अंसारी121-परसा
निशा राय125-वैशाली
ओम प्रभा कुमारी129-महनार
बुलबुल कुमार सहनी134-उजियारपुर
नवीन कुमार वर्मा136-सरायरंजन
अमरेन्द्र कुमार यादव137-मोहिउद्दीननगर
अवधेश कुमार138-विभूतिपुर
विद्या नन्द यादव150-बेलदौर
रॉचिन स्मिथ151-परबत्ता
मो. मतिउर रहमान157-सुल्तानगंज
अरूण कुमार दास160-धौरैया (सु.)
कैलाश दास164-तारापुर
रणवीर सहनी165-मुंगेर
कपिलदेव दास166-जमालपुर
मुरारी कुमार170-बरबीघा
बलराम दास172-बिहार शरीफ
विपिन मिस्त्री174-इस्लामपुर
प्रियदर्शी अशोक176-नालन्दा
दीपक भाई पटेल180-बख्तियारपुर
प्रभाकर कुमार सिंह181-दीघा
डॉ. उमाकान्त पाठक183-कुम्हरार
रेणु रंजन215-कुर्था
शक्ति कुमार मिश्रा223-औरंगाबाद

चुनावी समीकरणों पर असर

बसपा के 243 सीटों पर उतरने के फैसले से बिहार में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति बन सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी भले ही सीधे सत्ता में न आए, लेकिन कई सीटों पर वह राजद और कांग्रेस जैसे दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। इससे विपक्षी गठबंधन को नुकसान हो सकता है, जबकि कुछ सीटों पर एनडीए को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।

निष्कर्ष

बसपा के इस बड़े ऐलान से बिहार विधानसभा चुनाव का समीकरण और जटिल हो गया है। जहां एनडीए और इंडिया गठबंधन अपने-अपने रणनीतिक साझेदारों को साधने में लगे हैं, वहीं बसपा ने यह दिखा दिया है कि वह अब “किंगमेकर” नहीं, बल्कि “किंग” बनने के इरादे से मैदान में है। आने वाले हफ्तों में बसपा के बाकी उम्मीदवारों की सूची भी जारी होने की संभावना है, जिसके बाद बिहार की सियासत में मुकाबला और दिलचस्प हो जाएगा।

Also Read :

सुप्रिया सुले ने राज ठाकरे की एमवीए में संभावित एंट्री पर तोड़ी चुप्पी !