गुटबाजी पर गिरी गाज, मायावती ने समसुद्दीन राइन को निकाला !

बहुजन समाज पार्टी के यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की तरफ से जारी लेटर में समसुद्दीन राइन पर गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए हैं। वह लखनऊ और कानपुर मंडल के प्रभारी थे।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर पार्टी अनुशासन पर सख्त रुख अपनाया है। मायावती ने लखनऊ और कानपुर मंडल के प्रभारी समसुद्दीन राइन को तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राइन पर लगातार गुटबाजी फैलाने और संगठन में अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। यही वजह रही कि मायावती ने बिना किसी देर किए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।

गुटबाजी पर गिरी गाज, मायावती ने समसुद्दीन राइन को निकाला !
गुटबाजी पर गिरी गाज, मायावती ने समसुद्दीन राइन को निकाला !

संगठन में बढ़ती गुटबाजी से नाराज थीं मायावती

संगठन में बढ़ती गुटबाजी से नाराज थीं मायावती
संगठन में बढ़ती गुटबाजी से नाराज थीं मायावती

बसपा के अंदर पिछले कुछ समय से संगठनात्मक स्तर पर गुटबाजी की खबरें सामने आ रही थीं। विशेषकर लखनऊ और कानपुर मंडल में कई कार्यकर्ताओं ने पार्टी हाईकमान से शिकायत की थी कि समसुद्दीन राइन अपनी टीम में केवल अपने समर्थकों को तरजीह दे रहे हैं और दूसरी विचारधारा वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे संगठन में असंतोष बढ़ गया था, जिसकी रिपोर्ट खुद जिला इकाइयों ने मायावती तक पहुंचाई थी।

मायावती ने इस मामले की पूरी जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई का फैसला किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बसपा सुप्रीमो ने साफ कहा कि “पार्टी में अनुशासन सबसे ऊपर है, और जो भी गुटबाजी करेगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

चुनावी तैयारी के बीच बड़ा कदम

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बसपा आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई है। मायावती लगातार संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह या असंतोष पार्टी की रणनीति को कमजोर कर सकता था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राइन को हटाने का निर्णय मायावती का स्पष्ट संदेश है कि बसपा में अनुशासन और एकजुटता सर्वोपरि है।

पार्टी में जारी है सख्ती की नीति

मायावती पिछले कुछ महीनों से लगातार संगठनात्मक पुनर्गठन में जुटी हैं। उन्होंने कई जिलों में नए प्रभारियों की नियुक्ति की है और निष्क्रिय नेताओं को हटा दिया है। सूत्रों का कहना है कि बसपा प्रमुख ने यह निर्देश भी दिए हैं कि हर क्षेत्र में केवल वही पदाधिकारी बनेगा जो जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहेगा। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि “बहनजी अब किसी भी तरह की गुटबाजी या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को सहन करने के मूड में नहीं हैं। उनका ध्यान 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर है।”

राइन के निष्कासन पर समर्थकों में हलचल

समसुद्दीन राइन को पार्टी से निकालने के फैसले के बाद उनके समर्थकों में हलचल मच गई है। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने निर्णय पर असहमति जताई है, जबकि कई पुराने नेताओं ने मायावती के कदम को सही ठहराया है। एक वरिष्ठ बसपा नेता ने कहा, “यह फैसला देर से ही सही, लेकिन जरूरी था। पार्टी अनुशासन सबसे पहले आता है। कोई भी नेता संगठन से बड़ा नहीं हो सकता।”

बसपा की रणनीति पर प्रभाव

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मायावती का यह कदम बसपा में संगठनात्मक नियंत्रण को और मजबूत करेगा। लखनऊ और कानपुर मंडल बसपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र माने जाते हैं। इन मंडलों में पार्टी का परंपरागत वोट बैंक है, जिसे संभालकर रखना मायावती के लिए जरूरी है। राइन के निष्कासन के बाद अब नया प्रभारी नियुक्त किया जाएगा जो संगठन में नई ऊर्जा और एकजुटता लाने का प्रयास करेगा।

मायावती का स्पष्ट संदेश

मायावती ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि बसपा में कोई भी नेता या पदाधिकारी पार्टी लाइन से ऊपर नहीं है। अनुशासन, एकजुटता और संगठन के प्रति निष्ठा ही पार्टी के मूल मूल्य हैं। राइन के निष्कासन ने यह संदेश और मजबूत कर दिया है कि जो भी इन सीमाओं को लांघेगा, उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।

इस फैसले से बसपा के भीतर यह धारणा भी बनी है कि मायावती आने वाले दिनों में संगठन के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की कार्रवाई कर सकती हैं। पार्टी में अब अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और हर स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन चल रहा है।

संक्षेप में, मायावती का यह कदम सिर्फ एक नेता पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे संगठन के लिए एक संदेश है — “बसपा में अब केवल वही टिकेगा जो पार्टी और आंदोलन के हित में काम करेगा, न कि व्यक्तिगत गुट या स्वार्थ के लिए।”

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