बिहार में महागठबंधन के घटक दल के नेता अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्य के लोगों के लिए बड़ा ऐलान करने वाले हैं। महागठबंधन के चुनावी घोषणा पत्र में सभी वर्गों का खास खयाल रखा गया है।
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच महागठबंधन ने अपने चुनावी घोषणा पत्र की तारीख का ऐलान कर दिया है। महागठबंधन की ओर से यह घोषणा पत्र 28 अक्टूबर (मंगलवार) को जारी किया जाएगा। इस दौरान राजद नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरा तेजस्वी प्रसाद यादव के साथ कांग्रेस, वाम दलों और अन्य घटक दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। यह घोषणा पत्र महागठबंधन की चुनावी दिशा और जनता के प्रति उसके वादों की झलक पेश करेगा।

तेजस्वी करेंगे घोषणा, घटक दलों के नेता रहेंगे साथ

राजधानी पटना में एक भव्य कार्यक्रम के तहत इस घोषणा पत्र को जनता के सामने रखा जाएगा। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में राजद, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (माले) के शीर्ष नेता मंच साझा करेंगे। महागठबंधन इसे “जनता का घोषणा पत्र” बताकर पेश करेगा, जिसे राज्यभर से आए सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
तेजस्वी यादव इस मौके पर बिहार की जनता से संवाद करते हुए कहेंगे कि यह घोषणा पत्र केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि “बदलाव का रोडमैप” है। वे बताएंगे कि अगर जनता ने उन्हें सत्ता सौंपी तो राज्य में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों के कल्याण पर केंद्रित एक नई नीतिगत दिशा अपनाई जाएगी।
“हर परिवार से एक सरकारी नौकरी” — बनेगा मुख्य वादा
महागठबंधन के घोषणा पत्र की सबसे बड़ी घोषणा “हर परिवार से एक को सरकारी नौकरी” देने की योजना होगी। इस वादे को मुख्य एजेंडा के रूप में रखा गया है। तेजस्वी यादव कई बार अपने भाषणों में यह कह चुके हैं कि बिहार में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है और इसे खत्म करना उनकी प्राथमिकता होगी।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के तहत सरकार बनने पर राज्य में रोजगार सृजन के लिए अलग से “बिहार रोजगार आयोग” बनाया जाएगा। इसमें शिक्षित युवाओं को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां देने का तंत्र विकसित किया जाएगा। साथ ही, संविदा कर्मियों को स्थायी करने और खाली पदों पर त्वरित नियुक्ति की व्यवस्था भी वादे में शामिल होगी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि पर रहेगा जोर
घोषणा पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर कई वादे शामिल किए जा रहे हैं। महागठबंधन निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर रोक, सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और शिक्षकों की नियमित भर्ती का वादा करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनिवार्य नियुक्ति और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 24 घंटे चालू रखने की योजना होगी। इसके अलावा, हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में रोडमैप पेश किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र के लिए महागठबंधन “किसान सम्मान मिशन” योजना लाने का वादा करेगा। इसके तहत फसल की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, सिंचाई व्यवस्था में सुधार और ग्रामीण क्रेडिट सिस्टम को आसान बनाने जैसे बिंदु शामिल होंगे।
महिलाओं और युवाओं को मिलेगी विशेष प्राथमिकता
घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए भी कई कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा शामिल की गई है। इनमें महिला सुरक्षा बल का गठन, कार्यस्थलों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वरोजगार के लिए ब्याजमुक्त ऋण देने की योजना प्रमुख होगी।
युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और स्टार्टअप प्रमोशन फंड जैसी पहलें भी शामिल होंगी। यह फंड राज्य के युवाओं को छोटे उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों और आईटी सेक्टर में अवसर प्रदान करेगा।
केंद्र सरकार पर निशाना साधने की तैयारी
तेजस्वी यादव और महागठबंधन के अन्य नेता इस मौके पर केंद्र सरकार और एनडीए पर भी तीखा हमला बोलने की तैयारी में हैं। वे यह सवाल उठाएंगे कि बिहार को “विशेष राज्य का दर्जा” देने का वादा अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ और क्यों राज्य में औद्योगिक निवेश नहीं बढ़ पाया।
कांग्रेस और वाम दलों के नेता इस बात पर जोर देंगे कि भाजपा-जदयू सरकार ने जनता से किए वादे पूरे नहीं किए और अब बदलाव का वक्त आ गया है।
जनता से जुड़ाव की कोशिश
महागठबंधन ने इस घोषणा पत्र को जनता की आकांक्षाओं से जोड़ने के लिए “आपका सुझाव, हमारी नीति” अभियान चलाया था। इसके तहत राज्य के विभिन्न जिलों से 50,000 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर यह घोषणा पत्र तैयार किया गया है।
निष्कर्ष
28 अक्टूबर को जब तेजस्वी यादव पटना में इस घोषणा पत्र का ऐलान करेंगे, तो बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ने की पूरी संभावना है। महागठबंधन के इस “जनता के घोषणा पत्र” में नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों को केंद्र में रखकर एनडीए सरकार को कड़ी चुनौती दी जाएगी। अब देखना होगा कि यह वादों से भरा संकल्प पत्र जनता के दिलों में कितना असर छोड़ पाता है और चुनावी रण में क्या यह महागठबंधन को बढ़त दिला पाता है।
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