दिल्ली की ठंड में घुला ज़हर, AQI ‘बहुत खराब’ स्तर पर — कल हो सकती है कृत्रिम बारिश !

दिल्ली में एक ओर महापर्व छठ की जोर-शोर से तैयारी चल रही है, तो वहीं यहां की हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 27 या 28 अक्टूबर को कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी है।

दिल्ली में ठंड का आगाज़ होते ही वायु गुणवत्ता एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँच गई है। गुलाबी सर्दी के बीच राजधानी की हवा में ज़हर घुल चुका है। रविवार को दिल्ली का औसत AQI (Air Quality Index) 325 के पार पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण दृश्यता घटी है, लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी हो रही है। इस बीच, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) कराने की तैयारी शुरू कर दी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो सोमवार को राजधानी में कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है।

दिल्ली की ठंड में घुला ज़हर, AQI ‘बहुत खराब’ स्तर पर — कल हो सकती है कृत्रिम बारिश !
दिल्ली की ठंड में घुला ज़हर, AQI ‘बहुत खराब’ स्तर पर — कल हो सकती है कृत्रिम बारिश !

सर्दी के साथ बढ़ा प्रदूषण का स्तर

दिल्ली की सर्द हवाएं भले ही ठंडक का अहसास करा रही हों, लेकिन इन्हीं हवाओं में अब धुएं और धूल का मिश्रण बढ़ गया है। रविवार को आनंद विहार में AQI 360, पंजाबी बाग में 342, आईटीओ में 338 और द्वारका में 329 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्तर फेफड़ों के लिए बेहद हानिकारक है।

सर्दी के साथ बढ़ा प्रदूषण का स्तर
सर्दी के साथ बढ़ा प्रदूषण का स्तर

मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि रात में तापमान गिरने और हवा की गति कम होने के कारण प्रदूषक तत्व जमीन के करीब जमा हो रहे हैं, जिससे हवा साफ नहीं हो पा रही है। इसी कारण सुबह और शाम के समय घना धुआं और धुंध का मिश्रण (smog) दिखाई दे रहा है।

ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) हुआ लागू

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने के लिए लागू GRAP-III (Graded Response Action Plan Stage-III) के तहत कई सख्त कदम उठाए गए हैं। दिल्ली सरकार ने निर्माण कार्यों पर आंशिक रोक लगा दी है और डीजल जेनरेटर के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
साथ ही, पानी के छिड़काव, सड़क की नियमित सफाई और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा,

“सरकार लोगों की सेहत को लेकर बेहद गंभीर है। प्रदूषण का स्तर चिंताजनक है, इसलिए हमने IIT कानपुर की विशेषज्ञ टीम से कृत्रिम बारिश की संभावनाओं पर चर्चा की है। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो कल यानी सोमवार को पहली बार इस सीज़न में कृत्रिम बारिश कराई जाएगी।”

कृत्रिम बारिश की तैयारी

दिल्ली में कृत्रिम बारिश का विचार नया नहीं है। लेकिन इस बार प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है। IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने बताया है कि इसके लिए क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक में सिल्वर आयोडाइड और नमक के मिश्रण को बादलों में छोड़ा जाता है, जिससे कृत्रिम वर्षा होती है।

मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले 24 घंटे में दिल्ली-एनसीआर के आसमान में बादल छा सकते हैं, जो कृत्रिम बारिश के लिए अनुकूल परिस्थिति बन सकती है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो यह दिल्ली की हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों को काफी हद तक कम कर सकता है

प्रदूषण के स्रोत: पराली, वाहन और निर्माण कार्य

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की हवा खराब होने की सबसे बड़ी वजह आसपास के राज्यों में जलती पराली (stubble burning) है। पंजाब और हरियाणा से उठने वाला धुआं हवा के साथ दिल्ली तक पहुंचता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली की हवा में इस समय लगभग 40% प्रदूषण का कारण पराली जलना है, जबकि शेष 60% में वाहनों, निर्माण कार्यों और धूल का योगदान है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की विशेषज्ञ सुनीता नारायण के अनुसार,

“सर्दी के मौसम में हवा ठंडी और भारी हो जाती है, जिससे प्रदूषक ऊपर नहीं जा पाते। यही वजह है कि नवंबर-दिसंबर में हर साल दिल्ली गैस चेंबर जैसी स्थिति में पहुंच जाती है।”

लोगों को दी गई सलाह

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सुबह और शाम के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के रोगियों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है।
सरकार ने स्कूलों में बच्चों के आउटडोर एक्टिविटी पर अस्थायी रोक लगाने का भी सुझाव दिया है। साथ ही, लोगों से मास्क पहनने, घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की गई है।

निष्कर्ष

दिल्ली की सर्दी भले ही खूबसूरत मानी जाती हो, लेकिन इस बार उसमें प्रदूषण का ज़हर घुल गया है। हर साल की तरह इस बार भी अक्टूबर-नवंबर में राजधानी की हवा ‘बहुत खराब’ स्तर पर पहुंच चुकी है। अब सारी उम्मीदें सोमवार को होने वाली कृत्रिम बारिश पर टिकी हैं। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो दिल्ली की हवा को अस्थायी ही सही, कुछ राहत जरूर मिल सकती है।

सरकार और वैज्ञानिकों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान तभी संभव है जब लोग स्वयं भी जिम्मेदारी निभाएं — वाहन कम चलाएं, कचरा न जलाएं और प्रदूषण नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाएं। तभी दिल्ली की यह “गुलाबी ठंड” फिर से साफ और सुकूनभरी बन पाएगी।

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