बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने लालू प्रसाद यादव के जंगल राज का मुद्दा बनाया है तो आरजेडी ने वक्फ बिल को लेकर मुस्लिम वोट को साधने में लगी हुई है। ऐसे में दोनों ओर से बयानबाजी हो रही है।
बिहार विधानसभा चुनाव के बीच अब सियासत का पारा और चढ़ गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन ‘महागठबंधन’ ने ऐलान किया है कि वह कल यानी मंगलवार को अपना चुनावी घोषणापत्र (Manifesto) जारी करेगा। इस घोषणापत्र में रोजगार, शिक्षा, कृषि और युवाओं से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएँ शामिल होने की संभावना है। लेकिन इससे पहले ही महागठबंधन के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव के ‘वक्फ बिल’ से जुड़े बयान ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है।

महागठबंधन का घोषणापत्र कल होगा जारी
महागठबंधन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, पटना में मंगलवार सुबह एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणापत्र जारी किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियों (CPI, CPI(M), CPI(ML)) और अन्य सहयोगी दलों के शीर्ष नेता शामिल होंगे।
सूत्रों का कहना है कि घोषणापत्र का मुख्य फोकस युवाओं को रोजगार, किसानों को आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और शिक्षा प्रणाली में सुधार पर रहेगा।
महागठबंधन के सूत्रों ने बताया कि इस बार घोषणापत्र में “न्याय के साथ विकास” की थीम रखी जाएगी, जो तेजस्वी यादव के 2020 चुनावी नारे “10 लाख नौकरियां” की तर्ज पर आगे बढ़ाई जाएगी।
घोषणापत्र तैयार करने में अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों की एक टीम भी शामिल रही है, जिसने राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर योजनाओं के मसौदे तैयार किए हैं।
तेजस्वी यादव के बयान से मचा राजनीतिक हंगामा

घोषणापत्र से ठीक पहले, तेजस्वी यादव के एक बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। दरअसल, उन्होंने रविवार को एक रैली में कहा था कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो वह केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘वक्फ (संशोधन) बिल’ की समीक्षा करेंगे और बिहार में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेंगे।
तेजस्वी ने कहा था,
“वक्फ बोर्ड से जुड़ा नया बिल लोगों के अधिकारों में दखल देने वाला है। हम इसे लागू नहीं करेंगे, बल्कि न्यायसंगत और संविधानसम्मत सुधार करेंगे।”
तेजस्वी के इस बयान के बाद एनडीए ने इसे “ध्रुवीकरण की राजनीति” करार दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तेजस्वी यादव का यह बयान “संविधान और केंद्र सरकार के खिलाफ” है और यह दिखाता है कि महागठबंधन चुनाव को साम्प्रदायिक दिशा में ले जाना चाहता है।
एनडीए का पलटवार
भाजपा और जदयू के नेताओं ने तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा,
“तेजस्वी यादव विकास की बात नहीं कर रहे, बल्कि एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं। वक्फ बिल देशभर में लागू है, इसे चुनौती देना संविधान के खिलाफ है।”
जदयू नेता ने भी कहा कि महागठबंधन के पास जनता को देने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे भावनात्मक मुद्दों को हवा दे रहे हैं।
वहीं, आरजेडी प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा मुद्दों से भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने केवल इतना कहा है कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसकी संवैधानिक समीक्षा की जानी चाहिए, इसमें गलत क्या है?
घोषणापत्र में क्या हो सकता है शामिल
महागठबंधन के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, घोषणापत्र में निम्नलिखित प्रमुख वादे शामिल हो सकते हैं:
- राज्य में 20 लाख रोजगार के नए अवसर सृजित करने की योजना।
- किसानों के लिए कर्ज माफी योजना और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी।
- सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति और शिक्षा बजट में बढ़ोतरी।
- स्वास्थ्य ढांचे को मज़बूत करने के लिए हर जिला मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज।
- महिलाओं के लिए विशेष रोजगार और सुरक्षा योजना, जिसमें मुफ्त परिवहन और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय शामिल होंगे।
इसके अलावा, बिजली और पानी के क्षेत्र में सुधार, युवाओं के लिए स्टार्टअप नीति और पुराने पेंशन सिस्टम को बहाल करने जैसी बातें भी शामिल की जा सकती हैं।
राजनीतिक माहौल गरमाया
महागठबंधन के घोषणापत्र से पहले ही बिहार का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। तेजस्वी यादव की सभाओं में बड़ी भीड़ उमड़ रही है, वहीं एनडीए भी लगातार पलटवार कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव का वक्फ बिल पर दिया गया बयान एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, ताकि अल्पसंख्यक मतदाताओं का झुकाव महागठबंधन की ओर बना रहे।
निष्कर्ष
महागठबंधन के घोषणापत्र का इंतज़ार अब बिहार की जनता को है। यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव और उनके सहयोगी दल जनता को कितनी नई उम्मीदें देते हैं और क्या वे अपने वादों से पिछले चुनावों की तरह कोई बड़ा प्रभाव छोड़ पाएंगे।
वहीं, वक्फ बिल पर चल रही राजनीतिक बहस ने इस बार के चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
अब नज़रें कल के उस पल पर टिकी हैं, जब पटना में महागठबंधन अपने वादों का “रोडमैप” पेश करेगा — और शायद बिहार की राजनीति को एक नया मोड़ भी देगा।
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