बिहार में सीएम नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं की आज चुनावी जनसभाएं हैं। वहीं, महागठंधन आज अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अब पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। एक ओर जहां सत्तारूढ़ एनडीए विकास और स्थिरता के नाम पर वोट मांग रही है, वहीं विपक्षी महागठबंधन आज अपना साझा घोषणा पत्र जारी करने जा रहा है। इस घोषणापत्र को “तेजस्वी प्रण पत्र” नाम दिया गया है, जो तेजस्वी यादव की नेतृत्व वाली आरजेडी के विजन और वादों को जनता के सामने पेश करेगा। माना जा रहा है कि इस घोषणापत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

आज होगा ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ का विमोचन

महागठबंधन की ओर से यह घोषणापत्र आज पटना स्थित आरजेडी के राज्य मुख्यालय में जारी किया जाएगा। इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह, और वामदलों के प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। इस साझा मंच से महागठबंधन जनता के सामने आने वाले पांच वर्षों के लिए अपनी प्राथमिकताएं और नीतियां रखेगा।
सूत्रों के अनुसार, ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ में हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, महिलाओं को मासिक भत्ता देने और युवाओं के लिए रोजगार सृजन जैसे बड़े वादे शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा, किसानों की आय बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी घोषणाएं संभव हैं।
तेजस्वी यादव बोले – जनता बदलाव के मूड में है
घोषणापत्र जारी होने से पहले तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि “बिहार की जनता बदलाव के मूड में है। पंद्रह साल के शासन में लोगों को सिर्फ बेरोजगारी, पलायन और महंगाई मिली है। अब जनता रोज़गार, शिक्षा और सम्मान की राजनीति चाहती है।”
तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन का यह प्रण पत्र सिर्फ वादों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि जनता से किया गया ईमानदार वादा है। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर जनता ने उन्हें मौका दिया, तो बिहार को एक नया दिशा और दशा मिलेगी।
रोज़गार और महिला सशक्तिकरण पर ज़ोर
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि इस घोषणापत्र में बिहार के युवाओं को विशेष स्थान दिया गया है। राज्य में बेरोजगारी की समस्या को देखते हुए रोजगार सृजन सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने, नए उद्योग स्थापित करने और कृषि आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ठोस योजना तैयार की गई है।
महिलाओं के लिए भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं संभव हैं। इनमें 18 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को मासिक भत्ता, स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन, और महिला सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स के गठन जैसी घोषणाएं शामिल हो सकती हैं।
नीतीश और तेजस्वी की रैलियों से बढ़ा सियासी तापमान
इसी बीच मंगलवार को बिहार में सियासी हलचल अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दोनों की आज कई रैलियां निर्धारित हैं। नीतीश कुमार एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में राज्य के पश्चिमी जिलों में जनसभाएं करेंगे, जबकि तेजस्वी यादव उत्तर बिहार के इलाकों में महागठबंधन उम्मीदवारों के समर्थन में रैलियां करेंगे।
दोनों नेताओं की जनसभाएं इस बात का संकेत हैं कि चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। जनता का रुख तय करेगा कि बिहार में “सुशासन” की सरकार जारी रहेगी या “बदलाव” की नई लहर उठेगी।
ओवैसी भी मैदान में उतरे
आज का दिन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के लिए भी खास है। ओवैसी खुद बिहार के चुनावी मैदान में उतर रहे हैं और आज तीन जनसभाओं को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि उनकी रैलियां सीमांचल क्षेत्र में होंगी, जहां पार्टी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ओवैसी ने हाल ही में कहा था कि “बिहार की जनता अब दिल्ली और पटना के बीच की राजनीति से आज़ाद होकर अपनी नई राह चुनेगी।”
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
महागठबंधन के घोषणापत्र जारी करने, नीतीश-तेजस्वी की रैलियों और ओवैसी के प्रवेश के साथ बिहार का राजनीतिक माहौल अब पूरी तरह चुनावी रंग में है। हर पार्टी जनता को अपने वादों और योजनाओं से लुभाने की कोशिश में लगी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ महागठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह न केवल घोषणाओं का संग्रह है, बल्कि विपक्ष की दिशा और दृष्टिकोण का भी प्रतीक होगा।
अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि महागठबंधन अपने वादों से जनता का दिल जीत पाता है या नहीं — क्योंकि बिहार की सियासत में अब हर दिन एक नई कहानी लिखी जा रही है।