बिहार चुनाव में सपा की एंट्री, अखिलेश-डिंपल मांगेंगे वोट महागठबंधन के लिए !

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले चरण के चुनाव प्रचार के लिए 1 नवम्बर को बिहार पहुंच रहे हैं. इस दौरान वो बिहार के पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जिलों में चुनाव प्रचार करेंगे.

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। अब मुकाबला सीधा एनडीए बनाम इंडिया गठबंधन के बीच दिलचस्प मोड़ लेता दिख रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारक मैदान में उतर चुके हैं, वहीं अब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी बिहार चुनाव प्रचार में उतरने की तैयारी में हैं।

बिहार चुनाव में सपा की एंट्री, अखिलेश-डिंपल मांगेंगे वोट महागठबंधन के लिए !
बिहार चुनाव में सपा की एंट्री, अखिलेश-डिंपल मांगेंगे वोट महागठबंधन के लिए !

अखिलेश यादव का बिहार दौरा 1 नवंबर से

अखिलेश यादव का बिहार दौरा 1 नवंबर से
अखिलेश यादव का बिहार दौरा 1 नवंबर से

सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव 1 नवंबर को बिहार पहुंचेंगे, जहां वे पहले चरण के चुनाव प्रचार में हिस्सा लेंगे। सपा प्रमुख का यह दौरा महागठबंधन के लिए राजनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, अखिलेश यादव पूर्णिया, मधुबनी और दरभंगा जिलों में रैलियां करेंगे और महागठबंधन के प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करेंगे।

अखिलेश का फोकस सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों पर रहेगा, जहां महागठबंधन और एनडीए के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। सपा इन इलाकों में महागठबंधन की स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, ताकि मुस्लिम और यादव वोटरों का समेकन हो सके।

सपा का महागठबंधन को समर्थन

सपा का महागठबंधन को समर्थन
सपा का महागठबंधन को समर्थन

हालांकि समाजवादी पार्टी का बिहार में कोई बड़ा संगठनात्मक ढांचा नहीं है, लेकिन अखिलेश यादव की लोकप्रियता और उनका राष्ट्रीय चेहरा महागठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। सपा ने इस चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को समर्थन देने का फैसला किया है।

अखिलेश यादव ने पहले ही साफ किया था कि “बिहार में परिवर्तन की लहर चल रही है और जनता अब रोजगार, शिक्षा और विकास के मुद्दों पर वोट देगी।” उन्होंने कहा कि “हम सब मिलकर बिहार को नई दिशा देने का संकल्प लेकर मैदान में उतरे हैं।”

योगी आदित्यनाथ की एंट्री से बढ़ा एनडीए का उत्साह

वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी ने अपने सबसे प्रभावशाली प्रचारक योगी आदित्यनाथ को चुनाव मैदान में उतार दिया है। योगी ने बिहार में अपनी कई रैलियों के जरिए एनडीए के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। वह अपने भाषणों में हिंदुत्व, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।

योगी ने हाल ही में एक सभा में कहा था, “बिहार में डबल इंजन सरकार ने विकास की नई कहानी लिखी है, और विपक्ष सिर्फ जातिवाद और भ्रष्टाचार की राजनीति करता है।” बीजेपी को उम्मीद है कि योगी की लोकप्रियता खासकर युवाओं और हिंदू वोटरों के बीच पार्टी के पक्ष में लहर पैदा करेगी।

बिहार की जंग बनी राष्ट्रीय नेताओं की परीक्षा

बिहार का यह चुनाव अब सिर्फ स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का मंच बन गया है। बीजेपी और एनडीए की ओर से जहां अमित शाह, राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार जैसे बड़े चेहरे प्रचार में हैं, वहीं इंडिया गठबंधन की तरफ से राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी जैसी हस्तियां मैदान में उतर रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में इस बार का चुनाव मोदी बनाम इंडिया गठबंधन के चेहरे के बीच सीधा टकराव बनता जा रहा है। बीजेपी अपने विकास मॉडल और कानून-व्यवस्था की उपलब्धियों को गिनाकर वोट मांग रही है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहा है।

अखिलेश की रैलियों पर महागठबंधन की निगाहें

महागठबंधन को उम्मीद है कि अखिलेश यादव के आगमन से विशेषकर युवा मतदाताओं और पिछड़ा वर्ग के बीच गठबंधन के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनेगा। आरजेडी और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सपा अध्यक्ष की मौजूदगी महागठबंधन के प्रचार अभियान में नई ऊर्जा भरेगी।

सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव की पत्नी और पूर्व सांसद डिंपल यादव भी आगे चलकर बिहार में कुछ रैलियों को संबोधित कर सकती हैं। इससे महिला वोटरों को आकर्षित करने की रणनीति बनाई जा रही है।

बिहार में दिलचस्प मुकाबला

अब जबकि एक ओर एनडीए का प्रचार अभियान प्रधानमंत्री मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे चेहरों पर केंद्रित है, वहीं इंडिया गठबंधन ने तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे युवाओं को आगे रखकर “बदलाव बनाम स्थिरता” का नैरेटिव बनाया है।

1 नवंबर से अखिलेश यादव के प्रचार अभियान के शुरू होते ही बिहार का चुनावी संग्राम और भी गरमाने वाला है।
राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि अखिलेश की रैलियां जहां महागठबंधन को नई मजबूती देंगी, वहीं यह एनडीए के लिए प्रचार युद्ध को और चुनौतीपूर्ण बना देंगी।

अब देखना यह होगा कि क्या सपा प्रमुख की बिहार में एंट्री महागठबंधन के पक्ष में हवा का रुख बदल पाएगी या फिर एनडीए अपने संगठन और नेतृत्व के दम पर बढ़त बनाए रखेगा।

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