किसानों के विशाल मार्च के नागपुर पहुंचने की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नागपुर स्थित सरकारी निवास ‘रामगिरी’ की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों के आंदोलन ने एक बार फिर से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। प्रहार संस्था के संस्थापक और महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का विशाल “यलगार मार्च” नागपुर की ओर बढ़ रहा है। इस मार्च के शहर में पहुंचने की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नागपुर स्थित सरकारी निवास ‘रामगिरी’ की सुरक्षा को अचानक कड़ा कर दिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, पुलिस अलर्ट पर
सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही जानकारी मिली कि बच्चू कडू के नेतृत्व में किसान संगठन नागपुर की ओर कूच कर रहे हैं, प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आपात बैठक बुलाई। इसके बाद नागपुर पुलिस ने ‘रामगिरी’ निवास के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी और सभी प्रवेश बिंदुओं पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।

रामगिरी के आसपास किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। आने-जाने वालों की सख्त जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और अधिकारी तैनात

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर न केवल रामगिरी बल्कि नागपुर शहर के कई अहम स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और बम निरोधक दस्ते को भी अलर्ट पर रखा गया है। बताया जा रहा है कि शहर में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस को धारा 144 लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नागपुर के पुलिस आयुक्त ने कहा है कि “किसानों को अपने मुद्दे उठाने का अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था में किसी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।”
बच्चू कडू का ‘यलगार मार्च’ — किसानों की आवाज

प्रहार संस्था के संस्थापक और विधायक बच्चू कडू लंबे समय से किसानों के हितों को लेकर मुखर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को अनदेखा कर रही है — खासकर फसल बीमा, बिजली बिल, और कर्जमाफी जैसे मुद्दों पर। इसी के विरोध में उन्होंने राज्यभर के किसानों से नागपुर कूच करने का आह्वान किया है।

बच्चू कडू ने कहा था, “हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन सरकार को किसानों की आवाज सुननी ही पड़ेगी। जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, हमारा ‘यलगार मार्च’ जारी रहेगा।”
किसानों का यह मार्च धीरे-धीरे विदर्भ क्षेत्र के अलग-अलग जिलों से होता हुआ नागपुर की ओर बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि हजारों किसान अपने ट्रैक्टरों, बैलगाड़ियों और वाहनों के साथ इस यात्रा में शामिल हैं।
प्रशासन की सख्ती के संकेत
राज्य सरकार और प्रशासन इस आंदोलन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। नागपुर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह जिला होने के कारण, यह प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है। इसी कारण रामगिरी परिसर के चारों ओर पुलिस ने तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था बनाई है।
स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शहर के बाहर निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। अगर वे निर्धारित दायरे से बाहर निकलते हैं तो पुलिस कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।
जनता में उत्सुकता और चिंता दोनों
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय नागरिकों में उत्सुकता और हल्की चिंता दोनों देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि किसानों की समस्याएं वाजिब हैं, लेकिन प्रदर्शन का तरीका शांतिपूर्ण होना चाहिए ताकि आम जनता को दिक्कत न हो। वहीं दूसरी ओर व्यापारी वर्ग और कार्यालय जाने वाले लोग संभावित जाम और सुरक्षा बंदोबस्त को लेकर चिंतित हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य के गृह मंत्री ने बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार किसानों के मुद्दों पर संवाद के लिए तैयार है। उन्होंने बच्चू कडू से अपील की कि वे आंदोलन को शांतिपूर्ण रखें और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ें।
निष्कर्ष
नागपुर में बच्चू कडू के नेतृत्व में किसानों का ‘यलगार मार्च’ एक बार फिर यह दर्शाता है कि महाराष्ट्र में किसान मुद्दे अभी भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। सरकार एक ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर किसानों के आंदोलन ने प्रशासन को चुनौती दे दी है।
फिलहाल नागपुर में माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि जब ‘यलगार मार्च’ नागपुर पहुंचेगा, तब स्थिति किस दिशा में जाएगी — संवाद की ओर या टकराव की ओर।
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