मतदाता सूची को लेकर आज होने वाली महाविकास अघाड़ी की रैली को मुंबई पुलिस ने इजाजत नहीं दी है। वहीं बीजेपी ने भी विपक्ष के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
राज्य की राजनीति इन दिनों मतदाता सूची को लेकर उबाल पर है। आगामी स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। उद्धव ठाकरे और शरद पवार को इस मुद्दे पर प्रस्तावित रैली करने की इजाजत नहीं मिली, जिससे विपक्षी दलों का आक्रोश और बढ़ गया है। वहीं, भाजपा ने भी इस मसले पर अपना मोर्चा खोल दिया है और राज्य सरकार पर प्रशासनिक पक्षपात के आरोप लगाए हैं।

मतदाता सूची को लेकर विवाद की शुरुआत
महाराष्ट्र में हाल ही में जारी की गई मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में नाम गायब होने की शिकायतें सामने आई हैं। कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि लाखों वैध मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं, जबकि कुछ इलाकों में “डुप्लिकेट वोटर” जोड़े गए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) ने संयुक्त रूप से राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की थी।
दोनों दलों ने रविवार को मुंबई और पुणे में “लोकशाही वाचवा रैली (लोकतंत्र बचाओ रैली)” आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के हवाले से रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे विपक्षी नेताओं ने सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया।
उद्धव ठाकरे और शरद पवार का हमला
रैली रद्द होने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा, “जब जनता के हक़ की बात आती है, तो सरकार डर जाती है। उन्हें डर है कि लोग उनके खिलाफ खड़े हो जाएंगे। मतदाता सूची में हेरफेर करना लोकतंत्र पर हमला है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग सत्ताधारी दलों के इशारे पर काम कर रहा है।
वहीं, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, “हमने रैली का उद्देश्य साफ किया था — मतदाता सूची में पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी। लेकिन सरकार ने आवाज़ उठाने से पहले ही हमें रोक दिया। यह महाराष्ट्र की परंपरा के खिलाफ है।” उन्होंने कहा कि विपक्ष अब इस मुद्दे को विधानसभा और संसद दोनों में उठाएगा।
बीजेपी का पलटवार

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पूरे विवाद पर पलटवार किया है। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष आशिष शेलार ने कहा कि “विपक्ष मुद्दा बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। मतदाता सूची का काम पूरी तरह से चुनाव आयोग के अधीन होता है, सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।”
भाजपा ने विपक्ष पर “राजनीतिक नौटंकी” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव करीब आने पर उद्धव और पवार जनता के सामने सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि “अगर किसी मतदाता का नाम छूटा है तो वह नियमानुसार पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत जुड़ सकता है, लेकिन सड़क पर उतरना समाधान नहीं।”
प्रशासन की सफाई
मुंबई पुलिस ने अपनी ओर से बयान जारी कर कहा कि रैली की अनुमति न देने का फैसला “कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए” लिया गया है। पुलिस का कहना है कि रैली के लिए चुने गए स्थलों पर पहले से ही अन्य कार्यक्रम निर्धारित थे, और बड़ी भीड़ इकट्ठा होने की आशंका के चलते सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता था।
चुनाव आयोग ने भी यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के संबंध में किसी भी शिकायत की जांच के लिए विशेष अधिकारी तैनात किए गए हैं और प्रत्येक जिले में पुनरीक्षण का कार्य जारी है।
राजनीतिक माहौल गरम
इस विवाद ने महाराष्ट्र की सियासत को गरमा दिया है। उद्धव ठाकरे गुट, शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर आने वाले दिनों में राज्यभर में “जनसंपर्क अभियान” चलाने की घोषणा की है, जिसके जरिए वे मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठाएंगे।
दूसरी ओर, भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना ने इसे “राजनीतिक प्रपंच” बताते हुए कहा कि विपक्ष को हार का डर सता रहा है, इसलिए वह पहले से ही चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगा है।
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