मुख्यमंत्री के कमरे तक पहुंचा ठग, IRS अधिकारी बनकर किया धोखा !

यूपी के लखनऊ में खुद को IRS अधिकारी बताकर एक जालसाज मुख्यमंत्री के कमरे तक पहुंच गया। इसके बाद जालसाज को गिरफ्तार कर लिया गया। अब उससे पूछताछ की जा रही है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को एक गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। विभूतिखंड स्थित होटल मैरियट में ठहरे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही तब उजागर हुई जब दिल्ली के शकरपुर निवासी एक शातिर जालसाज खुद को भारतीय राजस्व सेवा (IRS) का अधिकारी बताकर मुख्यमंत्री के कमरे तक पहुंच गया। पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए आरोपी को मौके से गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।

मुख्यमंत्री के कमरे तक पहुंचा ठग, IRS अधिकारी बनकर किया धोखा !
मुख्यमंत्री के कमरे तक पहुंचा ठग, IRS अधिकारी बनकर किया धोखा !

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी का नाम प्रशांत मोहन है, जो दिल्ली के शकरपुर इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। प्रशांत मोहन बीते कुछ दिनों से होटल मैरियट के कमरे नंबर 731 में ठहरा हुआ था। उसी दौरान, 31 अक्टूबर को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा भी होटल में ठहरे हुए थे। बताया जा रहा है कि जब प्रशांत को इस बात की जानकारी मिली कि होटल में मुख्यमंत्री भी मौजूद हैं, तो उसने उनसे मिलने की योजना बना डाली।

शातिर ठग प्रशांत मोहन ने खुद को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में IRS अधिकारी बताया। उसने होटल और सुरक्षा कर्मचारियों से कहा कि उसे मुख्यमंत्री माणिक साहा से “आधिकारिक कार्य” को लेकर जरूरी मुलाकात करनी है। उसने अपना पहचान पत्र दिखाया, जिसमें वह “एडिशनल कमिश्नर, इनकम टैक्स विभाग” के पद पर दर्शाया गया था। उसकी वेशभूषा और आत्मविश्वास देखकर सुरक्षा कर्मी कुछ देर के लिए झांसे में आ गए, लेकिन कार्ड की बनावट और स्याही देखकर उन्हें शक हुआ।

सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी। जांच करने पर पता चला कि प्रशांत मोहन न तो किसी सरकारी सेवा में है और न ही उसका वित्त मंत्रालय से कोई संबंध है। इसके बाद उसे मौके पर ही रोका गया और विभूतिखंड पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया।

जांच के दौरान पुलिस को उसके कमरे से कई फर्जी दस्तावेज, सरकारी विभागों के नकली आईडी कार्ड, और कई नामों के विजिटिंग कार्ड मिले। पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को धोखा दे रहा था। उसके मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर लिया गया है ताकि उसकी गतिविधियों की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके।

विभूतिखंड थाना प्रभारी ने बताया कि प्रशांत मोहन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी पहचान पत्रों की फर्जीवाड़े से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी किसी बड़े गिरोह से जुड़ा हुआ है या उसने पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है।

सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर एक मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी है। होटल मैरियट जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीएम माणिक साहा के होटल में ठहरने की जानकारी किसी आंतरिक स्रोत के माध्यम से जालसाज तक पहुंची थी, जिसकी जांच अब खुफिया विभाग कर रहा है।

लखनऊ पुलिस आयुक्त ने इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं और होटल प्रबंधन को भी नोटिस भेजा गया है कि उन्होंने बिना उचित सत्यापन के किसी को वीआईपी सुरक्षा क्षेत्र तक कैसे पहुंचने दिया। पुलिस ने होटल के सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की है कि आरोपी कब से होटल में ठहरा था और किन लोगों से उसका संपर्क हुआ।

त्रिपुरा सीएम माणिक साहा की सुरक्षा टीम ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि “सतर्क सुरक्षा कर्मियों की वजह से बड़ी घटना टल गई। अगर समय रहते आरोपी को न रोका जाता, तो यह मामला गंभीर रूप ले सकता था।”

फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश क्यों की थी—क्या यह किसी व्यक्तिगत मकसद से था या इसके पीछे कोई संगठित साजिश थी।

यह घटना न केवल राजधानी लखनऊ की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि फर्जी पहचान और सरकारी पदों का गलत इस्तेमाल करने वाले जालसाज कितनी आसानी से सुरक्षा कवच को भेदने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी के अन्य नेटवर्क की जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं।

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