हरमनप्रीत की लीडरशिप पर उठे सवाल, ड्रेसिंग रूम का माहौल गर्म !

रंगास्वामी ने ज़ोर देकर कहा कि ” कप्तानी में बदलाव टीम के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए.” उनकी इस बयान ने खलबली मचा दी है.  फैन्स ने हरमनप्रीत की क्षमता को कम करके आंकने के लिए रंगास्वामी की आलोचना की. 

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। यह चर्चा टीम के प्रदर्शन को लेकर नहीं, बल्कि उनकी कप्तानी को लेकर है। पूर्व भारतीय कप्तान शांता रंगास्वामी ने हरमनप्रीत की कप्तानी भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुझाव दिया है कि अब उन्हें कप्तानी छोड़कर अपनी बल्लेबाजी और फील्डिंग पर अधिक ध्यान देना चाहिए। रंगास्वामी के इस बयान ने क्रिकेट जगत में हलचल पैदा कर दी और सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं।

हरमनप्रीत की लीडरशिप पर उठे सवाल, ड्रेसिंग रूम का माहौल गर्म !
हरमनप्रीत की लीडरशिप पर उठे सवाल, ड्रेसिंग रूम का माहौल गर्म !

शांता रंगास्वामी ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि यह बदलाव व्यक्तिगत आलोचना नहीं, बल्कि टीम के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुझाया गया है। उन्होंने कहा,
“मेरा मानना है कि हरमनप्रीत को अब कप्तानी छोड़ देनी चाहिए। इससे वह अपनी बल्लेबाजी और फील्डिंग पर बेहतर ध्यान दे सकेंगी। यह बदलाव टीम के दीर्घकालिक भविष्य के लिए आवश्यक है।”

उनके इस बयान का असर तुरंत दिखाई दिया, और क्रिकेट प्रशंसकों और विश्लेषकों में इस मुद्दे को लेकर खुली बहस शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने रंगास्वामी की आलोचना करते हुए कहा कि हरमनप्रीत ने टीम को लगातार मजबूती दी है और बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव टीम के लिए अनमोल है। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि किसी भी हार या खराब प्रदर्शन के बाद कप्तानी पर सवाल उठाना एक “पुरानी आदत” हो गई है, जिसे अब बंद होना चाहिए।

अंजुम चोपड़ा ने जताई नाराज़गी, कहा- “यह बहस हर बार दोहराई जाती है”

दूसरी ओर, पूर्व भारतीय कप्तान अंजुम चोपड़ा ने इस मुद्दे पर स्पष्ट असहमति जताई। NDTV से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर बार जब भारत कोई बड़ा टूर्नामेंट हारता या जीतता है, इसी तरह की बहस सामने आ जाती है। उन्होंने कहा:

“हर वर्ल्ड कप के बाद, इस तरह का एक बयान सामने आता है। पिछले चार-पाँच वर्ल्ड कप उठाकर देख लीजिए, आप देखेंगे कि हर बार यही कहा गया कि हरमनप्रीत को हटाना चाहिए। यह काफी अजीब है। जब भारत जीतता है, तब भी यही बात। जब हारता है, तब भी यही बात। यह ट्रेंड समझ से परे है।”

अंजुम चोपड़ा ने जताई नाराज़गी, कहा- "यह बहस हर बार दोहराई जाती है"
अंजुम चोपड़ा ने जताई नाराज़गी, कहा- “यह बहस हर बार दोहराई जाती है”

उन्होंने आगे कहा कि यह चर्चा भारतीय महिला टीम की हालिया उपलब्धियों के भावनात्मक मूल्य को कम कर सकती है, इसलिए वह इस विषय पर आगे कोई बयान नहीं देना चाहतीं।
“मैं अभी इस पर कोई बयान नहीं करना चाहती क्योंकि इससे भारत की जीत का पल खराब हो जाएगा।”

कप्तानी और प्रदर्शन: दोनों का संतुलन जरूरी

हरमनप्रीत कौर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सबसे सफल और अनुभवी खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। उनकी कप्तानी में भारत ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीते हैं। खासकर बड़े टूर्नामेंटों में उनका नेतृत्व और मैदान पर उनकी आक्रामकता उन्हें एक विशिष्ट खिलाड़ी और कप्तान बनाती है।

हालांकि यह भी सच है कि टीम का प्रदर्शन कई मौकों पर उतार-चढ़ाव वाला रहा है, जिसके चलते कप्तानी पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तान के रूप में मैच प्रबंधन, रणनीति निर्माण और टीम मनोबल बनाए रखना कठिन जिम्मेदारियाँ हैं, जिन्हें व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ संतुलित करना आसान नहीं होता।

फैसले की दिशा अब चयन समिति के हाथों

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय क्रिकेट चयन समिति इस मुद्दे को किस तरह लेती है। क्या हरमनप्रीत कप्तान बनी रहेंगी या टीम में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा आगे बढ़ेगी? फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

निष्कर्ष

हरमनप्रीत की कप्तानी को लेकर जारी यह विवाद एक बार फिर बताता है कि भारतीय महिला क्रिकेट में नेतृत्व की भूमिका को लेकर सार्वजनिक चर्चा कितनी संवेदनशील और भावनात्मक है। जहाँ एक ओर अनुभव और स्थिरता की बात है, वहीं दूसरी ओर टीम के भविष्य और नई दिशा की मांग भी उठाई जा रही है। आने वाले समय में यह फैसला टीम की संरचना और मनोबल दोनों को प्रभावित कर सकता है।

Also Read :

भारत की जीत पर कोहली-तेंदुलकर भावुक, डिविलियर्स बोले—गर्व है इस टीम पर !