25 Se 30 Fir Se Nitish: पोस्टर से जवाब दिया गया है कि चुनाव के बाद एनडीए में बहुमत का आंकड़ा कुछ भी हो, नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहेंगे. विपक्ष कई बार कई चुका है कि बीजेपी नीतीश को सीएम नहीं बनाएगी.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच अब चुनावी रैलियों और बयानों के साथ-साथ पोस्टर वार भी तेज हो गया है। 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले पटना की सड़कों, चौराहों और प्रमुख गलियारों में जेडीयू की ओर से लगाए गए नए पोस्टर ने राजनीतिक चर्चा को और गर्म कर दिया है। ये पोस्टर साफ तौर पर नीतीश कुमार के नेतृत्व को केंद्र में रखते हुए संदेश देता है:
“25 से 30, फिर से नीतीश”
यानी 2025 से 2030 तक भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही रहेंगे, यही जेडीयू ने अपने पोस्टर के जरिए दावा किया है।

पोस्टर का संदेश — सिर्फ विपक्ष को नहीं, बीजेपी को भी संकेत
इस पोस्टर की खासियत है कि यह सिर्फ विपक्ष (महागठबंधन) को ही नहीं, बल्कि सत्ता गठबंधन में शामिल बीजेपी को भी सीधा राजनीतिक संकेत देता हुआ प्रतीत होता है। क्योंकि बीते कुछ महीनों में कई राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और चुनाव के बाद मुख्यमंत्री कौन होगा—यह मुद्दा खुला रह सकता है।
लेकिन जेडीयू के इस पोस्टर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि
“चेहरा वही रहेगा — फैसला स्पष्ट है — नीतीश ही मुख्यमंत्री हैं और आगे भी रहेंगे।”
पोस्टर में क्या दिखाया गया है?
पोस्टर में:
- नीतीश कुमार की बड़ी तस्वीर है
- पीछे बिहार का नक्शा दर्शाया गया है
- सामने बड़ा स्लोगन:
“25 से 30, फिर से नीतीश”
पोस्टर का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि संदेश स्पष्ट, सीधा और भावनात्मक रूप से जनता से जुड़ता दिखे।
चुनावी रणनीति का हिस्सा या सियासी जवाब?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, जेडीयू ने यह पोस्टर ऐसे समय में जारी किया है जब:
- दूसरे चरण का मतदान बेहद निर्णायक माना जा रहा है
- विपक्ष नीतीश सरकार पर थकान, नेतृत्व क्षमता और बदलाव की जरूरत जैसे सवाल उठा रहा है
- NDA के भीतर भी कुछ हलकों में यह चर्चा थी कि भविष्य में नेतृत्व विकल्प खुला हो सकता है
इस पोस्टर को एक रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है कि
नीतीश कुमार अब भी गठबंधन और प्रदेश की राजनीति का केंद्रबिंदु हैं।
नीतीश का राजनीतिक अनुभव ही बड़ा आधार
जेडीयू लगातार अपने प्रचार में यह बात प्रमुखता से रख रही है कि:
- नीतीश कुमार ने बिहार में प्रशासनिक सुधार किए
- शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया
- न्याय एवं सुरक्षा प्रणाली में सुधार किए
- और राज्य में स्थिरता बनाए रखी
इसी अनुभव को चुनाव में सबसे बड़ी पूंजी की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।
विपक्ष का जवाब
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि यह पोस्टर भ्रम फैलाने की कोशिश है और जनता बदलाव चाहती है। विपक्ष का दावा है कि
“यह चुनाव का नारा नहीं, यह नेतृत्व की असुरक्षा का संकेत है।”
हालांकि, जेडीयू समर्थकों का कहना है कि
“जब नीतीश हैं तो बिहार सुरक्षित है।”
जनता का मूड — अभी भी निर्णायक
वोटिंग पैटर्न के अनुसार बिहार में:
- युवा मतदाता,
- महिला वोट बैंक,
- और ग्रामीण इलाकों की सामाजिक संरचना
नीतीश के भविष्य का फैसला तय करेगी।
दूसरे चरण के मतदान से पहले यह पोस्टर मतदाताओं के बीच नेतृत्व की स्थिरता का संदेश देने की कोशिश है।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 अब सिर्फ विकास बनाम बदलाव की लड़ाई नहीं, बल्कि नेतृत्व की निरंतरता बनाम नए चेहरे की लड़ाई में भी बदल चुका है।
जेडीयू का नया नारा “25 से 30, फिर से नीतीश” इसी रणनीति का हिस्सा है, जो चुनावी माहौल में एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देता है—
कि नीतीश कुमार ही NDA का चेहरा हैं, और आगे भी रहेंगे।
Also Read :
फेज-2 पोलिंग: नीतीश के स्वास्थ्य को लेकर बीजेपी ने किया भरोसेमंद दावा !