राजभर के बयान से बढ़ी हलचल! बिहार में सत्ता बदलने की भविष्यवाणी !

बिहार चुनाव में यूपी सरकार को समर्थन देने वाले ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा 64 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, राजभर और उनके बेटों ने इस चुनाव में जमकर प्रचार भी किया है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार थम चुका है। अब हर किसी की निगाहें मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और एनडीए की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का एक बयान सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए परेशानी खड़ी करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया है कि बिहार में इस बार महागठबंधन को जनता का व्यापक समर्थन मिल सकता है और चुनाव परिणामों के बाद राज्य में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाली सरकार का गठन संभव है।

राजभर के बयान से बढ़ी हलचल! बिहार में सत्ता बदलने की भविष्यवाणी !
राजभर के बयान से बढ़ी हलचल! बिहार में सत्ता बदलने की भविष्यवाणी !

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि बिहार में इस बार बंपर मतदान हुआ है और यह इशारा करता है कि जनता बदलाव के मूड में है। उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, मतदाताओं में समस्याओं को लेकर नाराजगी देखी गई है और यह माहौल महागठबंधन के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उनके प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने जमीन पर जो स्थिति देखी है, उससे लगता है कि आरजेडी नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आ सकती है।

हालांकि राजभर का यह बयान एनडीए के भीतर असहजता और असंतोष का कारण बन गया है। बिहार में एनडीए जहां भाजपा और जदयू सहित कई दलों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में है, वहीं सुभासपा की यह टिप्पणी यह संकेत देती है कि सहयोगी दलों के बीच तालमेल उतना सहज नहीं है, जितना प्रचार के दौरान दिखाया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि राजभर इससे पहले भी कई मौकों पर राजनीतिक मंचों और मीडिया के सामने गठबंधन के भीतर असहमति या अपनी अलग राजनीतिक रणनीति का संकेत दे चुके हैं।

राजभर के इस बयान को राजनीतिक हलकों में गठबंधन की एकता पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान एनडीए के अन्य नेताओं ने हालांकि इस टिप्पणी पर कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस तरह के बयान चुनाव से पहले और मतदान के दिन के करीब आने पर मतदाताओं के मन में भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इससे खासकर सॉफ्ट वोटर और undecided voters में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से इस बयान को एक मनोबल बढ़ाने वाली प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। आरजेडी नेताओं का कहना है कि चुनावी हवा पहले ही उनके पक्ष में है और अब एनडीए के अंदर से आने वाले ऐसे संकेत साफ करते हैं कि सत्तारूढ़ गठबंधन की नींव मजबूत नहीं है। उनका कहना है कि जनता बेरोजगारी, महंगाई और कृषि से जुड़े सवालों को लेकर निर्णयात्मक मूड में है और बदलाव चाहती है।

विश्लेषकों की मानें तो मतदान के दौरान मतदान प्रतिशत, युवाओं की भागीदारी और क्षेत्रीय मुद्दों का प्रभाव निर्णायक हो सकता है। पहली बार बड़ी संख्या में नए मतदाताओं ने हिस्सा लिया है, जिससे अंतिम परिणामों में अप्रत्याशित बदलाव भी संभव है। इसके अलावा बिहार में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी परिणामों को प्रभावित करते आए हैं, और इस बार भी यह फैक्टर खास भूमिका निभा सकता है।

खैर, ओम प्रकाश राजभर का बयान अब राजनीतिक चर्चा का नया केंद्र बन गया है। जबकि प्रचार थम चुका है, नेताओं के ऐसे वक्तव्य चुनाव बाद की राजनीतिक रणनीतियों के संकेत भी दे सकते हैं। अब असल तस्वीर वोटों की गिनती के बाद ही स्पष्ट होगी कि क्या वाकई बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने जा रहा है या एनडीए सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल होगा।

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