बीजेपी सांसद कंगना रनौत कानूनी शिकंजे में, देशद्रोह केस को मिली मंजूरी !

अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कहा कि 6 मई 2025 को  लोअर कोर्ट ने मेरा वाद खारिज किया था, 12 नवम्बर को रिवीजन याचिका को स्वीकार किया गया है, अब 29 नवंबर को उसमें सुनवाई होगी.

हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ किसान आंदोलन से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आगरा की अदालत में उनके खिलाफ दायर किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह से जुड़ी रिवीजन याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। इस याचिका की अगली सुनवाई 29 नवंबर 2025 को तय की गई है।

यह मामला तब का है जब कंगना रनौत ने किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर कुछ विवादास्पद बयान दिए थे, जिन्हें किसानों के प्रति अपमानजनक बताया गया था। इसके साथ ही, उन्होंने अपने एक पोस्ट में महात्मा गांधी के प्रति की गई टिप्पणी से भी विवाद खड़ा कर दिया था। इसी को लेकर आगरा के अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने उनके खिलाफ अदालत में मामला दायर किया था।

बीजेपी सांसद कंगना रनौत कानूनी शिकंजे में, देशद्रोह केस को मिली मंजूरी !
बीजेपी सांसद कंगना रनौत कानूनी शिकंजे में, देशद्रोह केस को मिली मंजूरी !

2024 में दर्ज हुआ था मामला

अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बताया कि उन्होंने 11 सितंबर 2024 को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट, आगरा में कंगना रनौत के खिलाफ एक वाद दायर किया था। वाद में उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर किसानों का अपमान करने वाले बयान दिए और महात्मा गांधी जैसे राष्ट्रपिता का भी अपमान किया।

शर्मा ने कहा कि यह कृत्य न केवल किसानों की भावनाओं को आहत करता है बल्कि राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में भी आता है। मामले की सुनवाई करीब 9 महीने तक चली, लेकिन 6 मई 2025 को स्पेशल कोर्ट ने मामले को अधूरी व्याख्या बताते हुए खारिज कर दिया।

रिवीजन याचिका में मिली राहत

मामला खारिज होने के बाद अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने हार नहीं मानी और उन्होंने ऊपरी अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल की। अब 12 नवंबर 2025 को स्पेशल जज एमपी-एमएलए लोकेश कुमार ने रिवीजन स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने माना कि मामला सुनवाई योग्य है और इस पर आगे की प्रक्रिया चलनी चाहिए।

रमाशंकर शर्मा ने बताया कि अदालत ने उनकी दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट रूप से कहा है कि कंगना रनौत के खिलाफ दायर यह रिवीजन याचिका स्वीकार की जाती है। अब कोर्ट इस मामले पर विस्तार से सुनवाई करेगा और 29 नवंबर 2025 को अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है।

किसानों के अपमान और राष्ट्रद्रोह के आरोप

कंगना रनौत पर लगे आरोपों के अनुसार, उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान कुछ ऐसे बयान दिए थे जिनमें आंदोलनरत किसानों को अपमानजनक शब्दों में संबोधित किया गया था। साथ ही, उन्होंने अपने पोस्ट में महात्मा गांधी को लेकर भी विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिस पर देशभर में विरोध के स्वर उठे थे।

शिकायतकर्ता का कहना है कि कंगना ने अपने बयान के जरिए किसानों और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का अपमान किया, जो संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत है।

अदालत में अगली रणनीति

अब यह मामला एक बार फिर से न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया है। 29 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि क्या कंगना रनौत पर राष्ट्रद्रोह और किसानों के अपमान से जुड़े आरोपों पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।

यदि अदालत इस मामले को सुनवाई योग्य मानती है, तो कंगना रनौत को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है या उनके वकील के माध्यम से बचाव पेश किया जा सकता है।

राजनीतिक और कानूनी हलचल

कंगना रनौत अब एक बीजेपी सांसद हैं और संसद में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में इस मामले के दोबारा खुलने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विरोधी दल इसे “कानून के समानता के सिद्धांत” का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह “राजनीतिक रूप से प्रेरित याचिका” है।

अब सबकी निगाहें 29 नवंबर को आगरा की एमपी-एमएलए कोर्ट पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि यह मामला आगे बढ़ेगा या नहीं।

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