आजम खान के साथ उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को भी सात साल की सजा सुनाई गई है। दोनों के पास एक से ज्यादा पैन कार्ड थे। एमपी एमएलए कोर्ट ने दोनों को सजा सुनाई है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के पूर्व विधायक आज़म खान के लिए कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। इसी साल 23 सितंबर को जेल से रिहा हुए आज़म खान को एक बार फिर जेल जाना पड़ेगा। एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उन्हें दो पैन कार्ड रखने और फर्जी दस्तावेज़ों के इस्तेमाल के मामले में दोषी ठहराते हुए 7 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। यही सजा उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म को भी दी गई है। अदालत के इस फैसले के बाद दोनों को 17 नवंबर को न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।

क्या है पूरा मामला?
इस केस की शुरुआत साल 2019 में हुई जब भारतीय जनता पार्टी के नेता आकाश सक्सेना ने आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सक्सेना ने आरोप लगाया कि आज़म खान दो अलग-अलग पैन कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और दोनों कार्ड में उनकी जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज है। यह आयकर विभाग के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और एक आपराधिक कृत्य भी।
शिकायत पर हुई जांच में यह बात सामने आई कि आज़म खान के पास दो पैन कार्ड मौजूद थे—एक में उनकी उम्र अलग दर्ज थी और दूसरे में अलग आयु का उल्लेख था। यही आरोप उनके बेटे पर भी लगा, जिसके बाद मामला एमपी-एमएलए विशेष अदालत में पहुंचा।
कोर्ट ने क्या कहा?
एमपी-एमएलए कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद पाया कि—
- आज़म खान और उनके बेटे ने जानबूझकर दो अलग पैन कार्ड बनाए,
- दोनों दस्तावेजों में आयु और जन्मतिथि में अंतर था,
- यह कार्रवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज का इस्तेमाल) के अंतर्गत अपराध है।
अदालत ने दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्तियों से अपेक्षा होती है कि वे कानून का पालन करें, न कि उसका दुरुपयोग।
सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की जमानत रद्द कर दी गई और आदेश दिया गया कि उन्हें 17 नवंबर को फिर से जेल भेजा जाए।
23 सितंबर को मिली थी राहत
इससे पहले आज़म खान लंबे समय तक कानूनी मामलों में उलझे रहे थे और 23 सितंबर 2023 को बड़ी मुश्किलों के बाद उन्हें रिहाई मिली थी। रिहाई के बाद उन्हें राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर थोड़ी राहत दिखाई दी थी, लेकिन दो पैन कार्ड मामले में आए इस ताज़ा फैसले ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।
बीजेपी नेता की शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
आकाश सक्सेना, जो लंबे समय से आज़म खान के राजनीतिक प्रतिद्वंदी माने जाते हैं, ने 2019 में यह मामला दर्ज कराया था। सक्सेना ने कहा था कि—
- आज़म खान ने अपने लाभ के लिए दो पैन कार्ड बनवाए,
- दस्तावेजों की जानकारी एक-दूसरे से मेल नहीं खाती,
- इससे उनकी पहचान और सरकारी कागज़ात पर संदेह पैदा होता है।
सक्सेना का आरोप था कि यह न सिर्फ धोखाधड़ी है बल्कि सरकारी सिस्टम के साथ छल का मामला भी है। उनकी शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में आरोप पत्र दाखिल किया।
राजनीतिक माहौल में हलचल
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
- समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता सकती है,
- जबकि बीजेपी इसे कानून का राज कहकर प्रस्तुत कर रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस सजा का असर आज़म खान के राजनीतिक भविष्य पर पड़ेगा, जो पहले से ही कई मामलों में फंसे हुए हैं।
क्या आने वाले समय में बढ़ेंगी मुश्किलें?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि—
- सात साल की सजा गंभीर श्रेणी में आती है।
- यह सजा उनके चुनाव लड़ने के अधिकार को भी प्रभावित कर सकती है।
- अपील दायर करने के बाद हाई कोर्ट से राहत मिलना या न मिलना, उनके राजनीतिक करियर को तय करेगा।
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