BMC चुनाव में नई खिचड़ी, विपक्ष में बढ़ी खटपट!

BMC चुनाव के बीच कांग्रेस पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। हालांकि उद्धव कांग्रेस पार्टी को मनाने की कोशिश में जुटे हैं। इसके अलावा उद्धव ने प्लान-बी भी तैयार कर लिया है।

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गर्माती दिख रही है। ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। बीते कुछ दिनों में महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर उभरी नाराजगी और नए गठजोड़ के संकेतों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस खुलकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर रही है, जबकि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) लगातार मामले को संभालने की कोशिश में जुटा है। इसी बीच उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और शरद पवार के बीच संभावित नए गठबंधन की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

BMC चुनाव में नई खिचड़ी, विपक्ष में बढ़ी खटपट!
BMC चुनाव में नई खिचड़ी, विपक्ष में बढ़ी खटपट!

कांग्रेस की नाराजगी का कारण क्या?

कांग्रेस पार्टी का गुस्सा सीधे-सीधे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। हाल ही में दोनों नेताओं की कई मुलाकातों और राजनीतिक बातचीत की खबरें सामने आईं। कांग्रेस को लग रहा है कि इन बैठकों का सीधा असर MVA के अंदर उसकी स्थिति और प्रभाव पर पड़ेगा।

कांग्रेस की नाराजगी का कारण क्या?
कांग्रेस की नाराजगी का कारण क्या?

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्होंने गठबंधन की मजबूती के लिए कई बार सुझाव भी दिए, लेकिन शिवसेना की “एकतरफा राजनीतिक सक्रियता” ने उन्हें हाशिए पर धकेल दिया है। इस नाराजगी ने अब असंतोष का स्पष्ट रूप ले लिया है, जिसकी वजह से महाविकास अघाड़ी में तनाव बढ़ गया है।

उद्धव ठाकरे कर रहे हैं कांग्रेस को मनाने की कोशिश

स्थिति बिगड़ने के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस से संवाद बढ़ाने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि उन्होंने पार्टी के कई शीर्ष नेताओं से निजी बातचीत की है और भरोसा दिलाया है कि गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका और सम्मान कम नहीं होने दिया जाएगा।

हालांकि कांग्रेस फिलहाल किसी भी आश्वासन को पर्याप्त नहीं मान रही है। उसका तर्क है कि बीएमसी जैसे बड़े चुनाव में हर कदम रणनीतिक होना चाहिए और बिना चर्चा किए हुए कोई भी राजनीतिक नजदीकी गठबंधन के लिए खतरा पैदा करती है।

उद्धव–राज–शरद गठबंधन पर गंभीर चर्चा?

राज्य में इस समय सबसे बड़ी चर्चा उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और शरद पवार के बीच संभावित नए गठबंधन की है। सूत्र बताते हैं कि तीनों नेताओं के बीच कुछ विशेष मुद्दों पर सहमति बनती दिख रही है।

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का रवैया पिछले कुछ महीनों से काफी नरम दिख रहा है, जबकि शरद पवार भी राज्य की राजनीति में एक बार फिर सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दे रहे हैं।
यदि यह त्रिकोणीय गठबंधन मजबूती पाता है, तो BMC चुनाव में बड़ा राजनीतिक भूचाल आ सकता है, क्योंकि मुम्बई की राजनीति में इन तीनों नेताओं का प्रभाव अलग-अलग वर्गों में काफी मजबूत है।

BMC चुनाव बना शक्ति परीक्षण का मंच

मुंबई की BMC एशिया की सबसे संपन्न नगर निकाय है, जिसका बजट कई राज्यों के बजट से भी बड़ा है। इसीलिए इसके चुनाव हमेशा रणनीतिक महत्व रखते हैं।
2017 से पहले शिवसेना इस पर लगातार कब्जा बनाए हुए थी, लेकिन वर्तमान राजनीतिक स्थिति में सत्ता समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं।

MVA के अंदर बढ़ती दरारें, उद्धव और राज के बीच संभावित तालमेल, और कांग्रेस की नाराजगी—यह सभी कारक मिलकर चुनाव को और दिलचस्प बना रहे हैं।

लगातार बैठकों का दौर जारी

राजनीतिक पार्टियों में इन दिनों अंदरूनी बैठकों की झड़ी लगी हुई है।

  • कांग्रेस अपने स्थानीय नेताओं से फीडबैक ले रही है कि MVA के भीतर बने रहना कितना फायदेमंद है।
  • शिवसेना (UBT) चाहती है कि गठबंधन टूटी नहीं, ताकि बीजेपी के खिलाफ वोट बिखरें नहीं।
  • NCP (शरद पवार गुट) लगातार दोनों पक्षों से बातचीत में लगा है।

इन बैठकों में कई नए समीकरण तैयार हो रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम रूप नहीं ले पाया है।

आगे क्या हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस की नाराजगी बढ़ी और उद्धव–राज–शरद गठबंधन पक्का हुआ, तो महाविकास अघाड़ी टूट सकती है।
वहीं शिवसेना का मानना है कि सारी पार्टियों को एक साथ रहकर चुनाव लड़ना चाहिए, तभी मुंबई में विपक्ष भाजपा को कड़ी चुनौती दे पाएगा।

अभी स्थिति पूरी तरह खुली हुई है और आने वाले हफ्तों में महाराष्ट्र की राजनीति कई बड़े मोड़ ले सकती है।

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