ऐतिहासिक आकार की पताका अयोध्या में तैयार, जल्द चढ़ेगी शिखर पर !

राम मंदिर पर ध्वजारोहण समारोह के लिए पूजा-पाठ शुरू हो गया है। इस खबर में जानिए कि राम मंदिर पर फहराई जाने वाली पताका की खासियत क्या है?

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्मिकता और वैदिक मंत्रों की गूंज से भर उठा है। मंदिर परिसर में ध्वजारोहण समारोह के निमित्त भव्य धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो चुके हैं। अयोध्या और काशी के प्रकांड विद्वान और आचार्य मिलकर इन अनुष्ठानों को संपन्न करा रहे हैं। परिसर का वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा, शंखनाद और वेद ऋचाओं की स्वरगाथा से गूंज रहा है।

ऐतिहासिक आकार की पताका अयोध्या में तैयार, जल्द चढ़ेगी शिखर पर !
ऐतिहासिक आकार की पताका अयोध्या में तैयार, जल्द चढ़ेगी शिखर पर !

ध्वजारोहण समारोह राम मंदिर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ा एक दिव्य आयोजन है। मंदिर के शिखर पर विशेष पताका फहराने से पहले वैदिक परंपराओं के अनुसार कई प्रकार के यज्ञ, पूजा और पाठ आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर परिसर में भक्तों और साधु-संतों का भी अच्छा खासा जमावड़ा दिख रहा है।

यज्ञशाला में लगातार चल रहा वैदिक यज्ञ

राम मंदिर की यज्ञशाला में वैदिक विधि-विधान से यज्ञ की आहुतियाँ डाली जा रही हैं। आचार्यगण मंत्रों के उच्चारण के साथ अग्नि में आहुति समर्पित कर रहे हैं। यह यज्ञ मंदिर और परिसर की पवित्रता और आध्यात्मिक उर्जा को बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है।

प्रत्येक मंत्रोच्चार के साथ अग्नि की लौ ऊँची उठती है, और उसका तेज पूरा वातावरण पवित्र बनाता है। श्रद्धालु भी यज्ञ के समीप बैठकर पूर्ण आस्था के साथ मंत्रों की पुनरावृत्ति कर रहे हैं। यज्ञशाला में दिनभर पूजा-पाठ, ध्यान और वैदिक कर्मकांडों का क्रम जारी रहता है।

वेद ऋचाओं का पारायण—परंपरा और धर्म का संगम

ध्वजारोहण से पहले वेदों का पारायण किया जा रहा है। इसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की महत्वपूर्ण ऋचाओं का उच्चारण शामिल है। काशी और अयोध्या के विशेष वेद पाठक इस आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं।

वेद ऋचाओं का पाठ किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन से पहले शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इससे वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पूरे परिसर में मंत्रों की ध्वनि गूंज रही है, जिससे हजारों श्रद्धालु आध्यात्मिक सुकून का अनुभव कर रहे हैं।

रामार्चा, राम रक्षा स्तोत्र और रामायण का अखंड पाठ

अनुष्ठानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रामार्चा पूजन है, जिसमें भगवान श्रीराम का विशेष वैदिक पूजन किया जा रहा है। इसके साथ ही राम रक्षा स्तोत्र का पाठ भी चल रहा है। यह स्तोत्र रक्षा, कल्याण और शक्ति का प्रतीक है और भक्तों में विशेष श्रद्धा के साथ पढ़ा जाता है।

इसके अलावा वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामचरितमानस का सामूहिक पारायण भी किया जा रहा है। यह पाठ अखंड रूप से जारी है और अलग-अलग समूह अपनी-अपनी जिम्मेदारी के अनुसार दोहे, चौपाइयाँ और श्लोकों का पाठ कर रहे हैं। इन पाठों की गूंज मंदिर परिसर को और भी अधिक पवित्र और भक्ति से परिपूर्ण बना रही है।

पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल

ध्वजारोहण समारोह केवल धार्मिक होना नहीं बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर पूरे परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया है। मंदिर के आस-पास फूलों की मालाएं, दीप, और रंगोली के स्वरूप नजर आ रहे हैं।

श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं और अनुष्ठान में शामिल होकर स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे हैं। कई भक्त जमीन पर बैठकर मंत्रों के साथ तालमेल बिठाते हुए आँखें बंद कर ध्यान मग्न दिखाई दे रहे हैं।

ध्वजारोहण की तैयारियाँ अंतिम चरण में

ध्वजारोहण की तैयारियाँ अंतिम चरण में
ध्वजारोहण की तैयारियाँ अंतिम चरण में

ध्वजारोहण के लिए तैयार की गई विशेष पताका को शास्त्रोक्‍त विधि से अनुष्ठान के बाद मंदिर शिखर पर स्थापित किया जाएगा। इससे पहले सभी वैदिक प्रक्रियाओं का पूरा होना अनिवार्य माना गया है।

पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्थानीय पुजारियों की देखरेख में की जा रही है।
समारोह का मुख्य आकर्षण वैदिक मंत्रों के बीच पताका का मंदिर के उच्चतम शिखर पर फहराया जाना होगा।

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