21 नवंबर से खादी महोत्सव: लखनऊ में उमड़ेगा स्वदेशी उत्पादों का मेला !

लखनऊ में 21 नवंबर से खादी महोत्सव का शुभारम्भ हो रहा है। सहारनपुर के नक्काशीदार फर्नीचर, भदोही की कालीन, अमरोहा के गमछे और सदरी, सीतापुर की दरी और तौलिये, वाराणसी की रेशमी साड़ियां, सब कुछ यहां उपलब्ध होगा।

उत्तर प्रदेश में स्थानीय उद्यमशीलता को नई दिशा देने और खादी आधारित उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खादी महोत्सव 2025 का शुभारम्भ 21 नवंबर को लखनऊ में हो गया है। गोमती नगर स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय इस 10 दिवसीय महोत्सव का केंद्र बना है, जहां 30 नवंबर तक खादी, ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प और परंपरागत कलाओं की समृद्ध विरासत का शानदार प्रदर्शन किया जाएगा।

21 नवंबर से खादी महोत्सव: लखनऊ में उमड़ेगा स्वदेशी उत्पादों का मेला !
21 नवंबर से खादी महोत्सव: लखनऊ में उमड़ेगा स्वदेशी उत्पादों का मेला !

ग्रामोद्योग और खादी को सशक्त बनाने का बड़ा अभियान

राज्य सरकार और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यहां प्रदर्शित किए जा रहे उत्पाद केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि हजारों कारीगरों और उद्यमियों की मेहनत, विरासत और कौशल को दर्शाते हैं।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य—

  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को सुदृढ़ करना,
  • महिलाओं और कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराना,
  • और स्थानीय उत्पादों को ब्रांडिंग और मार्केटिंग के माध्यम से नई पहचान देना है।

वाराणसी की रेशमी साड़ियों का विशेष आकर्षण

खादी महोत्सव 2025 में सबसे अधिक चर्चा वाराणसी की मशहूर रेशमी और बनारसी साड़ियों की हो रही है। कारीगरों द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए ये उत्पाद कला, मेहनत और परंपरा का खूबसूरत मिश्रण हैं। बनारसी ब्रोकेड, जरी वर्क, और हस्तकरघा आधारित साड़ियाँ पर्यटकों और स्थानीय खरीदारों के बीच बड़ा आकर्षण बनी हुई हैं।

खादी उत्पादों की विविधता—एक ही छत के नीचे सबकुछ

इस वर्ष महोत्सव में खादी के उत्पादों की विविधता और गुणवत्ता में बड़ा विस्तार देखने को मिल रहा है।
स्टॉलों पर प्रमुख रूप से मिल रहे उत्पाद:

  • खादी के कुर्ते, जैकेट, धोती और दुपट्टे
  • हस्तकरघा बने कपड़े
  • प्राकृतिक रंगों से तैयार परिधान
  • जूट आधारित बैग, सजावटी सामान
  • मधुमक्खी पालन से जुड़े जैविक उत्पाद
  • हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पाद

यहां देशभर से आए 200 से अधिक शिल्पकार और उद्यमी अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।

ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मिलेगी नई गति

इस खादी महोत्सव का बड़ा उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है। यूपी सरकार ने हाल के वर्षों में “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” मॉडल के माध्यम से स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा दिया है, और यह महोत्सव उसी विजन की अगली कड़ी माना जा रहा है।
महोत्सव में शामिल कारीगरों का मानना है कि उन्हें इस मंच के जरिये—

  • बेहतर ग्राहक आधार,
  • नए व्यापारी संपर्क,
  • और टिकाऊ बाजार उपलब्ध होंगे।

कई कारीगरों के लिए यह अवसर न केवल अपने कौशल को प्रदर्शित करने का है, बल्कि यह उनके लिए आर्थिक रूप से बड़ी राहत भी साबित हो सकता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ महोत्सव बना और भी आकर्षक

खादी महोत्सव में केवल व्यापारिक गतिविधियाँ ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों की भी विशेष रूप से व्यवस्था की गई है। संगीतमय प्रस्तुतियाँ, लोकनृत्य, शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम और बच्चों के लिए वर्कशॉप महोत्सव को और जीवंत बना रहे हैं।
इसके अलावा, खादी उद्योग पर आधारित सेमिनार, प्रशिक्षण सत्र और उद्यमिता कार्यशालाएँ भी आयोजित की जा रही हैं, जिसमें विशेषज्ञ छोटे और मझोले उद्यमियों को व्यवसाय मॉडल, ई-कॉमर्स और ब्रांडिंग के बारे में मार्गदर्शन देंगे।

स्वदेशी उत्पादों को मिल रहा नया बाजार

आज के समय में स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ रही है, और यह महोत्सव कारीगरों को शहरों और बड़े बाजारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है। देशी कला और शिल्प को आधुनिक उपभोक्ताओं के बीच पुनः स्थापित करने की दिशा में यह आयोजन खास भूमिका निभा रहा है।

निष्कर्ष

लखनऊ में खादी महोत्सव 2025 का आयोजन न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों का उत्सव है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, परंपरागत कला और स्वदेशी उत्पादों की नई पहचान का भी प्रतीक है।
10 दिनों तक चलने वाला यह आयोजन न सिर्फ खरीदारों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा बल्कि उन हजारों हाथों की मेहनत को भी सम्मान देगा, जिनकी कारीगरी ने भारत की खादी और हस्तशिल्प परंपरा को दुनिया भर में पहचान दिलाई है।

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