लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ श्रीमद् भागवत गीता के उत्सव में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने आरएसएस को लेकर कहा कि RSS बिना किसी जाति देखे सेवा करती है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने एक बार फिर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम देखा, जहाँ दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव का भव्य आयोजन हुआ। यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का बड़ा मंच बना बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए गहन संदेश देने वाली विचारधारा का केंद्र भी साबित हुआ। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता रही—मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति, जिनके संबोधन ने उत्सव की गरिमा को और ऊँचा किया।

► गीता प्रेरणा उत्सव का उद्देश्य
कार्यक्रम आयोजकों के अनुसार, दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव का मकसद सिर्फ धार्मिक आयोजन करना नहीं बल्कि गीता के ज्ञान को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है। गीता के 700 श्लोकों में निहित जीवन-दर्शन, कर्तव्य, त्याग, सद्भाव, समरसता और अध्यात्म का संदेश आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना सहस्राब्दियों पहले था। लखनऊ में आयोजित यह उत्सव इसी प्रेरणा और चैतन्य को लोगों तक पहुँचाने के लिए समर्पित रहा।

► कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग जुटे। श्रद्धालु, छात्र, संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग उत्सव का हिस्सा बने। मंच पर RSS प्रमुख मोहन भागवत और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बना दिया। दोनों प्रमुख हस्तियों ने गीता के महत्व और उससे मिलने वाली प्रेरणा पर विस्तार से विचार रखे।
► CM योगी का संबोधन: “गीता जीवन का मार्गदर्शन है”
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भगवद गीता को जीवन का “अमृत-ग्रंथ” बताया। उन्होंने कहा कि—
“दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव की जब हम बात करते हैं, तो श्रीमद् भगवत गीता के 700 श्लोक हर भारतवासी के लिए जीवन का मंत्र हैं। हर सनातनी इन्हें पवित्र भाव से आत्मसात करता है।”
उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि कर्तव्य-निष्ठा, संयम, संतुलन और आत्मज्ञान का सशक्त मार्गदर्शन है। यह ग्रंथ हमें संघर्ष करते हुए भी सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि भारत ने कभी भी आध्यात्मिक या सांस्कृतिक श्रेष्ठता का घमंड नहीं किया, बल्कि सभी को स्वीकार करने और साथ लेकर चलने की परंपरा निभाई है। उन्होंने कहा—
“भारत ने हमेशा ‘जियो और जीने दो’ का संदेश दिया है। हमारी संस्कृति अहिंसा, करुणा और सह-अस्तित्व पर आधारित है।”
► धर्म का असली अर्थ बताया
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में “धर्म” की परिभाषा पर भी जोर दिया। उनके अनुसार—
• धर्म का अर्थ किसी संप्रदाय से नहीं, बल्कि जीवन जीने के सद्गुणों से है।
• धर्म वही है जो लोगों का कल्याण करे, समाज को जोड़े और विभाजन नहीं, विनम्रता पैदा करे।
• गीता इसी “धर्म” की मूल प्रेरणा है, जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने का साहस प्रदान करती है।
► मोहन भागवत का संदेश
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने गीता को मानवता का सर्वोत्तम मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि गीता का ज्ञान न केवल हिंदू समाज, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए है। उन्होंने बताया कि गीता व्यक्ति को कर्तव्य, आत्मबल और निर्भयता का पाठ पढ़ाती है। उनका यह भी कहना था कि गीता का संदेश किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वभौमिक है।
► विशाल जनसमूह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
उत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीता श्लोक-पाठ, अध्यात्म से जुड़े प्रवचन और संस्कृत शिक्षण संस्थानों के विशेष प्रस्तुतिकरण भी हुए। कई विद्वानों ने गीता के विभिन्न अध्यायों की व्याख्या प्रस्तुत की, जिससे सहभागी लाभान्वित हुए।
► सार
दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव ने लखनऊ की भूमि पर आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बनाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत दोनों ने गीता के व्यापक संदेश को लोगों तक पहुँचाया। अपने संबोधन में CM योगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की संस्कृति सहअस्तित्व, सद्भाव और “जियो और जीने दो” की प्रेरणा पर आधारित है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व का था बल्कि समाज, राष्ट्र और मानवता के निर्माण का संदेश भी समेटे हुए रहा।
Also Read :
राम मंदिर ध्वजारोहण: अयोध्या में बड़े पैमाने पर रूट डायवर्जन लागू !