दिसंबर (2025) से लेकर अगले एक साल में स्वास्थ्य विभाग में 32,700 पदों पर नियुक्ति हो जाएगी. इसमें कई अलग-अलग पद शामिल हैं.
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मंगलवार (25 नवंबर 2025) को स्वास्थ्य विभाग में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक कदम देखने को मिला। एनडीए सरकार के महत्वपूर्ण चेहरे और वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग जाकर विधिवत रूप से मंत्री पद का कार्यभार ग्रहण किया। इससे पहले भी स्वास्थ्य मंत्रालय उनके पास ही था और अब दोबारा मंत्री बनाए जाने के बाद उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

पदभार ग्रहण करते समय मंगल पांडेय ने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दोबारा मिलना उनके लिए सम्मान का विषय है। इस अवसर पर उन्होंने सीवान विधानसभा की जनता को भी धन्यवाद दिया और कहा कि “सीवान की जनता और पूरे बिहार की जनता का आशीर्वाद रहा, जिसके बल पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की प्रचंड जीत हुई और एक बार फिर विकास की निरंतर यात्रा शुरू हुई।”
मंगल पांडेय ने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं को पिछले वर्षों में मजबूती देने का जो प्रयास किया गया था, अब उसे और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचा सुधारना और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को गाँव-गाँव तक पहुंचाना आगामी कार्यकाल की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस दौरान उन्होंने विभाग में रिक्त पदों पर बहाली के सवाल पर भी बड़ा अपडेट दिया।
उन्होंने बताया कि राज्य के अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने की प्रक्रिया तेज की जा चुकी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों, नर्सों, तकनीशियनों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार आएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और योग्यता आधारित होगी ताकि प्रदेश के स्वास्थ्य संसाधनों को सशक्त बनाया जा सके।

पांडेय ने यह भी कहा कि बिहार सरकार का उद्देश्य सिर्फ रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य ढांचे को तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत करना है। इसके तहत अस्पतालों का आधुनिकीकरण, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं, ई-हॉस्पिटल, टेलीमेडिसिन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण और रोग नियंत्रण अभियान को नए आयाम देने की योजना तैयार की जा रही है।
मंगल पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना और राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में जल्द बड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नए मेडिकल कॉलेज खोलने, जिलों के अस्पतालों में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने और डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए व्यापक रोडमैप पर काम पहले से जारी है।
पदभार ग्रहण के बाद हुई चर्चा में मंगल पांडेय ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित परियोजनाओं की समीक्षा कर तेज गति से कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान बिहार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सीखें हासिल की थीं, और अब उन अनुभवों का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में किया जाएगा।
उन्होंने साफ किया कि सरकार स्वास्थ्य सेवा को लोगों का अधिकार बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार का लक्ष्य है कि “हर नागरिक को बिना भेदभाव, बिना विलंब और बिना अतिरिक्त लागत के इलाज उपलब्ध हो।”
मंगल पांडेय की वापसी के साथ विभाग में स्थिरता, अनुभव और निरंतरता आने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी और विभागीय अधिकारियों का मानना है कि उनके नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधारों को नई गति मिलेगी। आने वाले दिनों में विभाग द्वारा नई योजनाओं, नियुक्तियों और संरचनात्मक सुधारों को लेकर कई घोषणाएं होने की संभावना है।
समग्र रूप से पदभार ग्रहण के बाद मंगल पांडेय के शुरुआती संदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, रिक्त पदों पर भर्ती करना और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार सरकार के मुख्य एजेंडे में शामिल है।
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