चुनावी हार पर कांग्रेस का बड़ा आत्ममंथन !

Bihar कांग्रेस 27 नवंबर को दिल्ली में बैठक कर बिहार विधानसभा चुनाव हार की समीक्षा करेगी. सभी 61 प्रत्याशी अपनी रिपोर्ट देंगे. आंतरिक विवाद, नोटिस और निष्कासन के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अब व्यापक समीक्षा मोड में आ गई है। पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने चुनावी परिणामों और संगठनात्मक स्थिति की गहराई से जांच-पड़ताल के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह बैठक 27 नवंबर को दिल्ली में स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित की जाएगी। इसमें बिहार कांग्रेस के सभी प्रमुख नेता, विधायक, चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी, प्रदेश पदाधिकारी और रणनीतिक स्तर पर जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल होंगे।

चुनावी हार पर कांग्रेस का बड़ा आत्ममंथन !
चुनावी हार पर कांग्रेस का बड़ा आत्ममंथन !

चुनाव बाद उठे असंतोष और गुटबाजी ने बढ़ाई चिंता

चुनाव नतीजों के बाद से ही बिहार कांग्रेस के भीतर असंतोष और धमाके की तरह बढ़ती गुटबाजी ने हाईकमान को चिंतित कर दिया है। कई वरिष्ठ नेताओं ने हार के कारणों को लेकर खुलकर बयान दिए हैं, वहीं कुछ नेताओं ने संगठनात्मक निर्णयों और टिकट बंटवारे को भी सवालों के घेरे में रखा है। यह असंतोष ना सिर्फ स्थानीय स्तर पर बल्कि दिल्ली तक पहुंच चुका है, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को काबू में करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए इस अहम बैठक की जरूरत महसूस की।

चुनाव बाद उठे असंतोष और गुटबाजी ने बढ़ाई चिंता
चुनाव बाद उठे असंतोष और गुटबाजी ने बढ़ाई चिंता

माना जा रहा है कि बैठक में कई नेता हार के पीछे स्थानीय मुद्दों, कमजोर संगठन, गुटबाजी, टिकट चयन, प्रचार-प्रसार की रणनीति और गठबंधन साझेदारों के साथ तालमेल की कमी जैसे पहलुओं को खुलकर उठाने वाले हैं।

61 प्रत्याशियों से मांगी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने बिहार चुनाव में उतारे गए 61 प्रत्याशियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रत्येक उम्मीदवार से पूछा जाएगा कि उनकी सीट पर हार के पीछे क्या कारण रहे, स्थानीय स्तर पर क्या चुनौतियाँ थीं, संसाधनों की उपलब्धता कितनी थी, और संगठनात्मक मदद किस तरह मिली।

इन रिपोर्टों को संकलित करने के बाद पार्टी एक समग्र रणनीति तैयार करेगी, जिसका उद्देश्य आने वाले चुनावों में संगठन को मजबूत करना और स्थानीय स्तर पर जनता के बीच कांग्रेस की पकड़ को बढ़ाना होगा।

पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन या सख्त कार्रवाई संभव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक सिर्फ एक औपचारिकता नहीं होगी। बिहार कांग्रेस की लगातार कमजोर होती स्थिति को देखते हुए पार्टी नेतृत्व बड़ा कदम उठा सकता है। इसमें संभावित रूप से संगठनात्मक बदलाव, प्रदेश अध्यक्ष स्तर पर फेरबदल, कमजोर जिलाध्यक्षों पर कार्रवाई और नए चेहरों को नेतृत्व देने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि कांग्रेस हाईकमान अब बिहार में एक मजबूत और आक्रामक विपक्ष की तरह खड़ा होने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाएगा, ताकि पार्टी को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले जमीन स्तर पर मजबूत किया जा सके।

गठबंधन राजनीति पर भी होगी चर्चा

बैठक में बिहार में महागठबंधन (RJD-Congress) के पिछले कुछ वर्षों से चले आ रहे समीकरणों की भी समीक्षा संभव है। समय-समय पर दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे, अभियान प्रबंधन और जनाधार में हिस्सेदारी को लेकर उठे विवाद भी इस समीक्षा के एजेंडे का हिस्सा होंगे।

कुछ नेताओं का मानना है कि गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका कमजोर होती गई है, जबकि कुछ का कहना है कि पार्टी के पास संगठन का मजबूत ढांचा नहीं होने से वह गठबंधन में अपनी ताकत नहीं दिखा सकी। इन मुद्दों पर खुलकर चर्चा होने की संभावना है।

आगे की राह: संगठन को जमीन से जोड़ने पर जोर

कांग्रेस भविष्य की रणनीति में सबसे ज्यादा फोकस संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण पर करेगी। यह माना जा रहा है कि सीट-वार, जिला-वार और ब्लॉक-वार कमेटियों को फिर से सक्रिय करने की योजना तैयार की जाएगी। साथ ही युवा कांग्रेस और NSUI को चुनावी मोर्चे पर ज्यादा जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है।

कुल मिलाकर, 27 नवंबर की यह बैठक बिहार कांग्रेस के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है। यह बैठक यह तय करेगी कि कांग्रेस आने वाले दिनों में बिहार में अपनी राजनीतिक वापसी कैसे और किस रणनीति के साथ करेगी। चुनाव के बाद की इस समीक्षा से यह स्पष्ट है कि पार्टी अब हार को हल्के में लेने के मूड में नहीं है और आगामी वर्षों में अपनी राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने के लिए गंभीरता से तैयारी कर रही है।

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