PM मोदी ने याद दिलाया: वंदे मातरम् बना था आजादी की ताकत !

लोकसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन संसद भवन ऐतिहासिक माहौल का साक्षी बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में प्रवेश करते ही ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष चर्चा की शुरुआत की। यह अवसर केवल एक गीत की वर्षगांठ भर नहीं था, बल्कि उस संकल्प, चेतना और राष्ट्रवादी भावना का उत्सव था जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की नींव को मजबूत किया था। पीएम मोदी ने सदन के सामने खड़े होकर वह इतिहास दोहराया जिसने करोड़ों भारतीयों को आज़ादी की लड़ाई में कूदने की प्रेरणा दी थी।

PM मोदी ने याद दिलाया: वंदे मातरम् बना था आजादी की ताकत !
PM मोदी ने याद दिलाया: वंदे मातरम् बना था आजादी की ताकत !

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हम सभी का सौभाग्य है कि आज हम उस मंत्र— उस जयघोष— का स्मरण कर रहे हैं, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष में देशवासियों को अदम्य ऊर्जा और संबल दिया। “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं था, यह आंदोलन की आत्मा था,” पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा। उनके अनुसार, यह मंत्र स्वतंत्रता की उस लौ को प्रज्वलित करने वाला था, जिसने लाखों देशभक्तों के अंदर देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने की शक्ति भर दी थी।

उन्होंने कहा कि “जिस मंत्र ने देश की आज़ादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी, प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उसका पुण्य स्मरण करना हम सबके लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।” पीएम मोदी ने कहा कि आज जब हम इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं, यह केवल इतिहास पढ़ने का क्षण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इस महान विरासत से परिचित कराने का समय है।

वंदे मातरम्: आंदोलन की धड़कन

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वंदे मातरम् ने कैसे स्वतंत्रता आंदोलन के हर चरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजी शासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद लोग इसे गुनगुनाते, जप करते और एक-दूसरे को प्रेरित करते थे। यह गीत भय नहीं, बल्कि साहस का प्रतीक था। उन्होंने याद दिलाया कि देश के अनेक क्रांतिकारी, सत्याग्रही और युवा कार्यकर्ता इसी जयघोष के साथ आंदोलन में कूद पड़े थे।

पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् ने भारतीय समाज के हर वर्ग— गांव, शहर, किसान, मजदूर, विद्यार्थियों और महिलाओं— को एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट कर दिया था। यह गीत भारत माता के प्रति प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति था, जिसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक नई चेतना और साहस पैदा किया।

संसद के लिए ऐतिहासिक अवसर

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संसद के लिए भी गौरव का क्षण है कि वह इस ऐतिहासिक वर्षगांठ पर एक सकारात्मक, प्रेरक और राष्ट्रभक्ति से भरी चर्चा का हिस्सा बन रही है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे भावना और समझदारी के साथ वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा और उसके राष्ट्रीय महत्व पर अपने विचार रखें।

संसद के लिए ऐतिहासिक अवसर
संसद के लिए ऐतिहासिक अवसर

पीएम मोदी ने कहा कि यह समय अतीत को याद करने के साथ-साथ उन आदर्शों को दोहराने का भी है, जिन पर देश की नींव रखी गई थी। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं को पुनः जागृत करने का आह्वान है।

अभी भी प्रासंगिक है वंदे मातरम् की भावना

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, और ऐसे समय में वंदे मातरम् की भावना हमें एकजुट रहने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रयासरत रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जैसे इस मंत्र ने स्वतंत्रता संघर्ष में ऊर्जा दी, आज भी वह राष्ट्रहित, स्वाभिमान और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान कर सकता है।

अंत में पीएम मोदी ने कहा कि “वंदे मातरम् हमारे लिए केवल इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा भी है।” उन्होंने सभी सदस्यों और देशवासियों को इस ऐतिहासिक वर्षगांठ की बधाई देते हुए संकल्प दोहराया कि भारत को विश्व के सर्वोच्च शिखर तक ले जाने में यह मंत्र सदैव मन में गूंजता रहेगा।

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