पटना में दमघोंटू हवा: राज्यभर में प्रदूषण बढ़ा !

 बिहार में हवा की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है. पटना सहित कई जिलों में AQI 200 पार पहुंच गया है, जिससे सांस और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.

बिहार में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात हर दिन और चिंताजनक होते दिख रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में मौसम में आई स्थिरता, बढ़ती ठंड और धूल-कणों के संचय ने वायु गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिस तरह दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने आम जनजीवन को कठिन बना रखा है, उसी तरह अब बिहार के कई प्रमुख शहर भी प्रदूषण की गिरफ्त में आ रहे हैं। सोमवार (8 दिसंबर) सुबह 8 बजे जारी किए गए प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि बिहार की हवा अब ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी की ओर बढ़ रही है।

पटना में दमघोंटू हवा: राज्यभर में प्रदूषण बढ़ा !
पटना में दमघोंटू हवा: राज्यभर में प्रदूषण बढ़ा !

प्रदूषण विभाग के अनुसार, राज्य की राजधानी पटना ने एक बार फिर सबसे अधिक AQI दर्ज किया है, जिसने लोगों की चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। कई क्षेत्रों में AQI 200 के पार पहुंच गया, जो संकेत देता है कि हवा में प्रदूषक कणों का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।

पटना में हालात सबसे बिगड़े

पटना में हालात सबसे बिगड़े
पटना में हालात सबसे बिगड़े

राजधानी पटना में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सुबह से ही खतरनाक स्थिति की ओर इशारा कर रहा था। शहर के कुछ इलाकों में AQI 220–250 के बीच दर्ज किया गया, जो बमुश्किल ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी के बीच आता है। यह स्तर उन लोगों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है जो पहले से सांस, अस्थमा, दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे हैं।
वायु प्रदूषण विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम में ठंड बढ़ने के साथ हवा की गति कम हो जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में ही अटके रह जाते हैं और AQI बढ़ जाता है। यही कारण है कि सुबह और रात के समय हवा अधिक जहरीली महसूस होती है।

कई जिलों में AQI 200 के पार

सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और भोजपुर जैसे जिलों में भी प्रदूषण का स्तर 200 के पार चला गया है। इन शहरों में सड़कों पर धूल का स्तर, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, तापमान में गिरावट और ग्रामीण क्षेत्रों में पराली या कचरा जलाने जैसी गतिविधियाँ प्रदूषण को बढ़ा रही हैं।
गया और मुजफ्फरपुर में सुबह की धुंध में प्रदूषक कणों के मिलने से दृश्यता भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों को सड़क पर चलने और सफर करने में परेशानी हुई।

प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी तरह AQI 200–300 के बीच बना रहा, तो आम लोगों को खांसी, सांस फूलना, गले में जलन, आंखों में खुजली और सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

लोगों में बढ़ रही है चिंता

राज्य के कई हिस्सों में लोग प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर चिंतित हैं। सुबह की सैर करने वाले लोगों ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सांस लेने में भारीपन और धुंध जैसी परत महसूस हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका असर दिखने लगा है।
पटना के कुछ अस्पतालों में सांस और फेफड़ों से जुड़ी शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में पिछले एक सप्ताह में 15–20% तक बढ़ोतरी हुई है।

सरकार और विभाग अलर्ट मोड पर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बढ़ते AQI को लेकर प्रशासन को अलर्ट किया है। विभाग ने सलाह जारी की है कि—

  • लोग अनावश्यक बाहर निकलने से बचें
  • बाहर निकलते समय मास्क पहनें
  • घर में एयर प्यूरीफायर या पौधों का उपयोग बढ़ाएं
  • बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषण वाली जगहों से दूर रखें
  • सुबह-शाम भारी व्यायाम न करें

इसके अलावा, पटना नगर निगम और अन्य स्थानीय निकायों को सड़क पर पानी का छिड़काव बढ़ाने, कचरा जलाने पर रोक और वाहनों की निगरानी को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

आने वाले दिनों में क्या होगा?

मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिनों तक तापमान में और गिरावट की संभावना है, जिससे प्रदूषण और बढ़ सकता है। हवा की गति धीमी रहने से यह जहरीली परत वातावरण में जमा रह सकती है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई या ठंड में बदलाव नहीं आया, तो वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

कुल मिलाकर, बिहार के कई शहर वर्तमान में प्रदूषण के गंभीर दौर से गुजर रहे हैं और आने वाले दिनों में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति और अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

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