IndiGo ने जिन नवंबर–दिसंबर उड़ानों को बाद में बड़े पैमाने पर रद्द किया, उन्हीं तारीखों के लिए पहले भारी डिस्काउंट में टिकटें बेचीं. जानें कैसे FDTL नियम बदलने से Indigo का नेटवर्क ढह गया.
देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन IndiGo एक बड़े विवाद के केंद्र में है। नवंबर और दिसंबर 2025 में अचानक बड़ी संख्या में फ्लाइट रद्द होने के बाद अब इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू सामने आया है—एयरलाइन ने उन्हीं महीनों की उड़ानों के लिए सेल के दौरान बड़े पैमाने पर टिकट बेचे, जबकि उसे पहले से पता था कि इस दौरान उसके ऑपरेशनल सिस्टम पर भारी दबाव आने वाला है। नतीजा यह हुआ कि त्योहार और छुट्टियों के सीज़न में लाखों यात्रियों की यात्रा योजनाएं ध्वस्त हो गईं।

सेल में टिकटें बेचीं… फिर उड़ानें रद्द कीं
IndiGo ने अक्टूबर से नवंबर के बीच कई धमाकेदार ऑफ़र लॉन्च किए थे—Grand Runaway Fest, Getaway Sale, Black Friday Sale—जिनमें लाखों लोगों ने अत्यधिक डिस्काउंट पर टिकटें बुक कीं। इसमें नवंबर और दिसंबर की यात्रा तारीखें सबसे ज्यादा बिकीं, क्योंकि यह पीक ट्रैवल सीजन होता है।

लेकिन अब खुलासा हुआ है कि ठीक इन्हीं तारीखों में एयरलाइन ने हजारों उड़ानें चुपचाप रद्द कर दीं। कई यात्रियों को तो यात्रा से कुछ घंटे पहले ही कैंसिलेशन का नोटिफिकेशन मिला। रिफंड तो दिया गया, लेकिन यात्रा योजनाएं, होटल बुकिंग, इवेंट प्लान और विदेश यात्राओं के कनेक्टिंग फ्लाइट्स सब प्रभावित हो गए।
यात्रियों ने इसे “सेल के नाम पर धोखा”, “ब्लैक फ्राइडे स्कैम” और “कृत्रिम बुकिंग ब्लास्ट” कहा है।
IndiGo को महीनों पहले पता था संकट आने वाला है
1 नवंबर से भारत में नए FDTL (Flight Duty Time Limit) नियम लागू होने थे। इन नियमों के तहत:
- पायलटों की ड्यूटी घंटे कम होने थे
- विश्राम अवधि बढ़नी थी
- क्रू शेड्यूलिंग और अधिक जटिल होने वाली थी
इसका सीधा मतलब था कि एयरलाइन को समय पर उड़ान चलाने के लिए अधिक पायलटों और अधिक क्रू की जरूरत पड़ने वाली थी। यह जानकारी DGCA ने कंपनियों को कई महीने पहले दे दी थी।
यानी IndiGo को पता था कि नवंबर–दिसंबर में:
- ऑपरेशन पर अधिक दबाव होगा
- उड़ानें प्रभावित होंगी
- कर्मचारियों की शिफ़्ट मैनेजमेंट मुश्किल होगी
इसके बावजूद एयरलाइन ने न तो अतिरिक्त क्रू भर्ती किया, न शेड्यूलिंग ऑप्टिमाइज़ की, और न ही पीक डेट्स की बुकिंग सीमित की।
इसके उलट, कंपनी ने इन महीनों की टिकटें भारी डिस्काउंट में बेचकर बुकिंग संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दी।
क्या यह ओवर-सेलिंग की रणनीति थी?
एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइन ने:
- संभावित समस्या जानते हुए भी
- सीटें भरने के लिए आक्रामक सेल चलाई
- बाद में ऑपरेशनल संकट का हवाला देकर हजारों उड़ानें रद्द कर दीं
इसे कई विशेषज्ञ ओवर-सेलिंग या कृत्रिम डिमांड जनरेशन की रणनीति बताते हैं, जिसमें एयरलाइन पहले पैसे इकट्ठा कर लेती है और बाद में उड़ानें घटा देती है।
यात्रियों की नाराज़गी चरम पर
सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने शिकायतें पोस्ट कीं:
- “योजनाएं बर्बाद हो गईं—IndiGo भरोसे लायक नहीं。”
- “पहले सस्ते टिकट बेचो, बाद में उड़ानें गायब कर दो—यह फ्रॉड है।”
- “हमें विश्वास दिलाया गया कि उड़ानें चलेंगी, लेकिन अंतिम समय में रद्द कर दी गईं।”
कई यात्रियों ने उपभोक्ता अदालत में जाने की चेतावनी भी दी है।
IndiGo की सफाई—‘ऑपरेशनल चुनौतियां’
कंपनी का कहना है कि:
- नए नियमों के चलते पायलट उपलब्धता प्रभावित हुई
- मौसम और एयर ट्रैफिक का दबाव बढ़ा
- इसे देखते हुए कुछ उड़ानें कम करनी पड़ीं
लेकिन सवाल है कि अगर यह सब पहले से पता था तो सेल में लाखों टिकटें क्यों बेची गईं?
सरकार की निगरानी बढ़ी, DGCA की जांच की मांग
हजारों फ्लाइट रद्द होने के बाद:
- DGCA ने एयरलाइन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है
- उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने जांच की मांग उठाई है
- कई विपक्षी नेताओं ने इसे “एयरलाइन उद्योग में ग्राहकों के साथ धोखा” बताया है
नतीजा—IndiGo की विश्वसनीयता पर संकट
IndiGo लंबे समय से अपनी समयपालन (On-Time Performance) और बड़े नेटवर्क के कारण भरोसेमंद एयरलाइन मानी जाती थी।
लेकिन इस घटना ने कंपनी की छवि पर गहरा असर डाला है।
यात्रियों का कहना है कि यह:
- खराब प्लानिंग का नतीजा है
- नियमों की अनदेखी है
- और ग्राहकों के साथ अनुचित व्यवहार है
अभी DGCA की रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई का इंतजार है, लेकिन इतना निश्चित है कि यह मामला आने वाले समय में एयरलाइन उद्योग के लिए एक ‘चेतावनी’ की तरह दर्ज होने वाला है।