नीतीश मिश्रा ने कहा है कि कोई भी जनप्रतिनिधि एक साथ वेतन और पेंशन ले ही नहीं सकता, यह पूरी तरह असंभव है. मेरी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है.
आरटीआई के जरिए सामने आए एक खुलासे ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि राज्य और केंद्र सरकार के कई नेता ऐसी स्थिति में हैं, जहां वे वेतन और पेंशन दोनों एक साथ ले रहे हैं। इस सूची में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और भारतीय जनता पार्टी के विधायक नीतीश मिश्रा का नाम भी शामिल बताया गया। जहां उपेंद्र कुशवाहा पहले ही सफाई दे चुके हैं, वहीं अब बीजेपी विधायक नीतीश मिश्रा ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने बुधवार (10 दिसंबर 2025) को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया।

नीतीश मिश्रा ने लिखा कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा जो जानकारी प्रसारित की जा रही है, वह पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। उन्होंने साफ कहा कि जिस आरटीआई के आधार पर ये खबर चल रही है, उसमें अधूरी जानकारी दी गई है, और उसी को तोड़-मरोड़कर लोगों के बीच गलत धारणा पैदा की जा रही है। उनके अनुसार, यह दावा कि वे वर्तमान में पूर्व विधायक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, पूरी तरह असत्य है।
अपने पोस्ट में उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह पूरी तरह भ्रामक और अधूरी जानकारी पर आधारित है। मैंने स्वयं इस मामले में वरीय कोषागार पदाधिकारी से विस्तृत जानकारी मांगी थी, ताकि इस भ्रम को दूर किया जा सके।” मिश्रा लिखते हैं कि उन्हें 8 दिसंबर 2025 को कोषागार से जो जानकारी प्राप्त हुई, उसमें साफ-साफ बताया गया है कि उन्हें सिर्फ 22 सितंबर 2015 से 8 नवंबर 2015 तक पूर्व विधायक पेंशन मिली थी। यह अवधि डेढ़ माह से भी कम है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय वे विधायक नहीं थे।
नीतीश मिश्रा का कहना है कि पेंशन भुगतान 8 नवंबर 2015 के बाद तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया था और तब से लेकर आज तक उन्हें किसी भी प्रकार की पेंशन राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि आरटीआई के आधार पर जो भी दावे किए जा रहे हैं, वे वास्तविक स्थिति से बिल्कुल मेल नहीं खाते। मिश्रा ने यह भी कहा कि सत्य को सामने लाने के लिए उन्होंने सभी दस्तावेज स्वयं प्राप्त किए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
उन्होंने मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की कि आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली खबरें न चलाई जाएं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में तथ्यात्मक जानकारी की पुष्टि करना बेहद जरूरी है, क्योंकि राजनीतिक माहौल में फैलाई गई गलत सूचनाएं बड़े विवाद और गलतफहमियां पैदा कर सकती हैं।
यह विवाद तब बढ़ा जब आरटीआई से खुलासा हुआ कि कुछ नेता एक साथ दो तरह के भुगतान ले रहे हैं—एक अपने वर्तमान पद का वेतन और दूसरा पूर्व पद का पेंशन लाभ। हालांकि कई नेता इस सूची में अपना नाम देखकर आश्चर्यचकित हुए और तत्काल सफाई देने लगे। उपेंद्र कुशवाहा ने पहले ही इस पर अपना पक्ष रखा था और बताया था कि वे किसी तरह की दोहरी वित्तीय लाभ नहीं ले रहे हैं। अब नीतीश मिश्रा ने भी इस विषय पर स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करने की कोशिश की है।
पेंशन और वेतन को लेकर इस तरह की बहसें पहले भी होती रही हैं। कई बार पेंशन रिकॉर्ड्स अपडेट न होने के कारण गलत आंकड़े सामने आ जाते हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले संबंधित विभाग से पूरी जानकारी लेना आवश्यक होता है। मिश्रा के अनुसार, इसी कारण उन्होंने वरीय कोषागार अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, और उसी के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह बयान जारी किया।
विवाद भले अभी शांत न हुआ हो, लेकिन नीतीश मिश्रा की यह सफाई निश्चित रूप से इस मुद्दे पर चल रही गलतफहमी को दूर करने का प्रयास है। अब देखना यह होगा कि अन्य नाम सामने आने पर कितने नेता अपनी स्थिति साफ करते हैं और यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है।