“छूट हुई खत्म! यूपी में सरकारी क्वार्टरों में जल्द लगेंगे मीटर”

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों को भी अब पूरा बिल भरना होगा, विद्युत कर्मियों को मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई है. यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन ने मीटर लगाने के निर्देश दिये हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब राज्य में बिजली कर्मियों को किसी भी प्रकार की रियायत या छूट नहीं मिलेगी और उन्हें आम उपभोक्ताओं की तरह पूरा बिजली बिल भरना होगा। यह निर्देश यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने केस्को मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

"छूट हुई खत्म! यूपी में सरकारी क्वार्टरों में जल्द लगेंगे मीटर"
“छूट हुई खत्म! यूपी में सरकारी क्वार्टरों में जल्द लगेंगे मीटर”

यह कदम लंबे समय से चली आ रही उस व्यवस्था में बड़ा बदलाव है, जिसके अंतर्गत बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को मीटर न लगाने या रियायती दरों पर बिजली देने जैसी सुविधाएं मिलती थीं। सरकार का मानना है कि पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय कर्मचारियों को भी नियमों के अंतर्गत लाना आवश्यक है।

समीक्षा बैठक में सख्त निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को केस्को मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में पावर कॉर्पोरेशन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी बैठक के दौरान चेयरमैन डॉ. गोयल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी विभागीय कर्मचारी—चाहे वह लाइनमैन हो, जूनियर इंजीनियर या वरिष्ठ इंजीनियर—किसी को भी मीटर न लगाने की विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी विभागीय कर्मियों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं की तरह वे भी वास्तविक उपभोग के आधार पर बिल भर सकें। यह कदम बिजली विभाग में पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एलएमवी-10 श्रेणी के तहत बिजली की आपूर्ति

डॉ. गोयल ने निर्देश दिया कि सभी कर्मचारियों को एलएमवी-10 (LMV-10) श्रेणी के अंतर्गत घरेलू बिजली दरों पर बिजली दी जाए। यह वही श्रेणी है जिसके तहत आम घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली मिलती है। पहले विभागीय कर्मचारियों को अक्सर कम दरों पर या रियायत के साथ बिजली उपलब्ध होती थी। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों के बिजली बिल में स्पष्ट बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए और कर्मचारियों को किसी भी हालत में छूट या विशेषाधिकार न दिया जाए। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विभागीय स्तर पर कई बार मीटर न लगने या कम रीडिंग दर्ज होने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर क्यों जरूरी?

यूपी सरकार राज्य भर में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को तेजी से लागू कर रही है। इन मीटरों से बिलिंग सिस्टम पारदर्शी होता है, बकाया बिलों पर अंकुश लगता है और लाइन लॉस जैसे मुद्दों में कमी आती है। प्रीपेड मीटर लगाने के बाद उपभोक्ताओं को पहले रिचार्ज करना होगा और बिजली उसी आधार पर खर्च होगी।

सरकार का मानना है कि जब आम जनता के घरों में स्मार्ट मीटर लग रहे हैं तो बिजली विभाग के कर्मचारी इससे बाहर क्यों रहें? इसलिए इस प्रक्रिया को कर्मचारियों के घरों में भी अनिवार्य किया जा रहा है।

कर्मचारियों में नाराज़गी, विभाग अपने स्टैंड पर कायम

हालांकि इस फैसले को लेकर बिजली कर्मचारियों में नाराज़गी की चर्चा भी है। विभागीय यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों को हमेशा से कुछ सुविधाएँ दी जाती रही हैं और नई व्यवस्था से उनके खर्चों में बड़ा इजाफा होगा। लेकिन प्रबंधन का तर्क है कि पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव ज़रूरी है।

डॉ. गोयल का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों के लिए नहीं बल्कि बेहतर बिजली प्रबंधन के लिए है। उन्होंने कहा कि जब सरकारी विभागों और निजी उपभोक्ताओं को मीटर के दायरे में रखा जा रहा है तो कर्मचारियों को इससे बाहर रखना गलत होगा।

अगले कुछ हफ्तों में शुरू होगी प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम अगले कुछ हफ्तों में शुरू हो सकता है। बिजली निगम जल्द ही इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा। उम्मीद है कि प्रारंभिक रूप से जिला स्तर पर सूची बनाकर कर्मचारियों के घरों की पहचान की जाएगी और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से मीटर लगाए जाएंगे।

निष्कर्ष

यूपी पावर कॉर्पोरेशन का यह फैसला विभागीय कर्मचारियों के लिए भले ही असुविधाजनक हो, लेकिन बिजली प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में इसे बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब कर्मचारी भी आम उपभोक्ताओं की तरह बिजली बिल भरेंगे और स्मार्ट मीटर प्रणाली से बिजली खपत का सही आकलन संभव होगा।

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