पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का शनिवार को महाराष्ट्र के लातूर जिले में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार में ओम बिरला सहित कई लोग शामिल रहे.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का शनिवार को महाराष्ट्र के लातूर जिले में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। लातूर में आयोजित अंतिम संस्कार में विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं ने शिरकत कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और कर्नाटक सरकार के मंत्री ईश्वर खंड्रे सहित कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

शिवराज पाटिल का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उनके पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सम्मानपूर्वक ओढ़ाया गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे इलाके में शोक और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
पाटिल लिंगायत समुदाय के एक प्रमुख और सम्मानित सदस्य थे। लिंगायत परंपरा के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार दाह संस्कार की बजाय विशेष धार्मिक विधि के तहत किया गया। उन्हें लातूर से करीब छह किलोमीटर दूर वरवंती गांव में उनके खेत में दफनाया गया। इस दौरान उनका पार्थिव शरीर ध्यान की मुद्रा में बैठी हुई स्थिति में रखा गया, जो लिंगायत परंपरा का अहम हिस्सा है। इस अनुष्ठान के पीछे यह मान्यता है कि मृतक की आत्मा तुरंत शिव में विलीन हो जाती है और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाती है। इसी कारण इस परंपरा में दाह संस्कार की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
लिंगायत समुदाय के धार्मिक गुरुओं और अनुयायियों की मौजूदगी में पूरे विधि-विधान से यह अनुष्ठान संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और प्रार्थनाओं के बीच शिवराज पाटिल को अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर समुदाय के लोगों ने उनके सामाजिक और राजनीतिक योगदान को याद करते हुए उन्हें एक दूरदर्शी नेता बताया, जिन्होंने हमेशा समाज और देश के हित को प्राथमिकता दी।

शिवराज पाटिल का राजनीतिक जीवन दशकों तक फैला रहा। उन्होंने केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली और एक अनुभवी तथा संतुलित नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। कांग्रेस पार्टी में उनका कद एक वरिष्ठ मार्गदर्शक नेता का था। पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ता उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी पार्टी और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शिवराज पाटिल का निधन कांग्रेस और देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि पाटिल ने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, सादगी और संवैधानिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी। वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वह एक अनुभवी सांसद और कुशल प्रशासक थे, जिनका सम्मान सभी दलों में किया जाता था।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और अन्य नेताओं ने भी पाटिल के साथ जुड़े अपने अनुभव साझा किए और उन्हें एक सौम्य, विचारशील और सबको साथ लेकर चलने वाला नेता बताया। अंतिम संस्कार के बाद नेताओं और परिवार के सदस्यों ने कुछ समय तक मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
शिवराज पाटिल के निधन के साथ ही देश ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिन्होंने राजनीति को सेवा और सिद्धांतों से जोड़कर देखा। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
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