शिंदे की CM वापसी पर बयान, शिवसेना नेता ने बढ़ाई हलचल !

महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास अब कोई कार्यकर्ता नहीं बचा है, वे लोगों से नहीं मिलते और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं का समर्थन करते हैं.

महाराष्ट्र में आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव नजदीक आते ही सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राज्य सरकार में मंत्री और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर तीखा हमला बोला है। सोमवार, 15 दिसंबर को पत्रकारों से बातचीत में शिरसाट ने दावा किया कि आगामी बीएमसी चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) की हार तय है।

शिंदे की CM वापसी पर बयान, शिवसेना नेता ने बढ़ाई हलचल !
शिंदे की CM वापसी पर बयान, शिवसेना नेता ने बढ़ाई हलचल !

संजय शिरसाट ने कहा कि उद्धव ठाकरे की पार्टी अब जमीन से कट चुकी है और उसके पास न तो पहले जैसा संगठन बचा है और न ही कार्यकर्ताओं की वह ताकत, जिसके दम पर कभी शिवसेना मुंबई की राजनीति पर हावी रही थी। उन्होंने कहा कि जनता से सीधा संवाद और जुड़ाव किसी भी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत होती है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) इस मोर्चे पर पूरी तरह विफल हो चुकी है। शिरसाट के मुताबिक, मुंबई में होने वाला यह चुनाव शिवसेना (यूबीटी) के लिए “अस्तित्व की आखिरी लड़ाई” साबित होगा।

शिरसाट ने आगे दावा किया कि एक समय जिस शिवसेना को मुंबई की राजनीति की रीढ़ माना जाता था, आज वही पार्टी अंदरूनी कलह और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी न तो कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चल पा रही है और न ही आम लोगों की समस्याओं से खुद को जोड़ पा रही है। इसी कारण बीएमसी चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ेगा।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय शिरसाट ने सत्तारूढ़ महायुति को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर महायुति में टिकटों की मांग काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि हर दल और हर नेता चाहता है कि उसे ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलें, जिससे असंतोष की स्थिति बन सकती है। शिरसाट ने यह भी माना कि टिकट न मिलने की स्थिति में कुछ असंतुष्ट नेताओं के “पाला बदलने” की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महायुति का नेतृत्व इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम है और समय रहते सभी मुद्दों का समाधान निकाल लिया जाएगा। शिरसाट के मुताबिक, गठबंधन की मजबूती ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और यही वजह है कि विपक्ष लगातार महायुति को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा है।

उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला बोलते हुए संजय शिरसाट ने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख का व्यवहार पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह अहंकार भरा है। उन्होंने कहा, “उद्धव ठाकरे हर किसी से अहंकार से पेश आते हैं।” शिरसाट का दावा है कि इसी रवैये की वजह से पार्टी के कई पुराने नेता और कार्यकर्ता उनसे दूर हो गए और संगठन कमजोर होता चला गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी चुनाव को बेहद अहम माना जाता है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और बीएमसी देश की सबसे समृद्ध नगर निगमों में से एक है। दशकों तक शिवसेना का बीएमसी पर वर्चस्व रहा है, लेकिन पार्टी के विभाजन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव होगा, जिसमें उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना आमने-सामने होंगी। ऐसे में यह चुनाव दोनों गुटों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय शिरसाट का बयान केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि आगामी चुनाव के लिए माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा है। एक ओर शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना साबित करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर उद्धव ठाकरे अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बीएमसी चुनाव के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि मुंबई की राजनीति में किस शिवसेना का दबदबा कायम रहता है।

कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। संजय शिरसाट के बयान ने इस सियासी लड़ाई को और धार दे दी है। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवसेना (यूबीटी) इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और चुनावी मैदान में किस रणनीति के साथ उतरती है।

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