पप्पू यादव ने कहा कि कांग्रेस के मंच से कोई बात नहीं कही गई. उन्होंने कहा कि प्रदूषण और आतंकवादी हमलों जैसे मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है तो समझिए देश के प्रति सरकार गंभीर नहीं है.
कांग्रेस की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगे कथित विवादित नारों को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष जहां कांग्रेस पर मर्यादा तोड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जाने का आरोप लगा रहा है, वहीं विपक्ष इसे ध्यान भटकाने की राजनीति बता रहा है। इसी क्रम में अब बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव का तीखा बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक बहस को और धार दे दी है।

सोमवार (15 दिसंबर, 2025) को मीडिया से बातचीत करते हुए पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक भाषणों में विपक्षी नेताओं के लिए “गाय, जेवर, सांड” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। पप्पू यादव ने सवाल उठाते हुए कहा, “नीतीश कुमार के बारे में क्या-क्या कहा गया था? डीएनए से बड़ी गाली और क्या हो सकती है?” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेता इस तरह की भाषा का प्रयोग कर सकते हैं, तो फिर विपक्ष पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार उन्हें कैसे मिल सकता है।
पप्पू यादव ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस की रैली के मंच से प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया था। उनका दावा है कि अगर किसी कार्यकर्ता ने कहीं कोई नारा लगाया भी है, तो उसे संसद का मुद्दा बनाना गलत है। उन्होंने कहा, “किसी कार्यकर्ता ने कहीं कुछ कह दिया, तो क्या वह पूरे सदन को ठप करने का कारण बन सकता है? यह तो सिर्फ बहाना है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि संसद का शीतकालीन सत्र गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया जाता है, लेकिन सत्ता पक्ष जानबूझकर सदन नहीं चलने दे रहा। पप्पू यादव ने कहा, “देश में प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, आतंकी हमले हो रहे हैं, बेरोजगारी और महंगाई से जनता त्रस्त है, लेकिन इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही। अगर सरकार इन पर बात नहीं करना चाहती, तो साफ है कि वह देश के प्रति गंभीर नहीं है।”
सांसद पप्पू यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई आपत्तिजनक बयान देने का उनका या कांग्रेस का इरादा नहीं था। उन्होंने इसे लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि हर छोटी बात को तूल देकर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार असली सवालों से बचने के लिए इस तरह के विवादों को हवा दे रही है।
इस पूरे विवाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि पहले भी जब प्रधानमंत्री ने नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां की थीं, तब सत्ता पक्ष ने कभी इतनी नाराजगी नहीं दिखाई। उन्होंने सवाल किया कि अगर तब यह सब स्वीकार्य था, तो अब अचानक नैतिकता की बात क्यों की जा रही है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आगामी चुनावों की रणनीति भी छिपी हुई है। सत्ता पक्ष जहां विपक्ष को असंयमित और गैर-जिम्मेदार दिखाना चाहता है, वहीं विपक्ष इसे जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश बता रहा है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगे नारों का मामला अब सिर्फ एक रैली या बयान तक सीमित नहीं रह गया है। पप्पू यादव जैसे नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह विवाद संसद से लेकर सड़कों और सोशल मीडिया तक फैल चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मुद्दे पर सियासत और तेज होती है या फिर संसद में असल मुद्दों पर बहस का रास्ता निकलता है।
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