राजनीति और अध्यात्म का मेल, तेज प्रताप यादव का बड़ा फैसला !

तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी में “संत प्रकोष्ठ” का गठन किया है। इससे पहले उन्होंने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी।

जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी में एक अहम संगठनात्मक बदलाव करते हुए “संत प्रकोष्ठ” का गठन किया है। इस फैसले को पार्टी के विस्तार और समाज के एक विशेष वर्ग से संवाद मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पार्टी ने नवगठित संत प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर स्वामी श्री उमाकांत महाराज उर्फ उमाकांत नुनहैरा जी को मनोनीत किया है।

राजनीति और अध्यात्म का मेल, तेज प्रताप यादव का बड़ा फैसला !
राजनीति और अध्यात्म का मेल, तेज प्रताप यादव का बड़ा फैसला !

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संत प्रकोष्ठ का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करना है। साथ ही यह प्रकोष्ठ संतों, साधु-महात्माओं और धार्मिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित कर जनशक्ति जनता दल की नीतियों और विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेगा। तेज प्रताप यादव का मानना है कि संत समाज का सामाजिक जीवन में गहरा प्रभाव होता है और उनके अनुभवों व मार्गदर्शन से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

तेज प्रताप यादव ने संत प्रकोष्ठ के गठन को लेकर कहा कि राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज सेवा और लोककल्याण का जरिया होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों का समाज में सम्मानजनक स्थान है और वे वर्षों से लोगों को नैतिकता, सेवा और समरसता का संदेश देते आए हैं। ऐसे में पार्टी संगठन में संत प्रकोष्ठ का गठन एक वैचारिक पहल है, जिसका उद्देश्य राजनीति और समाज सेवा के बीच की दूरी को कम करना है।

स्वामी श्री उमाकांत महाराज उर्फ उमाकांत नुनहैरा जी को संत प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी नेताओं और समर्थकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, स्वामी उमाकांत महाराज लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुयायी भी हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संत प्रकोष्ठ न केवल संगठन को मजबूती देगा, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी प्रभावी भूमिका निभाएगा।

जनशक्ति जनता दल का कहना है कि संत प्रकोष्ठ राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहेगा। इसके तहत संत समाज से जुड़े कार्यक्रम, सामाजिक सम्मेलन, धार्मिक-सांस्कृतिक संवाद और जनकल्याण से जुड़े अभियानों को आगे बढ़ाया जाएगा। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे समाज के उन वर्गों तक भी पहुंच बनाई जा सकेगी, जो अब तक सीधे तौर पर राजनीति से दूरी बनाए हुए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तेज प्रताप यादव का यह कदम सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देता है। बिहार समेत देश के कई हिस्सों में संत-महात्माओं का सामाजिक प्रभाव रहा है और चुनावी राजनीति में भी उनका अप्रत्यक्ष असर देखा जाता है। ऐसे में संत प्रकोष्ठ का गठन पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए जनशक्ति जनता दल अपने जनाधार को विस्तार देने की कोशिश कर रही है।

हालांकि विपक्ष इसे तेज प्रताप यादव का एक और “प्रयोग” बता रहा है। कुछ विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, ताकि धार्मिक और आध्यात्मिक वर्ग से जुड़ाव दिखाया जा सके। वहीं पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह पहल समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की सोच को दर्शाती है।

कुल मिलाकर, संत प्रकोष्ठ के गठन के साथ जनशक्ति जनता दल ने अपने संगठनात्मक ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वामी उमाकांत महाराज के नेतृत्व में यह प्रकोष्ठ किस तरह सक्रिय होता है और आने वाले समय में पार्टी की राजनीति और सामाजिक पहुंच पर इसका कितना असर पड़ता है।

Also Read :

‘सम्मान से खिलवाड़!’—हिजाब खींचने पर इकरा हसन का तीखा ट्वीट !