इस फैसले के समय सपा नेता और पूर्व मंत्री आजम खान जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए. कोर्ट के इस निर्णय के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर देखी गई.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खान को भड़काऊ भाषण से जुड़े एक और मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। एमपी–एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले में आजम खान को दोषमुक्त करार देते हुए उनके खिलाफ लगे सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब आजम खान पहले से ही कई मामलों में जेल में बंद हैं। अदालत के इस निर्णय को उनके लिए एक अहम राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 2 अप्रैल 2019 को दर्ज कराया गया था। शिकायतकर्ता थे आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता फैसल खान लाला। उनके अनुसार, 29 मार्च 2019 को रामपुर स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आजम खान ने कथित तौर पर तत्कालीन जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, एसडीएम सदर और सिटी मजिस्ट्रेट के खिलाफ विवादित और भड़काऊ बयान दिए थे।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आजम खान के बयान न केवल प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले थे, बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी पैदा हुई थी। इसी आधार पर शहर कोतवाली में मामला दर्ज किया गया और बाद में इसे एमपी–एमएलए कोर्ट में भेजा गया।
एमपी–एमएलए कोर्ट में चली सुनवाई
चूंकि आजम खान एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रह चुके हैं, इसलिए यह मामला एमपी–एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था। बीते कई वर्षों से इस केस की सुनवाई चल रही थी।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाहों और दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि आजम खान के बयान भड़काऊ थे और उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाया था। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि लगाए गए आरोप राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं और कथित भाषण को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि आजम खान ने कोई ऐसा बयान नहीं दिया, जो कानून की नजर में अपराध की श्रेणी में आए।
अदालत का फैसला
दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद अदालत ने आज अपना फैसला सुनाया। एमपी–एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सबूतों के अभाव और अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित न कर पाने के आधार पर आजम खान को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
फैसले के वक्त आजम खान जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत साक्ष्य भड़काऊ भाषण के आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
समर्थकों में खुशी, सियासी हलचल
कोर्ट के इस फैसले के बाद आजम खान के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसे “सत्य की जीत” बताते हुए कहा कि आजम खान को लगातार राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया, लेकिन अदालत ने न्याय किया।
सपा नेताओं का कहना है कि यह फैसला साबित करता है कि आजम खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों में सच्चाई कमजोर है और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया।
आगे की राह
हालांकि इस मामले में आजम खान को राहत मिली है, लेकिन उनके खिलाफ अभी भी कई अन्य मामले अलग-अलग अदालतों में लंबित हैं। ऐसे में यह फैसला उनके लिए पूरी तरह से कानूनी राहत तो नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से इसे एक बड़ी नैतिक और राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस फैसले का असर आने वाले समय में प्रदेश की सियासत पर भी पड़ सकता है, खासकर तब जब समाजवादी पार्टी इसे अपने पक्ष में एक मजबूत तर्क के रूप में पेश कर सकती है।
कुल मिलाकर, भड़काऊ भाषण के इस मामले में आजम खान को मिली राहत ने एक बार फिर यूपी की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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