VB-G RAM G बिल पर कांग्रेस का प्रहार, राहुल-प्रियंका ने उठाया प्रदूषण मुद्दा !

राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों को कमजोर कर रही है। ग्रामीण भारत-खासकर दलितों की ताकत को कमजोर कर रही है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए VB-G RAM G बिल को लेकर तीखा हमला बोला है। दोनों नेताओं ने इस बिल को ग्रामीण भारत, गरीबों और मनरेगा (MGNREGA) के खिलाफ बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि यह बिल विकास के नाम पर गांवों से रोजगार की गारंटी छीनने की कोशिश है और इससे करोड़ों गरीब परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

VB-G RAM G बिल पर कांग्रेस का प्रहार, राहुल-प्रियंका ने उठाया प्रदूषण मुद्दा !
VB-G RAM G बिल पर कांग्रेस का प्रहार, राहुल-प्रियंका ने उठाया प्रदूषण मुद्दा !

राहुल गांधी का हमला: ‘गांव विरोधी बिल’

लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि VB-G RAM G बिल को मनरेगा का ‘रीवैम्प’ बताना जनता को गुमराह करने जैसा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह बिल मनरेगा का सुधार नहीं, बल्कि उसे खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राहुल गांधी ने कहा,
“मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा को खत्म कर दिया। यह बिल गांव विरोधी है और इससे गरीबों का हक छीना जा रहा है।”

राहुल गांधी का हमला: ‘गांव विरोधी बिल’
राहुल गांधी का हमला: ‘गांव विरोधी बिल’

राहुल गांधी ने तर्क दिया कि मनरेगा केवल एक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह योजना मजदूरों को काम के साथ-साथ सम्मान, सुरक्षा और न्यूनतम आय की गारंटी देती है। VB-G RAM G बिल के जरिए सरकार रोजगार की इस गारंटी को कमजोर कर रही है और इसे ठेकेदार आधारित व निजी नियंत्रण वाली व्यवस्था में बदलने की कोशिश कर रही है।

‘रीवैम्प नहीं, रिप्लेसमेंट’

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार बार-बार कह रही है कि यह बिल मनरेगा को आधुनिक बनाने के लिए है, लेकिन हकीकत इसके उलट है।
“अगर यह रीवैम्प है, तो रोजगार की गारंटी कहां है? मजदूरी की सुरक्षा कहां है? गरीब की आवाज कहां है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल में स्थायी रोजगार, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

 प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती?

वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने VB-G RAM G बिल 2025 पर कहा कि संसद का सत्र इतने दिनों से चल रहा है लेकिन आप आखिरी दिनों में कुछ बिल लेकर आते हैं और उसके लिए कम समय रखते हैं। उसे हड़बड़ी में पास कराते हैं। ये अपने आप में संदिग्ध बात है। उन्होंने आगे कहा कि प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? चर्चा होनी चाहिए, सबकी बात सुननी चाहिए। 

प्रियंका गांधी ने बिल की गिनाई कमियां

प्रियंका गांधी ने कहा कि यह बिल गरीब लोगों के लिए बहुत नुकसानदायक होने वाला है, क्योंकि मूल MGNREGA योजना को जिस तरह से बनाया गया था – उसमें केंद्र सरकार 90% कोष देती थी, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी और बहुत गरीब लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा थी, जिन्हें रोज़गार मिलने में मुश्किल होती थी। 20 सालों से यह उन अच्छी योजनाओं में से एक रही है जो चली हैं और गरीब लोगों की मदद की है। खासकर उन लोगों की जिनके पास कुछ नहीं है। अब बिल के इस नए रूप में जब आप केंद्र से मिलने वाले कोष में इतनी कटौती करेंगे, तो राज्य सरकारें इसे वहन नहीं कर पाएंगी। इसका मतलब है कि यह स्कीम खत्म हो जाएगी और यह बहुत नुकसानदायक होगा। 

प्रियंका गांधी का सवाल: ‘गरीबों की आवाज क्यों दबाई जा रही?’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी VB-G RAM G बिल पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह बिल कागजों पर विकास दिखाता है, लेकिन जमीनी हकीकत में इससे गांवों को नुकसान होगा। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि सरकार ने इस बिल को लाने से पहले ग्रामीण मजदूरों, पंचायतों और राज्यों से कोई व्यापक सलाह-मशविरा क्यों नहीं किया

प्रियंका गांधी ने कहा,
“मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को संकट के समय सहारा दिया है। महामारी से लेकर बेरोजगारी तक, यह योजना गरीबों की ढाल बनी। अब सरकार इस ढाल को कमजोर क्यों करना चाहती है?”

कांग्रेस का आरोप: लोकतांत्रिक चर्चा से भाग रही सरकार

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस बिल पर खुली और विस्तृत चर्चा से बच रही है। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष जब प्रदूषण, ग्रामीण रोजगार और सामाजिक प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग करता है, तो सरकार सवालों से बचने की कोशिश करती है।

कांग्रेस का कहना है कि VB-G RAM G बिल में पर्यावरण और प्रदूषण जैसे अहम पहलुओं पर भी कोई ठोस चर्चा नहीं की गई है, जबकि ग्रामीण परियोजनाओं का सीधा असर प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ता है।

सरकार का पक्ष और आगे की राजनीति

हालांकि सरकार का दावा है कि VB-G RAM G बिल ग्रामीण विकास को तेज करेगा और नई योजनाओं के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा, लेकिन कांग्रेस इसे गरीब विरोधी और कॉरपोरेट हितों के अनुकूल बता रही है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मुद्दा आने वाले समय में बड़ा सियासी संघर्ष बन सकता है। मनरेगा जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव ग्रामीण वोट बैंक पर सीधा असर डाल सकता है।

कुल मिलाकर, राहुल और प्रियंका गांधी ने VB-G RAM G बिल को लेकर सरकार पर जो सवाल खड़े किए हैं, उन्होंने इस बहस को सिर्फ नीति नहीं, बल्कि गांव बनाम सरकार की लड़ाई बना दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का जवाब कैसे देती है और क्या इस बिल में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

बिल को सरकार ने जबरदस्ती पास करायाः राहुल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि VB–G RAM G MGNREGA का सुधार नहीं है। यह रोजगार के अधिकार की गारंटी को खत्म कर देने वाला बिल है। इस कानून को केंद्र सरकार कंट्रोल करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इस कानून को बिना किसी जांच-पड़ताल के संसद में ज़बरदस्ती पास कर दिया गया। बिल को स्थायी समिति को भेजने की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया गया। यह एक ऐसा कानून है जो ग्रामीण इलाके में रहने वाले करोड़ों मज़दूरों को प्रभावित करता है। इस कानून को सार्वजनिक बहस के बिना ज़बरदस्ती पास नहीं किया जाना चाहिए था।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी का लक्ष्य साफ हैं: मज़दूरों को कमज़ोर करना, ग्रामीण भारत, खासकर दलितों, OBC और आदिवासियों की ताकत को कमज़ोर करना, सत्ता को केंद्रीकृत करना। MGNREGA दुनिया के सबसे सफल गरीबी उन्मूलन और सशक्तिकरण कार्यक्रमों में से एक है। 

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