धर्मेंद्र यादव की मांग पर मुस्कुराए PM मोदी, हंसते-हंसते दिया जवाब !

संसद के शीतकालीन सत्र के समापन के बाद स्पीकर लोकसभा के साथ एक अनौपचारिक बैठक के दौरान सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने एक मांग रखी जिसका जवाब पीएम मोदी ने खुद दिया.

संसद के शीतकालीन सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद संसद भवन में एक दिलचस्प और हल्के-फुल्के माहौल वाला राजनीतिक क्षण देखने को मिला। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने चैंबर में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और संसद सदस्यों के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव, घोसी से सांसद राजीव राय सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक का उद्देश्य सत्र के दौरान हुए कार्यों, व्यवधानों और भविष्य की संसदीय प्रक्रिया पर अनौपचारिक चर्चा करना था।

धर्मेंद्र यादव की मांग पर मुस्कुराए PM मोदी, हंसते-हंसते दिया जवाब !
धर्मेंद्र यादव की मांग पर मुस्कुराए PM मोदी, हंसते-हंसते दिया जवाब !

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शीतकालीन सत्र की अवधि को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस बार संसद का सत्र बहुत छोटा रहा और इसे और लंबा होना चाहिए था, ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके। धर्मेंद्र यादव का कहना था कि जनहित से जुड़े कई विषय ऐसे हैं, जिन पर पर्याप्त समय नहीं मिल पाया और सांसदों को अपनी बात पूरी तरह रखने का मौका नहीं मिला।

धर्मेंद्र यादव की मांग पर मुस्कुराए PM मोदी, हंसते-हंसते दिया जवाब !
धर्मेंद्र यादव की मांग पर मुस्कुराए PM मोदी, हंसते-हंसते दिया जवाब !

धर्मेंद्र यादव की इस मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब माहौल को हल्का बना गया। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए और हंसते हुए कहा, “हां, नारा लगाने के लिए…।” प्रधानमंत्री के इस मजाकिया अंदाज पर वहां मौजूद कई नेताओं के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई। पीएम मोदी का यह बयान सत्र के दौरान हुए हंगामे और बार-बार नारेबाजी की ओर एक संकेत के तौर पर देखा गया।

हालांकि, इस बातचीत में प्रियंका गांधी वाड्रा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पीएम मोदी के बयान पर अपना पक्ष रखा। प्रियंका गांधी ने कहा, “मैं नारा भी देती हूं और सदन में भाषण भी।” उनका यह जवाब न सिर्फ आत्मविश्वास से भरा था, बल्कि यह संदेश भी देता था कि विपक्ष सिर्फ विरोध या नारेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सदन के भीतर गंभीर और मुद्दों पर आधारित चर्चा भी करता है।

प्रियंका गांधी का यह बयान बैठक में मौजूद नेताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत दिया कि विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज को सदन तक पहुंचाना है। सूत्रों के अनुसार, उनके इस जवाब के बाद बैठक का माहौल और भी सहज हो गया और बातचीत आगे बढ़ी।

इस बैठक को राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेता एक साथ मौजूद थे। शीतकालीन सत्र के दौरान लगातार हंगामे, कार्यवाही में बाधा और समय से पहले स्थगन को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। ऐसे में सत्र की अवधि को लेकर धर्मेंद्र यादव की टिप्पणी और उस पर पीएम मोदी व प्रियंका गांधी की प्रतिक्रियाएं, संसद की कार्यप्रणाली और मौजूदा राजनीतिक माहौल को दर्शाती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारतीय राजनीति में संवाद और असहमति दोनों के महत्व को रेखांकित करती है। एक ओर जहां प्रधानमंत्री ने हल्के अंदाज में विपक्ष पर तंज कसा, वहीं दूसरी ओर प्रियंका गांधी ने अपने जवाब से यह स्पष्ट किया कि विपक्ष सदन में अपनी भूमिका को लेकर गंभीर है। यह संवाद लोकतंत्र की उस परंपरा को भी दिखाता है, जहां तीखी राजनीति के बीच भी व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत और हल्के-फुल्के पल देखने को मिलते हैं।

कुल मिलाकर, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में हुई यह बैठक सिर्फ औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राजनीति के मानवीय और संवादात्मक पहलू भी सामने आए। धर्मेंद्र यादव की मांग, पीएम मोदी का मुस्कुराता हुआ जवाब और प्रियंका गांधी की सधी हुई प्रतिक्रिया—इन तीनों ने मिलकर इस बैठक को सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है।

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