योगी आदित्यनाथ ने कफ सिरप मामले में अखिलेश यादव पर आरोप लगाए थे। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया है। खास बात यह है कि इस दौरान दोनों नेताओं ने शायरी के जरिए अपनी बात कही।
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है, लेकिन इस बार भाषा कुछ अलग और अंदाज़ शायराना रहा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शायरी का जवाब उसी अंदाज़ में शायरी के जरिए दिया है। दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग कफ सिरप तस्करी मामले को लेकर शुरू हुई, जो अब शेरो-शायरी के रूप में राजनीतिक तकरार का रूप ले चुकी है।

दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सार्वजनिक मंच से शायरी का सहारा लेते हुए समाजवादी पार्टी और खास तौर पर अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। योगी आदित्यनाथ ने कहा था,
“यही कसूर मैं बार-बार करता रहा,
और आईना साफ करता रहा।”
मुख्यमंत्री की इस शायरी को राजनीतिक गलियारों में सपा पर तंज के तौर पर देखा गया। योगी ने संकेत दिया था कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों को उजागर कर रही है और इसके लिए विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। कफ सिरप तस्करी मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अखिलेश यादव पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की।
योगी आदित्यनाथ के इस शायराना हमले का जवाब अखिलेश यादव ने भी उसी अंदाज़ में दिया। सपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री की शायरी का पलटवार किया। अखिलेश यादव ने लिखा,
“जब खुद फंस जाओ तो दूसरे पर इल्ज़ाम लगाओ।
ये खेल हुआ पुराना, हुक्मरान कोई नई बात बताओ।”
इस शायरी के जरिए अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि जब खुद सरकार सवालों के घेरे में होती है, तो वह विपक्ष पर आरोप मढ़ने लगती है।
अखिलेश यादव की इस प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में शेरो-शायरी का दौर चर्चा का विषय बन गया है। समर्थकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेता अब सिर्फ आंकड़ों और भाषणों से नहीं, बल्कि साहित्यिक और प्रतीकात्मक भाषा के जरिए भी एक-दूसरे पर वार कर रहे हैं। अखिलेश के जवाब को योगी सरकार पर जवाबी हमला माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कफ सिरप तस्करी मामले में सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने की कोशिश की है।
कफ सिरप तस्करी का मामला पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में गरमाया हुआ है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और कानून-व्यवस्था तथा प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगा रहा है। वहीं, योगी सरकार का कहना है कि उसकी सख्ती की वजह से ऐसे मामलों का पर्दाफाश हो रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी शायरी के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की थी कि सरकार “आईना साफ” कर रही है।
अखिलेश यादव ने अपने जवाब से यह स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी इन आरोपों को राजनीतिक हथकंडा मानती है। उनकी शायरी में “हुक्मरान” शब्द का इस्तेमाल सीधे तौर पर सत्ता में बैठी सरकार की ओर इशारा करता है। साथ ही “कोई नई बात बताओ” कहकर उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि ऐसे आरोप पुराने हो चुके हैं और जनता अब ठोस जवाब चाहती है।
इस शायराना सियासी टकराव पर सोशल मीडिया पर भी जमकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे राजनीति में रचनात्मक अभिव्यक्ति का उदाहरण बता रहे हैं, तो कुछ इसे गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश मान रहे हैं। कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच यह शेरो-शायरी वाली बहस उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया रंग जोड़ती दिख रही है, जहां आरोप-प्रत्यारोप अब शायरी के लिबास में सामने आ रहे हैं।
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