बीजेपी की 20 सदस्यीय समिति बीएमसी चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करेगी। इस समिति में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी शामिल हैं।
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय मानी जाने वाली बीएमसी पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा इस बार कोई कसर छोड़ना नहीं चाहती। इसी रणनीति के तहत पहले पार्टी ने अपने सहयोगी शिवसेना के साथ सीट शेयरिंग को अंतिम रूप दिया और अब उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए 20 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने बीएमसी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन हेतु इस अहम समिति की घोषणा की है। यह समिति न केवल संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार करेगी, बल्कि उनके राजनीतिक अनुभव, स्थानीय पकड़, संगठनात्मक योगदान और चुनाव जीतने की क्षमता जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन करेगी। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत और जमीनी स्तर पर सक्रिय उम्मीदवार ही बीएमसी जैसे बड़े चुनाव में पार्टी को सफलता दिला सकते हैं।

20 सदस्यीय इस समिति में पार्टी के कई बड़े और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है। समिति के अध्यक्ष स्वयं मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम हैं। उनके अलावा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को भी समिति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ विधायक और संगठन के अनुभवी नेता भी इस समिति का हिस्सा बनाए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, समिति का उद्देश्य केवल टिकट वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह भी सुनिश्चित करेगी कि उम्मीदवार पार्टी की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हों और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के सामने रख सकें। बीएमसी चुनाव को देखते हुए पार्टी इस बार स्थानीय स्तर पर साफ-सुथरी छवि और विकास कार्यों से जुड़े चेहरों को आगे लाने की तैयारी में है।
भाजपा और शिवसेना के बीच सीट शेयरिंग को लेकर पहले ही सहमति बन चुकी है। दोनों दलों ने आपसी बातचीत के जरिए यह तय किया है कि किस पार्टी को कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है। गठबंधन के तहत भाजपा और शिवसेना मिलकर बीएमसी में मजबूत बहुमत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि गठबंधन की एकजुटता ही विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगी।
बीएमसी चुनाव को महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बीएमसी का बजट कई राज्यों से भी बड़ा है और यहां सत्ता हासिल करना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम माना जाता है। लंबे समय तक बीएमसी पर शिवसेना का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने भी मुंबई में अपनी स्थिति मजबूत की है। अब पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम ने समिति के गठन के बाद संकेत दिए हैं कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और संगठनात्मक होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लिया जाएगा और स्थानीय स्तर पर जनता की राय को महत्व दिया जाएगा। इसके लिए वार्ड स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने और संभावित उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग की योजना बनाई गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े जैसे वरिष्ठ नेताओं को समिति में शामिल करना भाजपा की गंभीरता को दर्शाता है। इससे साफ है कि पार्टी बीएमसी चुनाव को सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है।
कुल मिलाकर, भाजपा की यह रणनीति दिखाती है कि पार्टी बीएमसी चुनाव में पूरी तैयारी और मजबूत संगठनात्मक ढांचे के साथ उतरने जा रही है। शिवसेना के साथ गठबंधन को अंतिम रूप देने और उम्मीदवार चयन के लिए 20 सदस्यीय समिति के गठन से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति और भी ज्यादा गर्माने वाली है।