मायावती ने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र भी राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भीषण समस्या सहित देश व जनहित की विकराल रूप धारण कर रही समस्याओं पर विचार किये बिना ही कल समाप्त हो गया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान सामने आए हिजाब विवाद ने सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। मामला उस वक्त तूल पकड़ गया, जब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से नकाब (हिजाब) हटाने का वीडियो सामने आया। इसके बाद विपक्षी दलों के साथ-साथ कई मुस्लिम संगठनों ने इस घटना पर आपत्ति जताई और इसे महिला की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा।

इस पूरे विवाद पर अब उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह दी है और इस घटनाक्रम को “दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है।
मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने का मामला, सुलझने की बजाय लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि खासकर मंत्रियों और नेताओं की बयानबाजी के कारण यह विवाद और गहराता जा रहा है, जो किसी भी दृष्टि से ठीक नहीं है। मायावती के अनुसार, इस तरह के संवेदनशील मामलों में संयम और समझदारी से काम लिया जाना चाहिए था।

बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट तौर पर कहा कि किसी भी महिला की व्यक्तिगत गरिमा, सम्मान और धार्मिक आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने इशारों में कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मायावती ने यह भी कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और निजी आस्था के पालन का अधिकार देता है, और इसका सम्मान सभी को करना चाहिए, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
मायावती ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह देते हुए कहा कि इस पूरे मामले पर आत्ममंथन और पश्चाताप करना ज्यादा उचित होगा, ताकि विवाद और न बढ़े। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की घटनाएं राजनीतिक लाभ या नुकसान से कहीं ऊपर होती हैं और इन्हें संवेदनशीलता के साथ संभालने की जरूरत होती है।
इस विवाद के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि यह घटना महिलाओं के सम्मान और अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है। वहीं, कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक हस्तक्षेप करार देते हुए मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं और मंत्रियों ने नीतीश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था और इस घटना को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हालांकि, इन बयानों के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ गया, जैसा कि मायावती ने अपनी पोस्ट में भी उल्लेख किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब देश में धार्मिक पहचान, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक आचरण जैसे मुद्दों पर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है।
कुल मिलाकर, हिजाब विवाद ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है और राष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। मायावती की टिप्पणी से यह साफ है कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगली प्रतिक्रिया और इस विवाद के संभावित समाधान पर टिकी हुई हैं।
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