कोडीन कफ सिरप केस में यूपी से बड़ी खबर, CM योगी को सौंपी गई रिपोर्ट—खुलासों पर नजर !

कोडीन कफ सिरप मामले में एसआईटी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंप दी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक कोडीनयुक्त कफ सिरप 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मेडिकली प्रतिबंधित है.

उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप के दुरुपयोग को लेकर चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि कोडीन कफ सिरप खुद में अवैध दवा नहीं है, लेकिन इसके अवैध डायवर्जन और बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री ने इसे नशे के कारोबार का बड़ा जरिया बना दिया था। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार की कार्रवाई और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

कोडीन कफ सिरप केस में यूपी से बड़ी खबर, CM योगी को सौंपी गई रिपोर्ट—खुलासों पर नजर !
कोडीन कफ सिरप केस में यूपी से बड़ी खबर, CM योगी को सौंपी गई रिपोर्ट—खुलासों पर नजर !

बच्चों के लिए मेडिकली प्रतिबंधित

एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, कोडीन युक्त कफ सिरप 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए चिकित्सकीय रूप से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, कई जगहों पर इसका खुलेआम और अनियंत्रित तरीके से बिक्री की जा रही थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेडिकल नियमों की अनदेखी कर इसे नशे के रूप में इस्तेमाल करने के लिए बाजार में उतारा गया, जो गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा बन गया।

कफ सिरप अवैध नहीं, लेकिन दुरुपयोग बड़ा

कफ सिरप अवैध नहीं, लेकिन दुरुपयोग बड़ा
कफ सिरप अवैध नहीं, लेकिन दुरुपयोग बड़ा

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोडीन कफ सिरप को सरकार या कानून ने पूरी तरह अवैध घोषित नहीं किया है। यह एक निर्धारित औषधि है, जिसका उपयोग डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। समस्या इसकी वैधता से ज्यादा इसके दुरुपयोग की है। एसआईटी के मुताबिक, ड्रग माफियाओं ने इस दवा का बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण (जखीरा) किया और फिर इसे नशे के तौर पर खपाया।

बिना प्रिस्क्रिप्शन बिक्री के लिए डायवर्जन

रिपोर्ट में कहा गया है कि नशे के उद्देश्य से कफ सिरप को वैध सप्लाई चैन से डायवर्ट किया गया। ड्रग माफियाओं ने इसे मेडिकल जरूरतों के नाम पर खरीदा, लेकिन बाद में बिना डॉक्टर की पर्ची के खुले बाजार में बेचा। यह पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था, जिसमें नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।

सुपर स्टॉकिस्ट से रिटेलर तक बनी चेन

एसआईटी की जांच में सामने आया है कि ड्रग माफियाओं ने सुपर स्टॉकिस्ट से लेकर थोक विक्रेता और रिटेल मेडिकल स्टोर तक एक मजबूत सप्लाई चेन बना रखी थी। इसी चेन के जरिए कफ सिरप को अलग-अलग जिलों और राज्यों तक पहुंचाया जाता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नेटवर्क केवल कुछ दुकानों तक सीमित नहीं था, बल्कि संगठित अपराध की तरह काम कर रहा था।

यूपी सरकार का सबसे बड़ा क्रैकडाउन

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अवैध नेटवर्क को तोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने देश का अब तक का सबसे बड़ा क्रैकडाउन चलाया। पुलिस, ड्रग कंट्रोल विभाग और अन्य एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी मात्रा में कफ सिरप जब्त किया गया, कई लाइसेंस रद्द किए गए और बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

सिर्फ कफ सिरप ही नहीं, अन्य दवाएं भी निशाने पर

एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने केवल कोडीन कफ सिरप ही नहीं, बल्कि सिडेटिव्स और स्लीपिंग पिल्स की अवैध बिक्री के खिलाफ भी अभियान चलाया। इन दवाओं का भी नशे के लिए बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि कुछ मेडिकल स्टोर बिना किसी वैध पर्ची के ये दवाएं बेच रहे थे।

पूरा मामला अवैध डायवर्जन और बिक्री का

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह पूरा मामला दवाओं के अवैध डायवर्जन, अनियंत्रित बिक्री और कमजोर निगरानी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सरकार अब नियमों को और सख्त करने, निगरानी बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की तैयारी में है।

सरकार का मानना है कि इस तरह के अभियान से न केवल ड्रग माफियाओं की कमर टूटेगी, बल्कि युवाओं और बच्चों को नशे की गिरफ्त में जाने से भी रोका जा सकेगा। आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट के आधार पर और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

Also Read :

हिजाब विवाद के बीच PM मोदी से मिले नीतीश, 20 मिनट की मुलाकात—माफी पर सस्पेंस !