TMC से निष्कासित पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया. वह आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर रहे.
22 दिसंबर 2025 को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान किया। हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखा है और इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। उनके इस कदम को बंगाल की सियासत में एक नए समीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

‘जनता उन्नयन पार्टी’ की घोषणा
नई पार्टी की घोषणा करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र बिंदु केवल और केवल आम लोगों का विकास होगा। उन्होंने बताया कि पार्टी के नाम में ‘उन्नयन’ शब्द खास तौर पर चुना गया है, क्योंकि इसका सीधा अर्थ विकास से है। हुमायूं ने कहा,
“मेरी पार्टी किसी व्यक्ति या परिवार के इर्द-गिर्द नहीं घूमेगी, बल्कि जनता के मुद्दों और उनके विकास पर फोकस करेगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देगी। हुमायूं कबीर का दावा है कि बंगाल की जनता मौजूदा राजनीतिक विकल्पों से ऊब चुकी है और एक नए विकल्प की तलाश में है।

चुनाव चिन्ह और राष्ट्रभक्ति का संदेश
हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनकी पहली पसंद ‘टेबल’ और दूसरी पसंद ‘गुलाब के जोड़े’ है। उन्होंने चुनाव आयोग से इन प्रतीकों में से किसी एक को पार्टी के लिए आवंटित करने की अपील की है।
अपने भाषण के अंत में हुमायूं कबीर ने मंच से ‘वंदे मातरम’ के नारे भी लगवाए, जिसे उन्होंने राष्ट्रभक्ति और एकता का प्रतीक बताया। यह दृश्य राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान
TMC से निष्कासन के बाद हुमायूं कबीर ने यह साफ कर दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे। उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। हुमायूं का दावा है कि उनकी पार्टी चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई न सिर्फ तृणमूल कांग्रेस से होगी, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ भी होगी। हुमायूं कबीर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह कांग्रेस, CPIM और AIMIM जैसी पार्टियों के साथ किसी भी तरह का गठबंधन नहीं करेंगे।
बाबरी मस्जिद विवाद से चर्चा में
बीते दिनों हुमायूं कबीर लगातार सुर्खियों में रहे हैं, जिसकी एक बड़ी वजह बाबरी मस्जिद की नींव रखने से जुड़ा मामला रहा। इसी मुद्दे के बाद उनके बयान और गतिविधियां राजनीतिक बहस का केंद्र बनी रहीं। TMC से उनके निष्कासन के पीछे भी यही विवाद एक बड़ी वजह माना जा रहा है। अब नई पार्टी बनाकर हुमायूं कबीर ने साफ संकेत दे दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
मुर्शिदाबाद पर खास नजर
हुमायूं कबीर ने खास तौर पर मुर्शिदाबाद जिले को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी वहां कम से कम 10 सीटें जीतने में सफल होगी। गौरतलब है कि मुर्शिदाबाद की कुल 22 विधानसभा सीटों में से 20 पर फिलहाल TMC का कब्जा है, जबकि 2 सीटें BJP के पास हैं। ऐसे में हुमायूं का यह दावा ममता बनर्जी के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
ममता बनर्जी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हुमायूं कबीर का चुनावी मैदान में उतरना तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां उनकी व्यक्तिगत पकड़ मजबूत मानी जाती है। अल्पसंख्यक वोटों में संभावित सेंध और स्थानीय स्तर पर नाराजगी का फायदा हुमायूं उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, जनता उन्नयन पार्टी के गठन के साथ बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हुमायूं कबीर का यह सियासी दांव जमीन पर कितना असर दिखा पाता है और क्या वह सच में बंगाल की राजनीति में किंगमेकर बनकर उभरते हैं या नहीं।
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