आरजेडी नेता का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव है कि वे सीएम की कुर्सी छोड़ें. बीजेपी इस कोशिश में है कि बिहार में क्षेत्रीय दलों को तोड़ दें.
बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद विपक्षी दलों के दावे सियासी तापमान बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने इस मुलाकात को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला आरोप लगाया है, जिससे बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।

दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीते सोमवार, 22 दिसंबर 2025 को दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। हालांकि, जेडीयू और बीजेपी की ओर से इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन विपक्ष ने इसे किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।

मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान आरजेडी के नेता और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने इस मुलाकात को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई इस बैठक में बिहार की सत्ता को लेकर गहन चर्चा हुई है। मृत्युंजय तिवारी के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी अब नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की योजना बना चुकी है और इस दिशा में कदम भी बढ़ाए जा रहे हैं।
मृत्युंजय तिवारी ने कहा, “बीजेपी का दबाव है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ें। दिल्ली की बैठक में इसी मुद्दे पर बातचीत हुई है। बीजेपी चाहती है कि बिहार में उनका खुद का मुख्यमंत्री हो।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में सभी क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने और तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि सत्ता पर पूरी तरह कब्जा किया जा सके।
आरजेडी प्रवक्ता ने अपने बयान में ‘खेला’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि बिहार में बड़ा राजनीतिक खेल होने वाला है। उन्होंने कहा, “खरमास के बाद, यानी 14 जनवरी के बाद बिहार में खेला होगा। दही-चूड़ा खाने के बाद खेल होगा।” उनके इस बयान को मकर संक्रांति के बाद संभावित राजनीतिक उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है।
आरजेडी का आरोप है कि बीजेपी नीतीश कुमार को अब सिर्फ एक मजबूरी के सहयोगी के तौर पर देख रही है और 2025-26 के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी में जुटी है। पार्टी का यह भी कहना है कि बीजेपी लंबे समय से बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की इच्छा रखती है और इसके लिए वह जेडीयू को धीरे-धीरे हाशिये पर धकेल रही है।
हालांकि, जेडीयू और बीजेपी दोनों ने आरजेडी के इन दावों को सिरे से खारिज किया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार और बीजेपी नेतृत्व के बीच संबंध पूरी तरह सामान्य हैं और दिल्ली की बैठक विकास, केंद्र-राज्य समन्वय और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर थी। बीजेपी की ओर से भी इसे विपक्ष की “कल्पनाशील राजनीति” करार दिया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका हमेशा से निर्णायक रही है। वे कई बार राजनीतिक पाला बदल चुके हैं और हर बार नए समीकरण गढ़े हैं। ऐसे में आरजेडी के दावे को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। हालांकि, फिलहाल कोई ठोस संकेत नहीं हैं कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
कुल मिलाकर, नीतीश कुमार की दिल्ली यात्रा के बाद बिहार की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म है। खरमास के बाद क्या वाकई बिहार में ‘खेला’ होगा या यह सिर्फ विपक्ष की राजनीतिक रणनीति है, इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा। लेकिन इतना तय है कि नए साल की शुरुआत के साथ ही बिहार की सियासत और ज्यादा रोचक होने वाली है।
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